आठवां अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

परमहंसजी का जीवन सभी सत्यान्वेषियों को योग ध्यान की दीर्घ काल से सम्मानित तकनीकों से परिचित कराने के लिए समर्पित था। अतः उन्हें यह जानकर बहुत प्रसन्नता होगी कि विश्व अब योग के दर्शन और विज्ञान को हर वर्ष सम्मानित कर रहा है। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, योग में वर्तमान विश्व की अधिकांश रुचि उन शिक्षाओं का परिणाम है जो परमहंस योगानन्दजी सौ वर्ष से भी पहले भारत से अमेरिका ले गए थे। “यदि भारत के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के विचार को संयुक्त राष्ट्र में आसानी से स्वीकार किया गया है, तो इसका अधिकांश श्रेय परमहंस योगानन्दजी को जाना चाहिए, जो अमेरिका में भारत के पहले योग गुरु थे।” एक ऑनलाइन समाचार आउटलेट की सूचना के अनुसार। “उन्होंने एक शताब्दी पहले संयुक्त राज्य अमेरिका में योग की नींव रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।”

श्रीमद्भगवद्गीता (ईश्वर-अर्जुन संवाद) के अपने अत्यधिक प्रशंसित अनुवाद और टिप्पणी में परमहंस योगानन्दजी बताते हैं: “योग शब्द सही संतुलन या मानसिक समरूपता का प्रतीक है जो आत्मा के साथ मन के मिलन का परिणाम है। योग ध्यान की आध्यात्मिक तकनीक को भी इंगित करता है जिसके माध्यम से व्यक्ति आत्मा के साथ एकता प्राप्त करता है। इसके अलावा, योग प्रत्येक उस कार्य को भी दर्शाता है जो इस दिव्य मिलन की ओर ले जाता है।”

कार्यक्रम के बारे में

21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) ने शरीर, मन और आत्मा के कल्याण हेतु व्यक्तिगत और ऑनलाइन दोनों तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया।

इन कार्यक्रमों के दौरान, वाईएसएस संन्यासियों ने समझाया कि ध्यान-योग के अभ्यास द्वारा अपने भीतर शांति कैसे उत्पन्न करें। कार्यक्रमों में एक निर्देशित ध्यान सत्र भी शामिल था जिसमें उचित आसन, प्रारंभिक श्वास व्यायाम, एक प्रतिज्ञापन, और मानस-दर्शन का अभ्यास करवाया गया।

ऑनलाइन कार्यक्रम

“ध्यान-योग के माध्यम से शांति का अनुभव करें”

(निर्देशित ध्यान-सत्र सम्मिलित है)

(हिंदी में)


शनिवार, 18 जून,
शाम 6:00 बजे – शाम 7:00 बजे (भारतीय समयानुसार)

कार्यक्रम अनुसूची

  • शाम 5:30 से शाम 6:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार) — वाईएसएस संन्यासियों द्वारा भक्तिपूर्ण चैंटिंग सत्र
  • शाम 6:00 से शाम 7:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार) — स्वामी ईश्वरानन्द गिरि द्वारा ध्यान-योग का सत्र

इस कार्यक्रम में शामिल हों

शनिवार, 18 जून को वाईएसएस के संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने ध्यान-योग पर एक सत्र का संचालन हिंदी में किया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान परमहंस योगानन्दजी और उनके कार्यों का परिचय प्रस्तुत किया गया। स्वामीजी ने समझाया कि ध्यान-योग के अभ्यास से अपने भीतर शांति कैसे उत्पन्न करें, और फिर एक निर्देशित ध्यान सत्र संचालित किया जिसमें उचित आसन, प्रारंभिक श्वास व्यायाम, प्रतिज्ञापन और मानस दर्शन का अभ्यास सम्मिलित था।

यह कार्यक्रम वाईएसएस के राँची आश्रम से लाइव-स्ट्रीम (सीधा-प्रसारण) किया गया।

“ध्यान-योग के माध्यम से शांति का अनुभव करें”

(निर्देशित ध्यान-सत्र सम्मिलित है)

(अंग्रेजी में)


रविवार, 19 जून,
सुबह 10:30 – 11:30 बजे (भारतीय समयानुसार)

कार्यक्रम अनुसूची

  • सुबह 10:00 से 10:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार) — वाईएसएस संन्यासियों द्वारा भक्तिपूर्ण चैंटिंग सत्र
  • सुबह 10:30 से 11:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार) — स्वामी अच्युतानन्द गिरि द्वारा ध्यान-योग का सत्र

इस कार्यक्रम में शामिल हों

रविवार, 19 जून को वाईएसएस संन्यासी स्वामी अच्युतानन्द गिरि ने अंग्रेज़ी में ध्यान-योग पर एक सत्र संचालित किया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान परमहंस योगानन्दजी और उनके कार्यों का एक परिचय प्रस्तुत किया गया। स्वामीजी ने समझाया कि ध्यान-योग के अभ्यास से अपने भीतर शांति कैसे उत्पन्न करें, और फिर एक निर्देशित ध्यान सत्र संचालित किया जिसमें उचित आसन, प्रारंभिक श्वास व्यायाम, प्रतिज्ञापन, और मानस दर्शन का अभ्यास सम्मिलित था।

यह कार्यक्रम वाईएसएस के दक्षिणेश्वर आश्रम से लाइव-स्ट्रीम (सीधा-प्रसारण) किया गया।

वैयक्तिक कार्यक्रम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वाईएसएस केंद्र और मंडलियों ने भी विशेष वैयक्तिक कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रम, स्थान और अन्य संबंधित जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।

परमहंस योगानन्द के बारे में

Founder Paramahansa Yoganandaपरमहंस योगानन्दजी ने अपनी व्यापक शिक्षाओं से लाखों लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। व्यापक रूप से “पश्चिम में योग के जनक” के रूप में सम्मानित, परमहंसजी विश्व स्तर पर वैज्ञानिक प्राणायाम (जीवन शक्ति नियंत्रण) प्रविधियों की प्रणाली सहित शिक्षाएं उपलब्ध कराने वाले पहले व्यक्ति थे। योग का अंतिम लक्ष्य एक सर्वज्ञ, सर्वव्यापी आत्मा के रूप में स्वयं की प्राप्ति है। योगदा सत्संग पाठमाला में वर्णित, योगानन्दजी की शिक्षाएं धर्म के इस अंतर्निहित आधार के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। और यह एक ऐसी प्रणाली है जो लगातार अधिक से अधिक संख्या में उन लोगों को आकर्षित करती है जो न केवल हठ योग के भौतिक लाभों में रुचि रखते हैं बल्कि वे भी जो अपनी मानसिक क्षमताओं को विकसित करने, और सबसे बढ़कर, स्वयं को आध्यात्मिक रूप से उन्नत करने में रुचि रखते हैं। 

उनकी शिक्षाएं और उनके द्वारा सिखाई गई ध्यान प्रविधियां आज नीचे दिए गए माध्यमों द्वारा उपलब्ध हैं:

  • योगदा सत्संग पाठमाला, एक व्यापक गृह-अध्ययन श्रृंखला, जिनकी उत्पत्ति स्वयं योगानंदजी ने की थी। यह डिजिटल ऐप में भी उपलब्ध है
  • किताबें, रिकॉर्डिंग और वाईएसएस के अन्य प्रकाशन, वाईएसएस संस्था की स्थापना उन्होंने विश्वभर में अपनी शिक्षाओं का प्रसार करने के लिए की थी
  • योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया के संन्यासियों द्वारा देश भर में आयोजित दौरे जहां वे शक्ति संचार, एकाग्रता और ध्यान की वैज्ञानिक योग प्रविधियों की व्याख्या करते हैं
  • संन्यासियों द्वारा संचालित रिट्रीट
  • ऑनलाइन साधना संगम
  • बच्चों के लिए ध्यान और आध्यात्मिक जीवन शैली पर कार्यक्रम

टिप्पणियाँ

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया के बारे में

Main Building of Ranchi Ashramपिछले 100 वर्षों से, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) अपने संस्थापक श्री श्री परमहंस योगानन्द, जो पश्चिम में व्यापक रूप से योग के जनक के रूप में सम्मानित हैं, उनके आध्यात्मिक और मानवीय कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है।

परमहंस योगानन्दजी ने, पवित्र आध्यात्मिक-विज्ञान क्रियायोग जिसकी उत्पत्ति सहस्राब्दियों पहले भारत में हुई, उसकी सार्वभौमिक शिक्षाओं को उपलब्ध कराने हेतु 1917 में योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की। इन गैर-सांप्रदायिक शिक्षाओं में सर्वांगीण सफलता और कल्याण को प्राप्त करने के लिए एक संपूर्ण दर्शन और जीवन शैली के साथ-साथ जीवन के अंतिम लक्ष्य — आत्मा के ब्रह्म (ईश्वर) के साथ मिलन के लिए ध्यान की प्रविधियां सन्निहित हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता (ईश्वर-अर्जुन संवाद) पर अपने अत्यधिक प्रशंसित अनुवाद और टिप्पणी में परमहंस योगानन्दजी बताते हैं: “योग शब्द पूर्ण सन्तुलन अथवा मानसिक समता का प्रतीक है जो मन के परमेश्वर के साथ सम्पर्क हो जाने का परिणाम है। योग, ध्यान की आध्यात्मिक प्रविधि को भी इंगित करता है, जिसके द्वारा व्यक्ति ईश्वर एकात्मता प्राप्त करता है। इसके अतिरिक्त, योग किसी भी ऐसे कार्य का प्रतीक है जो इस दिव्य मिलन की ओर ले जाता है।”