टिप्पणियाँ एवं समीक्षाएँ

योगी कथामृत पर टिप्पणियाँ

Virat kohli, Narendra Modi, Ravi shastri and others with Autobiography of Yogi
Facebook comments of many celebrities on Autobiography of Yogi

"एक प्रत्यक्षदर्शी द्वारा आधुनिक हिन्दू सन्तों की असाधारण जीवन कथाओं एवं अलौकिक शक्तियों के वर्णनों से युक्त इस पुस्तक का सामयिक और सर्वकालिक, दोनों दृष्टियों से महत्त्व है।...निस्सन्देह उनकी असाधारण जीवन-कथा भारत की आध्यात्मिक संपदा पर अत्यधिक प्रकाश डालने वाली पश्चिम में प्रकाशित पुस्तकों में से एक है।"

— डब्लू वाई ईवान्स वेंटज एम ए, डी लिट, डी एस सी, सुविख्यात विद्वान तथा पौर्वात्य धर्म पर कई पुस्तकों के लेखक

"इस विमोहक संसार में कुछ अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए मैं आपका आभारी हूँ।"

— थॉमस मैन, नोबल पुरुस्कार विजेता

"कुछ ही पुस्तकें...परमहंस योगानन्द कृत 'योगी कथामृत' की तुलना में लोकप्रिय धर्मशास्त्रों पर अधिक प्रभाव डाल पाई हैं।"

— फ्य्ल्लिस ए टिकल, लेखक गॉड टॉक इन अमरीका

"(योगानन्दजी) की सुप्रसिद्ध 'योगी कथामृत’ में वह "विश्व चैतन्य" का, जो की योगिक अभ्यासों के उच्च स्तरों में प्राप्त होता है, एवं योगिक और वेदान्तिक दृष्टि से अनेक दिलचस्प मानवी पहलुओं का आश्चर्यजनक विवरण देते हैं।"

— रार्बट एस एलवुड, पी एच डी, चेयरमैन, स्कूल ऑफ रिलिजन, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफ़ोर्निया

"अब तक लिखी गई आध्यात्मिक पुस्तकों में, ‘योगी कथामृत’ का एक अति मनोरंजक व शिक्षाप्रद पुस्तक के रूप में विख्यात होना युक्तिसंगत है।"

— टॉम बटलर बौडॉन, लेखक 50 स्पिरिचुअल क्लासिक्स : टाइमलेस विज़डम फ्रॉम 50 ग्रेट बुक्स ऑफ़ इनर डिस्कवरी, एनलाइटनमेंट एंड परपज़

"अत्यंत मोहक सादगी से पूर्ण और आत्मोद्घाटन करने वाली जीवनियों में से एक... ज्ञान का एक वास्तविक भंडार ... जिन महान विभूतियों से इन पृष्ठों में भेंट होती है ... वे यादों में मित्रों की भाँति लौटते हैं, गहन आत्याधमिक ज्ञान से समृद्ध, और इन सभी महानतम विभूतियों में से एक है, ईश्वरोन्मत्त स्वयं लेखक!"

— डॉ एना वॉन हेल्मोल्ट्ज़-फेलन, अंग्रेजी की प्रवक्ता, मिनेसोटा यूनिवर्सिटी

"दशक-दर-दशक, 'योगी कथामृत' हमारी सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में से एक रही है। जबकि दूसरी पुस्तकें आती हैं और चली जाती हैं, परन्तु यह बनी रही क्योंकि समय के साथ आलोचनात्मक जांच-पड़ताल में यह पता चला कि यह हृदयस्पर्शी और उत्कृष्ट ढंग से आध्यात्मिक तृप्ति के द्वार खोलती है।"

— बोधि ट्री बुक स्टोर, लॉस ऐंजिलीस

"मैं घर में ढेरों 'योगी कथामृत' रखता हूँ और लोगों को लगातार बाँटता रहता हूँ। जब लोगों को ‘कायाकल्प’ की आवश्यकता हो: मैं कहता हूँ, कि इसे पढ़ो क्योंकि यह हर धर्म का मर्म है।"

— जॉर्ज हैरिसन

"आध्यात्मिक पथ पर तुम्हें बड़ी मुश्किल से कोई मिलेगा, जिसका जीवन इस गहन साहित्यिक कृति से प्रभावित न हुआ हो। इसने मुझे योग, ध्यान और आत्म-अन्वेषण के ऐसे पथ पर डाला जो आज तक जारी है।"

— जैक कैनफ़ील्ड, चिकन सूप फॉर द सोल श्रंखला के सहंसृजक

" 'योगी कथामृत' को आधुनिक युग का उपनिषद् माना जाता है... इसने संसार के सैंकड़ों व हज़ारों सत्यान्वेषियों की आध्यात्मिक प्यास को तृप्त किया है। भारतीय संतों व दर्शनशास्त्र संबंधी इस पुस्तक की लोकप्रियता के अभूतपूर्व प्रसार को देख हम भारतीय मुग्ध और आश्चर्यचकित है। हमें अत्यंत संतुष्टि और गौरव का अनुभव होता है कि 'योगी कथामृत' के स्वर्णिम पात्र में भारत के सनातन धर्म, शाश्वत सत्य के सिद्धान्तों, के अविनाशी अमृत को संग्रहित किया गया है।

— डॉ आशुतोष दास, एम ए, पी एच डी, डी लिट्, प्रवक्ता, कोलकाता विश्वविद्यालय

"पश्चिमी भाषाओं में कई पुस्तकें हैं जो भारतीय दर्शन विशेषतः योग की व्याख्या करती हैं, लेकिन कोई भी अन्य हमें इतनी स्पष्टता से किसी के अनुभवों को व्यक्त नहीं करती, जिसने इन सिद्धांतों को जिया और आत्मसात किया हो।"

— डॉ कुर्ट एफ लीडेकर, प्रवक्ता दर्शन शास्त्र, वर्जिनिया विश्वविद्यालय

"मैं एक किशोर के रूप में परमहंस योगानन्द से 1930 के दशक में दो अवसरों पर मिला ... बीस साल बाद मुझे किसी ने 'योगी कथामृत' दी ... जिस क्षण मैंने उस पुस्तक को पढ़ना आरम्भ किया, उसने मुझे कुछ ऐसा किया जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता। मैंने योगियों द्वारा लिखित योग पर कई पुस्तक पढ़ी हैं; परन्तु मैं किसी पुस्तक से इस तरह प्रभावित नहीं हुआ, जैसा कि इससे। इसमें कोई जादू है।"

— रवि शंकर, भारतीय शास्त्रीय संगीतज्ञ

"मेरी बड़ी इच्छा है कि मैं परमहंस योगानन्द कृत 'योगी कथामृत' लिख पाता, क्योंकि तब मुझे वह सभी उत्कृष्ट अनुभव होते जिनका वर्णन उन्होंने सदी के आरंभिक काल में, भारत में बड़े होते हुए किया। कौन नहीं चाहेगा कि वह सच्चे गुरुओं और जीवंत संतों को जान पाता?"

— एंड्रू वैल, एम डी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और एट वीक्स टू ऑप्टिमम हेल्थ के लेखक

"जो पूर्वीय दर्शनशास्त्र और ध्यान प्रविधियों में रूचि रखते हैं ... एक पुस्तक जिसने मेरे जीवन को असीमित रूप से समृद्ध किया, और हज़ारों की पसंदीदा बनी हुई है, 'योगी कथामृत' है। परमहंस योगानन्द एक रचनात्मक लेखक और गहन भक्तिपूर्ण संन्यासी थे और उनकी आत्मकथा आज उपलब्ध सर्वाधिक सम्मोहक पुस्तकों में से एक है।"

— केट टटल, सैन डिएगो यूनियन-ट्रिब्यून

समाचारपत्रों में समीक्षा:

"एक अद्वितीय वृतांत"

— द न्यू यॉर्क टाइम्स

"एक मनमोहक और स्पष्ट व्याख्यापूर्ण अध्ययन" – न्यूज़वीक

— न्यूज़वीक

"आपकी अपनी धार्मिक आस्थाएँ कुछ भी हों, आपको 'योगी कथामृत' में मानवीय आत्मा की शक्ति की आनंदपूर्ण पुष्टि प्राप्त होगी।"

— वेस्ट कोस्ट पुस्तक समीक्षा

"सही मायने में एक अद्भुत पुस्तक"

— नेचर हेल - प्रैक्सिस, जर्मनी

"... एक ज्ञान इतना गहन कि व्यक्ति मंत्रमुग्ध अनुभव करता है, निरंतर प्रभावित।"

— हैग्शे पोस्ट, हॉलैंड

“हमारे वर्तमान समय के पाठक को योगी कथामृत जैसी सुन्दर गहन और सच्ची पुस्तक कदाचित ही मिले ... व्यक्तिगत अनुभवों से समृद्ध और ज्ञान से परिपूर्ण ... "

— ला पाज़, बोलिविया

"इस पुस्तक के प्रसंग असाधारण हैं... विशेषतः समकालीन ईसाईयों के लिए, जिनकी सुविधापूर्ण आदत है कि चमत्कारों को विगत सदियों की बात कह कर टाल देते हैं ...इसकी दार्शनिक पंक्तियाँ अत्यंत रोचक हैं। योगानन्द धार्मिक मतभेदों से ऊपर आध्यात्मिक स्तर पर हैं ... पुस्तक अच्छी, पढ़ने योग्य है।"

— चाइना वीकली रिव्यू , संघाई

"... एक स्मारकीय कार्य।"

— शैफील्ड टेलीग्राफ, इंग्लैंड

"इस शताब्दी के गहनतम एवं अत्यंत महत्वपूर्ण संदेशों में से एक।"

— नोयू डेटा जेतंग, ऑस्ट्रिया

"चाहे योगानन्द अमर संतों या चमत्कारी उपचारों के विषय में बताएँ या फिर भारतीय ज्ञान और योग विज्ञान की चर्चा करें पाठक मंत्रमुग्ध हो जाता है।"

— डाई वेलट्वॉश, ज़्यूरिख, स्विट्ज़रलैंड

"पृष्ठ जो पाठक को रोमांचित करेंगे, क्योंकि वह प्रत्येक मानव के ह्रदय में सुप्त आकांक्षाओं तथा अपेक्षाओं को भाते हैं।"

— इल टेम्पो डेल ल्यूनेडी, रोम

"यह वह पुस्तक है जिसे प्रेरित कहा जा सकता है।"

— एल्फ्थेरिआ, ग्रीस

"हमें इस महत्वपूर्ण आत्मकथा को आध्यात्मिक क्रांति ला सकने की शक्ति का श्रेय देना चाहिए।"

— सकलेजविग - होलस्त्नेशे, टैग्सपोस्ट, जर्मनी

“इस योगी की यह आत्मकथा एक मोहक पठन है।”

— टाइम्स ऑफ इण्डिया

"एक अत्यंत पठनीय शैली में....योगानन्द योग को विश्वासप्रद विषय के रूप में प्रस्तुत करते हैं, और जो 'उपहास उड़ाने' आए थे वे 'प्रार्थना करने' के लिए रुक सकते हैं।"

— सैन फ्रांसिस्को क्रोनिकल

“वास्तविक प्रकटीकरण...मानवजाति को स्वयं को और अच्छी तरह में सहायता प्रदान करेगी...असाधारण...आनन्दायक चातुर्य और सम्मोहक सत्यता से वर्णन की गयी...एक उपन्यास के समान मनोरंजक”

— न्यूज़-सेंटिनल, फोर्ट वेन , इण्डियना

“हज़ारों पुस्तकें जो हर वर्ष प्रकाशित होती हैं, उनमें से कुछ मनोरंजक होती हैं, कुछ शिक्षा प्रदान करती हैं, कुछ ज्ञानवर्धक होती हैं। एक पाठक अपने को भाग्यशाली समझ सकता है यदि उसे ऐसी पुस्तक मिले जो यह तीनों काम कर दे। 'योगी कथामृत' इन सबसे भी अनुपम है — यह एक ऐसी पुस्तक है जो मन और आत्मा के द्वार खोल देती है।"

— इण्डिया जर्नल

“...और कुछ नहीं, अपितु पश्चिमी पाठक को प्रभावित और रुचि दे सकता है”

— सैटरडे रिव्यु

"योग की इस प्रस्तुति के सामान अंग्रेजी या किसी भी अन्य यूरोपीय भाषा में, इससे पूर्व कुछ भी नहीं लिखा गया है।"

— कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस, यू एस ए

"लाभप्रद ... आध्यात्मिक साहस से परिपूर्ण एक जीवन।"

— यूनाइटेड प्रैस

"अंततः ब्रह्माण्ड की एक गैर-विरोधात्मक एवं अंतर्ज्ञानात्मक संतोषजनक छवि, अंतरिक्ष में घूमते विश्व से लेकर मानव जीवन के सूक्ष्मतम विवरण तक।"

— रनर्स वर्ल्ड

“मनोरंजक, प्रेरणादायक; एक ‘साहित्यिक रचना’!"

— ग्रान्डिस सिंडिकेटेड बुक रिव्यूइस्ट

ऑडियोबुक के संस्करण की समीक्षाएँ — सर बेन किंग्सले द्वारा वाचित, जिन्होंने सर रिचर्ड एटनबरो की फिल्म 'गाँधी' में हमारे राष्ट्रपिता की भूमिका निभाई।

"एक उत्तम श्रवण अनुवाद।...योगानन्द की उत्कृष्ट कथा कहने की कला भारतीय बुद्धि, आकर्षण और करुणामय ज्ञान के साथ मौखिक परंपरा का प्रतीक है।...यह असाधारण कृति किसी भी पुस्तकालय को अति समृद्ध करेगी।...किंग्सले ने शानदार वृतांत दिया है।"

— लाइब्रेरी जर्नल

"बेन किंग्सले, जिन्होंने 'गाँधी' की शीर्षक भूमिका में विश्वव्यापी पहचान तथा एक अकादमी अवार्ड अर्जित किया, की मंत्रमुग्ध करने वाली वाणी है।... उनका सूक्ष्म नाट्यरूपांतरण, व्यक्त करता है... पुस्तक में गुंथी अनेकों रंग बिरंगी घटनाओं का आकर्षण। उनकी संवेदनशील व्याख्या, इसे मनोहर इतिवृत एकदम सजीव कर देती है।...अत्यधिक स्वीकृत!"

— लीडिंग एज रिव्यू

"1946 में प्रथम बार प्रकाशित और लेखक द्वारा बाद में विस्तारित, दुनिया के आध्यात्मिक साहित्य के बहुत महत्वपूर्ण लेखों में से एक है, क्योंकि यह आध्यात्मिक जीवन का सार व्यक्त करती है। इस उपकरण के लिए किंग्सले का चयन सर्वोत्तम है।...यदि आपने यह (पुस्तक) पहले पढ़ी भी है, तो भी संभव है कि जो यह कहती है, आपने उसे वास्तव में कभी नहीं सुना।... ये शब्द ताज़ा व नए लगते हैं क्योंकि वह बोले गए हैं। किंग्सले का ध्यान केंद्रित है; शब्द सम्मोहक हैं।

— दी सांता फे सन

"एक मनोरंजक और पुरस्कृत संस्करण जो श्रोताओं को आँखों द्वारा हृदय और आत्मा (के द्वार) खोलने की अनुमति देता है। एक बहुमूल्य व्यक्तिगत अनुभव।"

— द बुक रीडर

"अतिभव्य वर्णन।...किंग्सले की स्पष्ट वाणी, योगानंद के असाधारण रोचक वृत्तांत को वाक्पटुता, मनोहरता और शिष्ट्ता से सजीव करती है।"

— नापरा रिव्यू

“अमरीकी आध्यात्मिक अनुभवों की खोज में रहते हैं।... परमहंस योगानन्द एक ऐसा मार्ग दिखाते हैं जो विश्व के सभी धर्मों के अनुरूप है।"

— हेरॉल्ड जनरल स्पार्टनबर्ग उत्तरी कैरोलिना

"योगानन्द की आत्मकथा को दीर्घकाल से एक आध्यात्मिक गौरव ग्रन्थ माना जाता है।...ब्रिटिश अभिनेता बेन किंग्स्ले की वाणी इस श्रवण संस्करण को अलंकृत करती है ... (और) योगी के वृतांत को उत्कृष्टता से सजीव करती है।"

— मिडवेस्ट बुक रिव्यू

"(किंग्स्ले का) सम्मोहक वाचन, श्रोता को एक महान विभूति के जीवन की असाधारण यात्रा पर ले जाता है..."

— द बिलिंग्स गज़ेट

"पाठक जो योगी की वाक्पटुता और चातुर्य से परिचित हैं, उन्हें योगानन्द के जीवन वृतांत का, किंग्स्ले द्वारा संवेदनशील और गूढ़ नाट्यरूपांतरण हर्षित करेगा... शायद ही इसकी बराबरी की कोई और विद्यमान हो जिसमें आत्मकथा जैसी सच्ची प्रमाणिकता हो और तुम्हारे धार्मिक विश्वासों की परवाह किये बिना उनके परे तुम्हें भेजने का आश्वासन देती हो।"

— ब्रांचस

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