परमहंस योगानन्द
आध्यात्मिक गौरव ग्रंथ योगी कथामृत के सुप्रसिद्ध लेखक, परमहंस योगानन्दजी ने 1917 में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया की स्थापना की ताकि सभी संस्कृतियों और राष्ट्रीयताओं के लोगों तक क्रियायोग की ध्यान प्रविधि और “जीने की कला” शिक्षाएं व्यापक रूप से पहुँच सकें जिससे वे अपनी आत्मा की सुंदरता, कुलीनता और दिव्यता को पूर्णतया अनुभव एवं व्यक्त करने में सक्षम हो सकें।
योगदा सत्संग पाठमाला
योगदा सत्संग पाठमाला के नए अंग्रेज़ी संस्करण का हिन्दी अनुवाद अब उपलब्ध है। आईए जानें कि ये पाठ कैसे आपके जीवन को रूपांतरित कर सकते हैं एवं आपको एक संतुलित जीवन जीने में सहायता कर सकते हैं।
स्वामी चिदानन्द गिरि के साथ एक विशेष सीधा प्रसारण
वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख, श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि के साथ एक विशेष सत्संग के लिए जुड़ें, 15 मार्च को, सुबह 8:30 बजे (भारतीय समयानुसार), जिसका सीधा प्रसारण लॉस एंजिलिस, USA स्थित एसआरएफ़ अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय से किया जाएगा।
साधना संगम 2026
वाईएसएस और एसआरएफ़ के अनुयायियों के लिए, जनवरी और जुलाई 2026 के बीच आयोजित होने वाले संगमों हेतु पंजीकरण प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है!
संचालित कार्यक्रम
हम आपको वाईएसएस संन्यासियों द्वारा संचालित ऑनलाइन और वैयक्तिक ध्यान-सत्र, रिट्रीट और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं।
ब्लॉग
कार्यक्रम
QUOTE OF THE DAY
Guru-Disciple Relationshipमार्च 10
My Guru showed me how to use the chisel of wisdom to make myself into a fitting temple to receive God’s Presence. Each man can do the same, if he follows the precepts of divinely illumined teachers.
– Sri Sri Paramahansa Yogananda
Yogoda Satsanga Lessons
आज का विचार
गुरु-शिष्य संबंधमार्च 10
मेरे गुरु ने मुझे दिखाया कि ईश्वर के दर्शन करने के लिए स्वयं को एक योग्य मन्दिर बनाने हेतु ज्ञान की छेनी का उपयोग कैसे किया जाए। प्रत्येक व्यक्ति ऐसा कर सकता है यदि वह दिव्य-बोध-सम्पन्न गुरुओं के उपदेशों का पालन करे।
— श्री श्री परमहंस योगानन्द,
योगदा सत्संग पाठमाला
આજે ધ્યાનમાં
ગુરુ-શિષ્ય સંબંધमार्च 10
મારા ગુરુએ મને બતાવ્યું કે, કઇ રીતે જ્ઞાનના ઓજાર વડે મારી જાતને ઈશ્વરનું સાંનિધ્ય મેળવવા માટેનાં યોગ્ય મંદિરમાં કંડારી શકાય. પ્રત્યેક માનવ તે કરી શકે છે, જો તે દિવ્યાનુભૂતિ સંપન્ન ગુરુઓની આચારસંહિતાને અનુસરે.
— શ્રી શ્રી પરમહંસ યોગાનંદ,
Yogoda Satsanga Lessons
இன்றைய தத்துவம்
குரு-சிஷ்ய உறவுमार्च 10
இறைவனை ஏற்கவல்ல ஒரு தகுந்த ஆலயமாக என்னையே ஆக்கிக் கொள்வதற்கு என் குருதேவர் எனக்கு ஞான உளியை எப்படிப் பயன்படுத்துவது என்று காண்பித்தார். தெய்வீக ஒளி பெற்ற குருமார்களின் உபதேசங்களை ஒருவன் கடைப்பிடித்தால் ஒவ்வொரு மனிதனும் அவ்வாறே செய்ய முடியும்.
-ஸ்ரீ ஸ்ரீ பரமஹம்ஸ யோகானந்தர்,
Yogoda Satsanga Lessons
నేటి సూక్తి
గురుశిష్య సంబంధంमार्च 10
దైవసాన్నిధ్యం పొందడానికి తగిన దేవాలయంగా, వివేకమనే ఉలితో నన్ను నేను మలచుకోవడమెలాగో నాకు గురువుగారు చూపించారు. దివ్యజ్ఞాన సంపన్నులైన బోధకుల యొక్క బోధనలను అనుసరిస్తే ప్రతి మనిషీ ఆ విధంగా చెయ్యగలడు.
— శ్రీ శ్రీ పరమహంస యోగానంద,
యోగదా సత్సంగ పాఠాలు
আজকের বাণী
গুরু-শিষ্য সম্বন্ধमार्च 10
ঈশ্বরের উপস্থিতিকে বরণ করতে নিজেকে যোগ্য মন্দির করে তোলার জন্যে কিভাবে জ্ঞানরূপ বাটালিকে কাজে লাগাতে হয় —গুরুদেব আমাকে তা দেখিয়ে দিয়েছিলেন। যারা ব্রহ্মজ্ঞানী গুরুর উপদেশ অনুসরণ করবে, তারাও সমভাবে একই কাজ করতে পারবে।
— শ্রীশ্রী পরমহংস যোগানন্দ,
“যোগদা সৎসঙ্গ লেসন্স”
आजचा सुविचार
गुरु-शिष्य संबंधमार्च 10
ईश्वराच्या अस्तित्वाचे स्वागत करण्यासाठी आपण एका योग्य देवालया स्वरूप व्हावे म्हणून स्वत:ला घडविण्यासाठी ज्ञानाच्या छिनीचा कसा उपयोग करावा हे मला माझ्या गुरुंनी दाखविले. दैवी ज्ञानाने प्रकाशमान झालेल्या शिक्षकांच्या तत्वांचे पालन केल्यास प्रत्येक माणूस तसे करू शकतो.
—श्री श्री परमहंस योगानंद,
Yogoda Satsanga Lessons
ഇന്നത്തെ ഉദ്ധരണി
ഗുരുശിഷ്യബന്ധംमार्च 10
ഈശ്വരന്റെ സാന്നിധ്യം സ്വീകരിക്കുന്നതിന് സ്വയം അനുയോജ്യമായ ഒരു ദേവാലയമാകാൻ വിവേകത്തിന്റെ ഉളി എങ്ങനെ ഉപയോഗിക്കണമെന്ന് എന്റെ ഗുരു എനിക്ക് കാട്ടിത്തന്നു. ദൈവീകമായി തിളങ്ങുന്ന ഗുരുക്കന്മാരുടെ സാരോപദേശങ്ങൾ അനുസരിക്കുകയാണെങ്കിൽ ഓരോ മനുഷ്യനും അത് ചെയ്യാൻ കഴിയും.
– ശ്രീ ശ്രീ പരമഹംസ യോഗാനന്ദൻ,
Yogoda Satsanga Lessons
ಇಂದಿನ ಸೂಕ್ತಿ
ಗುರು-ಶಿಷ್ಯರ ಸಂಬಂಧमार्च 10
ಭಗವಂತನ ಸನ್ನಿಧಾನವನ್ನು ಸ್ವಾಗತಿಸಲರ್ಹವಾದ, ಮಂದಿರವನ್ನಾಗಿ ನನ್ನನ್ನು ನಾನು ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಲು, ಜ್ಞಾನದ ಉಳಿಯನ್ನು ಹೇಗೆ ಉಪಯೋಗಿಸಬೇಕೆಂಬುದನ್ನು ನನ್ನ ಗುರು ನನಗೆ ತೋರಿಸಿಕೊಟ್ಟರು. ದೈವ ಸಾಕ್ಷಾತ್ಕಾರ ಹೊಂದಿದ ಗುರುಗಳ ಬೋಧನೆಯನ್ನು ಅನುಸರಿಸಿದಲ್ಲಿ, ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬನೂ ಅಂತೆಯೇ ಮಾಡಲು ಸಾಧ್ಯವಿದೆ.
-ಶ್ರೀ ಶ್ರೀ ಪರಮಹಂಸ ಯೋಗಾನಂದ,
Yogoda Satsanga Lessons
















