परमहंस योगानन्द
आध्यात्मिक गौरव ग्रंथ योगी कथामृत के सुप्रसिद्ध लेखक, परमहंस योगानन्दजी ने 1917 में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया की स्थापना की ताकि सभी संस्कृतियों और राष्ट्रीयताओं के लोगों तक क्रियायोग की ध्यान प्रविधि और “जीने की कला” शिक्षाएं व्यापक रूप से पहुँच सकें जिससे वे अपनी आत्मा की सुंदरता, कुलीनता और दिव्यता को पूर्णतया अनुभव एवं व्यक्त करने में सक्षम हो सकें।
योगदा सत्संग पाठमाला
योगदा सत्संग पाठमाला के नए अंग्रेज़ी संस्करण का हिन्दी अनुवाद अब उपलब्ध है। आईए जानें कि ये पाठ कैसे आपके जीवन को रूपांतरित कर सकते हैं एवं आपको एक संतुलित जीवन जीने में सहायता कर सकते हैं।
महावतार बाबाजी
महावतार बाबाजी : अमर क्रियायोग गुरु के प्रति श्रद्धा स्वरुप आयोजित हमारे विशेष सत्संगों में सम्मिलित हों।
गुरु पूर्णिमा अपील — 2026
इस गुरु पूर्णिमा पर, हम आपको दो पवित्र कार्यों में सहयोग करके अपनी भक्ति व्यक्त करने के लिए आमंत्रित करते हैं, जो गुरुदेव के कार्य को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित और विस्तारित करने में सहायता करेंगे।
2026 एसआरएफ़ वर्ल्ड कॉन्वोकेशन में आत्मा के आनन्द का अनुभव करें!
परमहंस योगानन्दजी की क्रियायोग शिक्षाओं पर आधारित एक रूपान्तरकारी सप्ताह भर के कार्यक्रम के लिए 3–9 अगस्त (भारतीय समयानुसार) तक हमारे साथ निःशुल्क ऑनलाइन जुड़ें।
संचालित कार्यक्रम
हम आपको वाईएसएस संन्यासियों द्वारा संचालित ऑनलाइन और वैयक्तिक ध्यान-सत्र, रिट्रीट और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं।
ब्लॉग
QUOTE OF THE DAY
Surrender to Godअगस्त 2
There is no way to find God’s love other than to surrender to Him. Master your mind so that you may offer it to Him.
– Sri Sri Paramahansa Yogananda
“The Divine Romance”
आज का विचार
ईश्वर के प्रति समर्पणअगस्त 2
ईश्वर के प्रति आत्मसमर्पण के अतिरिक्त उनके प्रेम को पाने का और कोई उपाय नहीं है। अपने मन के स्वामी बनिए ताकि आप उसे ईश्वर को अर्पित कर सकें।
— श्री श्री परमहंस योगानन्द,
“दिव्य प्रेम-लीला”
આજે ધ્યાનમાં
ઈશ્વર પ્રતિ સમર્પણअगस्त 2
ઈશ્વરની સંપૂર્ણ શરણાગતિ સિવાય તેનો પ્રેમ પ્રાપ્ત કરવાનો બીજો કોઇ માર્ગ નથી. તમારા મનના માલિક બનો કે, જેથી તમે મનને ઈશ્વરને અર્પણ કરી શકો.
-શ્રી શ્રી પરમહંસ યોગાનંદ,
“The Divine Romance”
இன்றைய தத்துவம்
இறைவனிடம் அடைக்கலம்अगस्त 2
இறைவனின் அன்பைப் பெறுவதற்கு அவனிடம் அடைக்கலம் அடைவதைத் தவிர வேறு வழியே இல்லை. அவனுக்கு அர்ப்பணிப்பதற்காக உங்கள் மனத்தை அடக்கி ஆளுங்கள்.
-ஸ்ரீ ஸ்ரீ பரமஹம்ஸ யோகானந்தர்,
“The Divine Romance”
నేటి సూక్తి
ఆత్మసమర్పణअगस्त 2
ఆత్మసమర్పణ కంటే దేవుని ప్రేమను పొందే మార్గం ఇంకేదీలేదు. ఆయనకు అర్పించేటందుకు, మీ మనస్సును లొంగదీసుకోండి.
— శ్రీ శ్రీ పరమహంస యోగానంద,
“దివ్య ప్రణయం”
আজকের বাণী
ঈশ্বর শরণअगस्त 2
ঈশ্বরের কাছে আত্মসমর্পণ করা বিনা তাঁর ভালোবাসা পাবার অন্য আর কোনো পথ নেই। ঈশ্বরের কাছে নিবেদন করার উদ্দেশ্যে নিজের মনের ওপর কর্তৃত্ব স্থাপন কর।
— শ্রীশ্রী পরমহংস যোগানন্দ,
“The Divine Romance”
आजचा सुविचार
ईश्वरचरणी स्वाधिनताअगस्त 2
ईश्वराचे प्रेम मिळविण्याकरिता, त्याला पूर्णत: शरण जाण्याशिवाय दुसरा कोणताही मार्ग नाही. मनावर पूर्ण नियंत्रण मिळवा, म्हणजे तुम्हाला ते त्याला अर्पण करता येईल.
—श्री श्री परमहंस योगानंद,
“The Divine Romance”
ഇന്നത്തെ ഉദ്ധരണി
ഈശ്വരന് കീഴടങ്ങൽअगस्त 2
ഈശ്വരന്റെ പ്രേമം കണ്ടെത്താൻ അവിടുത്തോട് കീഴടങ്ങുകയല്ലാതെ മറ്റൊരു മാർഗമില്ല. നിങ്ങളുടെ മനസ്സിനെ അവിടുത്തേക്ക് അർപ്പിക്കാൻ അതിനെ പൂർണമായി കീഴടക്കുക.
– ശ്രീ ശ്രീ പരമഹംസ യോഗാനന്ദൻ,
“The Divine Romance”
ಇಂದಿನ ಸೂಕ್ತಿ
ಭಗವಂತನಲ್ಲಿ ಶರಣಾಗತಿअगस्त 2
ಭಗವತ್ಪ್ರೇಮವನ್ನರಿಯಲು ಅವನಿಗೆ ಶರಣಾಗುವುದನ್ನು ಬಿಟ್ಟು ಬೇರೆ ದಾರಿಯಿಲ್ಲ. ನಿಮ್ಮ ಮನಸ್ಸನ್ನು ಅವನಿಗೆ ಅರ್ಪಿಸಲು ಸಮರ್ಥರಾಗಲು ಅದರ ಮೆಲೆ ಪ್ರಭುತ್ವ ಸಾಧಿಸಿ.
– ಶ್ರೀ ಶ್ರೀ ಪರಮಹಂಸ ಯೋಗಾನಂದ,
“The Divine Romance”
















