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श्रीमद्भगवद्गीता पर आध्यात्मिक व्याख्यान (हिन्दी में)

“जीवन संग्राम में विजयी बनें” – भाग I

शनिवार, 24 सितम्बर, 2022

शाम 6:00 बजे

– शाम 7:00 बजे

(भारतीय समयानुसार)

कार्यक्रम के विवरण

ब्रह्माण्ड का सम्पूर्ण ज्ञान गीता में समाया है। अत्यंत गूढ़ तथा सान्त्वानादायक भाषा में व्यक्त…. गीता को मानवीय प्रयास और आध्यात्मिक संघर्ष के सभी स्तरों पर समझा एवं प्रयुक्त किया गया है… । ईश्वर की ओर वापसी के पथ पर व्यक्ति जहाँ कहीं भी हो, गीता यात्रा के उस खण्ड पर अपना प्रकाश डालेगी।

— परमहंस योगानन्द

भगवद्गीता के ज्ञान पर प्रेरणादायक प्रवचनों की श्रृंखला में पहला सत्संग, जिसमें स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने भगवद्गीता पर श्री श्री परमहंस योगानन्द द्वारा की गई एक विशिष्ट व्याख्या ईश्वर-अर्जुन संवाद  (God Talks With Arjuna) पुस्तक का परिचय दिया, और पहले अध्याय के कुछ श्लोकों की चर्चा की।

अपने व्याख्यान में, स्वामी ईश्वरानन्द ने परमहंसजी की टिप्पणी के बारे में विस्तार से बताया, उपाख्यानों के माध्यम से समझाते हुए कि कैसे हमारे अन्दर कौरवों (बुरी प्रवृत्तियों) की उपस्थिति हमारी आध्यात्मिक प्रगति में बाधा डालती है, और हमारे अन्दर पांडवों (अच्छी प्रवृत्तियों) का पोषण करने से अंततः कुरुक्षेत्र की आंतरिक लड़ाई में उन कौरवों की हार कैसे होगी, और इस प्रकार यह आत्म-साक्षात्कार के अंतिम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अग्रसर करेगा।

इस अवसर पर, वाईएसएस 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता पुस्तक के सभी आरूपों पर विशेष छूट दे रहा है। इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए कृपया यहां क्लिक करें।

‘ईश्वर-अर्जुन संवाद’ की शास्त्रीय व्याख्या के बारे में

आध्यात्मिक गौरव ग्रंथ  ‘योगी कथामृत ’  के लेखक परमहंस योगानन्दजी ने भगवद्गीता की व्याख्या दिव्य अंतर्दृष्टि से की है। अपनी टीका में इसकी मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक और अधिभौतिक गहनता की मीमांसा करते हुए — जिसमें दैनिक आचार-विचार के सूक्ष्म कारणों से लेकर ब्रह्मांडीय व्यवस्था के विराट स्वरूप तक के विषय सम्मिलित हैं — योगानन्दजी आत्मा की सम्पूर्ण ज्ञानोदय तक की यात्रा का विशद वृत्तान्त प्रस्तुत करते हैं।

गीता में वर्णित ध्यान और उचित कर्म के संतुलित पथ को स्पष्ट रूप से समझाते हुए परमहंसजी दर्शाते हैं कि हम अपने लिए आध्यात्मिक संपूर्णता, शांति, सादगी तथा आनंद से भरा जीवन कैसे निर्मित कर सकते हैं। अपनी जागृत अंतरात्मा के माध्यम से हम जीवन पथ के दोराहों पर, सही मार्ग चुनना जान जाते हैं; अपनी पीछे खींचने वाली कमियों और आगे बढ़ाने वाले सकारात्मक गुणों की पहचान कर पाते हैं; और रास्ते में आने वाले संकटों को पहचानना व उनसे बचना सीख जाते हैं।

ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता  हमारे बुकस्टोर पर उपलब्ध है!
 

सभी आरूपों पर छूट — 22 सितंबर, 2022 से 2 अक्टूबर, 2022 तक

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परमहंस योगानन्दजी और उनकी शिक्षाओं के बारे में और अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर जाएँ:

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