श्री श्री लाहिड़ी महाशय
स्मारकीय लम्बा ध्यान

रविवार, सितम्बर 19, 2021

सुबह 6:10

दोपहर 12:30 बजे तक

(भारतीय समयानुसार)

कार्यक्रम का विवरण

बनत, बनत, बन जाय!

श्री श्री लाहिड़ी महाशय (योगी कथामृत)

यह श्री श्री लाहिड़ी महाशय की प्रिय उक्तियों में से एक थी जो वह अपने शिष्यों को ध्यान में लगे रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कहते थे, जैसा परमहंस योगानन्दजी कृत योगी कथामृत में कहा गया है। इस विचार का अनुवाद सहज भाव से ऐसे भी कर सकते हैं: “प्रयास करते रहो, प्रयास करते रहो, एक दिन दिव्य लक्ष्य निहारोगे।”

इस माह, श्री श्री लाहिड़ी महाशय के महासमाधि एवं आविर्भाव दिवस मनाने के मध्य, योगावतार के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप, रविवार, 19 सितम्बर को छ: घंटे के लम्बे ध्यान का आयोजन किया गया।

ध्यान-सत्र का आरम्भ शक्ति-संचार व्यायाम से हुआ जिसके उपरान्त प्रारंभिक प्रार्थना और प्रेरक पठन तथा चैंटिंग व् ध्यान की अवधियां थीं। इसका समापन परमहंस योगानन्दजी की आरोग्यकारी प्रविधि और समापन प्रार्थना से हुआ।

नवागंतुक

परमहंस योगानन्दजी और उनकी शिक्षाओं के बारे में और अधिक जानने के लिए आप निम्न लिंक्स पर खोज सकते है:

शेयर करें

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email