“गुरु आपके उतने ही निकट होते हैं जितना आपके विचार उन्हें होने की अनुमति देते हैं…। यह उनके साथ—उनकी दिव्य चेतना के साथ, जो ईश्वर की है—समस्वरता स्थापित करने से संभव होता है। जो भी ध्यान में ऐसा करने का प्रयास करता है, वह उनकी सहायता और आशीर्वाद प्राप्त करता है।”
— श्री श्री दया माता, वाईएसएस/एसआरएफ़ की तृतीय अध्यक्ष
जन्मोत्सव पर एक विशेष भेंट समर्पित करके नववर्ष का शुभारंभ करें
प्रिय दिव्य आत्मन्,
हमारे गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्दजी के पावन जन्मोत्सव पर आपको प्रेमपूर्ण शुभकामनाएँ। इस पवित्र अवसर पर, हम अपने गुरुदेव के उदात्त जीवन और ध्येय को गहरे प्रेम और कृतज्ञता के साथ स्मरण करते हैं, जिनकी दिव्य आभा हमें, उनके शिष्यों को, तथा समस्त मानवता को निरंतर आशीर्वाद प्रदान करती रहती है। क्रियायोग के प्राचीन ज्ञान को प्रकट करके, गुरुदेव ने एक स्पष्ट और प्रत्यक्ष मार्ग दर्शाया है जो सच्चे साधकों को परब्रह्म के अनन्त आनन्द तक वापिस ले जा सकता है।
राँची में गुरुदेव की पावन धरोहर को संरक्षित करने का एक सुअवसर
इस वर्ष, जन्मोत्सव का पवित्र अवसर हममें से प्रत्येक को गुरुदेव के दिव्य कार्य की सेवा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनका प्रिय राँची आश्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति, सांत्वना और ईश्वरीय एकात्मता के एक पवित्र धाम के रूप में उनकी उपस्थिति को विकीर्ण करता रहे।
हाल ही में, हमने अपने वाईएसएस राँची आश्रम में अतिथि सुविधाओं के उन्नयन और सभागार के नवीनीकरण का शुभ समाचार साझा किया था। तब से जिन भक्तों ने वहाँ का भ्रमण किया है, उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में लिखकर व्यक्त किया है कि उन्होंने इन सुधारों की कितनी सराहना की और इनसे उनके आश्रम के अनुभव में कितना सकारात्मक अन्तर आया है।
हम आपको अब इन अत्यंत आवश्यक कार्यों के अगले चरण में योगदान करने के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि भक्तों की भावी पीढ़ियाँ और भी अधिक उदात्त एवं उत्थानकारी तीर्थयात्रा का अनुभव कर सकें :
कुल अनुमानित लागत : ₹12 करोड़
आपका उदार योगदान हमें गुरुदेव के प्रिय राँची आश्रम को शांति और आध्यात्मिक उन्नयन के पावन धाम के रूप में उन सभी के लिए संरक्षित रखने में सहायता करेगा, जो इसके पवित्र वातावरण में आश्रय चाहते हैं।
हम, गुरुजी के आश्रमों में सेवारत संन्यासीगण और सेवक, आपको हार्दिक कृतज्ञता और आपके कल्याणार्थ नित्य प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।
ईश्वर एवं गुरुदेव आपको सदा आशीर्वाद प्रदान करें।
दिव्य मैत्री में,
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया
राँची — भावी पीढ़ियों के लिए एक पवित्र धाम
“मैंने अपनी आत्मिक उपलब्धि का अदृश्य अमृत अधिकतर माउण्ट वॉशिंगटन और राँची में छिड़का है…”
— श्री श्री परमहंस योगानन्द
एक शताब्दी से भी अधिक समय से, वाईएसएस राँची आश्रम एक पुनीत आश्रय रहा है, जहाँ भक्तजन गुरुदेव की उपस्थिति से पवित्र हुई भूमि पर श्रद्धापूर्वक चले हैं, इसके उद्यानों में ध्यान किया है, और इसके प्रत्येक कोने में ईश्वर तथा गुरुजी की प्रेममयी उपस्थिति का अनुभव किया है। पवित्र स्थल, जैसे लीची वेदी, जहाँ गुरुजी ने युवा बालकों की कक्षाएँ लीं; उनका निवास कक्ष, जहाँ वे रहते थे; और स्मृति मन्दिर, जहाँ उन्हें अमेरिका जाने का दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ, आज भी उनके पवित्र स्पंदन विकिरित करते हैं।
असंख्य भक्तों ने राँची आश्रम को आंतरिक निश्चलता के एक पवित्र शरणस्थल के रूप में संजोया है, जहाँ उन्हें शांति, आरोग्य, समझ और ईश्वर संपर्क की प्राप्ति हुई है। जैसे-जैसे गुरुदेव का कार्य बढ़ता जा रहा है, आश्रम की पवित्रता और सौन्दर्य को संरक्षित रखना हमारा पवित्र दायित्व है — न केवल आज के तीर्थयात्रियों के लिए, अपितु भविष्य में आने वाले साधकों के लिए भी।
मार्गों एवं परिसर के वातावरण का उन्नयन
प्रारम्भ से ही, आश्रम में मार्ग और पगडंडियाँ अधिकतर कच्ची ही रही हैं, जो समय के साथ स्वाभाविक रूप से विकसित होती गईं। हालांकि यह आश्रम की सादगी को दर्शाता था, परन्तु मॉनसून में जल निकासी के अभाव के कारण होने वाले जल-जमाव, ऊबड़-खाबड़ भूभाग और कच्ची सड़कों से उठने वाली धूल ने दर्शनार्थियों — विशेषकर वरिष्ठ भक्तजनों — के लिए काफी असुविधाएँ उत्पन्न की हैं, साथ ही वाहनों की आवाजाही के लिए भी चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
इसके अतिरिक्त, मार्गों के संरेखण में भी सुधार की आवश्यकता है ताकि यह परिसर के भू-दृश्य के साथ सामंजस्य स्थापित कर सके। आगन्तुक श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती हुई संख्या हम पर इन मार्गों का सावधानीपूर्वक नवीनीकरण करने का एक अति आवश्यक दायित्व डालती है, जिससे सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित हो सके और साथ ही वातावरण की शांति भी बनी रहे।
हमारे नियोजित संवर्धनों में निम्नलिखित सम्मिलित हैं :
- सेवा और आपातकालीन वाहनों के सुरक्षित आवागमन हेतु एक 16-फुट चौड़े कंक्रीट के परिधीय पहुँच मार्ग के निर्माण के साथ ही भक्तों के लिए सुस्पष्ट पैदल पथों का भी निर्माण
- सुविधा और श्रद्धा सुनिश्चित करते हुए स्मृति मन्दिर, शिव मन्दिर और सेवालय जैसे पवित्र स्थलों के चारों ओर, पत्थर से बने मार्ग
- प्रमुख स्थलों एवं मार्ग-संगमों का सौंदर्यीकरण — अतिथिशाला क्षेत्र के निकट के स्थल, कपूर वृक्ष मंच (जहाँ श्री दया माताजी भक्तों से मिलती थीं), शिव मन्दिर, और स्मृति मन्दिर
- आगन्तुकों के मार्गदर्शन तथा प्राकृतिक परिवेश के साथ दृश्य सामंजस्य बनाए रखने हेतु सुविचारित उद्यान सज्जा और स्पष्ट दिशानिर्देश
- मैदान और केन्द्रीय रसोई के समीप कलात्मक रूप से अभिकल्पित प्रवेश द्वारों का निर्माण किया जाएगा। ये नए द्वार स्वयं गुरुजी द्वारा विकसित रूपरेखा के अनुसार निर्मित किए जाएँगे, ताकि उन्हें एक वाईएसएस आश्रम के प्रतिष्ठित प्रतीकों के रूप में सहजता से पहचाना जा सके
- वहनीयता (sustainability) सुनिश्चित करने हेतु, आवश्यक मूलभूत संरचना के उन्नयन में सौर ऊर्जा चालित प्रकाश व्यवस्था, वर्षा जल निकासी प्रणाली, एक केन्द्रीकृत मल-जल निकासी प्रणाली, तथा विद्युत एवं पाईपलाइन प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण सम्मिलित है
बच्चों, किशोरों और युवाओं के कार्यक्रमों के लिए सुविधाएँ
पिछले कुछ दशकों से, बच्चों, किशोरों और युवा साधकों में वाईएसएस की शिक्षाओं के प्रति रुचि में निरंतर और हृदयस्पर्शी वृद्धि हुई है। यह बढ़ती हुई प्रतिक्रिया, पिछले वर्ष वाईएसएस राँची आश्रम में एक साप्ताहिक किशोर कार्यक्रम के शुभारम्भ के रूप में पहले ही फलित हो चुकी है, जो नियमित रूप से चल रही बाल सत्संग गतिविधियों के अतिरिक्त है।
वर्तमान में, इन कार्यक्रमों का संचालन अस्थायी व्यवस्थाओं में किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कमरों की कमी के कारण, विभिन्न आयु वर्गों को वर्तमान में एक ही कक्षा में संयोजित करना पड़ रहा है, जो कि आदर्श स्थिति नहीं है।
एक 17 वर्षीय युवा ने हाल ही में लिखा है :
“जब मैं 10 वर्ष का था, मैंने बाल सत्संग कार्यक्रम के दौरान एकाग्रता की हं-सः प्रविधि सीखी। 15 वर्ष का होने पर ही मैंने वास्तव में ध्यान के साथ प्रयोग करना शुरू किया...। इस वर्ष की अंतिम परीक्षा निकट आ रही थी। मेरे प्राप्तांक 88% पर अस्थिर थे और मैं कैलकुलस विषय में पूर्ण अंक चाहता था।
अपनी अंतिम परीक्षा से पिछली रात, मैंने तब तक गहनता से ध्यान किया जब तक मुझे हं‐सः की शांति का अनुभव नहीं हो गया। अगले दिन, जब मैंने परीक्षा कक्ष में प्रवेश किया, तब मैं शांत और संयमित रहा। जब हमें परिणाम मिले, तो मैं प्रसन्नता से उचल पड़ा। पूरी कक्षा में 100% अंक प्राप्त करने वाला मैं एकमात्र था। तभी मुझे बोध हुआ कि अवधारणाओं और सूत्रों को तो हर कोई जानता है। कठिनाई बस तनाव के समय, जैसे कि परीक्षा के दौरान, उन्हें पुनः स्मरण करने में आती है। ध्यान ने मुझे शांत और एकाग्र रहने में मदद की, और यही वह चीज़ थी जिसने वास्तव में मुझे विद्यालय में सहायता की।”
ऐसी बढ़ती हुई रुचि और प्रभाव में सहायता करने हेतु, हमने एक सुदृढ़ युवा सेवा विभाग स्थापित किया है, जो पूरे देश में युवा कार्यक्रमों की देखरेख करता है — जिनमें हमारे आश्रमों, केन्द्रों और मंडलियों में ऑनलाइन तथा वैयक्तिक दोनों प्रकार के कार्यक्रम सम्मिलित हैं। भविष्य में, यह सहभागिता कई गुना बढ़ने की आशा है। अतः, इन कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने और युवा पीढ़ी की आध्यात्मिक आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से पोषित करने के लिए विशिष्ट सुविधाएँ आवश्यक हैं।
इस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए, हम श्रवणालय (नवीकृत सभागार) के निकट स्थित वर्तमान संरचना (जिसे पुराना प्रधानाचार्य निवास कहा जाता है) को गिराने और बच्चों, किशोरों तथा युवाओं की गतिविधियों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए एक नए भवन का निर्माण करने की योजना बना रहे हैं। प्रस्तावित दो-मंजिला सुविधा में निम्नलिखित का समावेश होगा :
- अनेक कक्ष, जिनमें पर्याप्त भण्डारण की सुविधा हो
- ऑडियो-वीडियो सुविधायुक्त ज्ञानार्जन स्थान
- युवा संगोष्ठियों और सभाओं हेतु विशाल बहुउद्देशीय सभागार
- स्वागत कक्ष और कर्मचारियों के लिए कार्यालय स्थान
वाईएसएस पाठमाला के मुद्रण एवं भंडारण हेतु एक सुविधायुक्त स्थल का निर्माण
योगदा सत्संग पाठमाला और अन्य आध्यात्मिक प्रकाशनों का मुद्रण और प्रसार गुरुदेव के पवित्र कार्य का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। राँची आश्रम में वर्तमान में दो मुद्रण मशीनें कार्यरत हैं, जिनसे अंग्रेजी और अनेक भारतीय भाषाओं में पाठमालाएँ, बुलेटिन और अन्य प्रकाशन तैयार किए जाते हैं।
जैसे-जैसे गुरुदेव की क्रियायोग शिक्षाओं में रुचि बढ़ती जा रही है, पाठमाला को वाईएसएस और अधिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे जिज्ञासु अपनी मातृभाषा में उनका अध्ययन कर सकें। इस स्वाभाविक विस्तार के लिए अधिक संख्या में मुद्रण और, इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि, पाठमाला तथा सहायक सामग्री के सुरक्षित भंडारण हेतु अधिक क्षमता की आवश्यकता है।
हालांकि, वर्तमान में प्रेस में पर्याप्त भंडारण स्थान की कमी है। इसलिए कागज़ और मुद्रण में लगने वालीं अन्य आवश्यक वस्तुएँ — जैसे कि स्याही, प्लेटें, और संबंधित सामग्री — अभी ऐसी अस्थायी व्यवस्थाओं में रखी जा रही हैं जो अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं।
चूँकि भक्तगण अब पत्रों के स्थान पर मुख्य रूप से ईमेल और फ़ोन के माध्यम से सम्पर्क कर रहे हैं, इसलिए अभिलेख अनुभाग के लिए आवंटित स्थान को अब पाठमाला और प्रिंटिंग प्रेस के लिए एक समर्पित भण्डारण सुविधा के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि, फाइलिंग सेक्शन का भवन लगभग 70 वर्ष पुराना है और अत्यंत जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। इन संरचनात्मक तथा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए, इस भवन को नींव के स्तर से पूर्ण पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।
योगदा सत्संग सेवाश्रम — धर्मार्थ चिकित्सालय में सुविधाओं का उन्नयन
वाईएसएस राँची आश्रम स्थित धर्मार्थ चिकित्सालय, योगदा सत्संग सेवाश्रम, 1958 से निर्धन एवं ज़रूरतमंदों की प्रेम और करुणा के साथ सेवा कर रहा है। सेवाश्रम में एक नेत्र चिकित्सालय है जहाँ निःशुल्क नेत्र शल्य-चिकित्साएँ की जाती हैं, और एक बहु-विशेषज्ञता युक्त बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) भी है, जहाँ विशेषज्ञ चिकित्सक परामर्श प्रदान करते हैं। इस सेवा की गुणवत्ता और निःस्वार्थ भाव के कारण, यह सेवाश्रम राँची और आस-पास के क्षेत्रों के लोगों के लिए चिकित्सा देखभाल का एक विश्वसनीय स्रोत बन गया है।
वर्ष 2023 में, हमने नेत्र अस्पताल का व्यापक कायाकल्प किया, जिसमें एक नया शल्य चिकित्सा कक्ष, मोतियाबिंद शल्यक्रिया हेतु आधुनिक उपकरण, भवन का नवीकरण, तथा दिव्यांगों की सहायता के लिए एक ढलान मार्ग (रैंप) का निर्माण सम्मिलित था।
हम अब इसी देखभाल और दूरदर्शिता का विस्तार ओपीडी खंड तक करना चाहते हैं। वर्तमान संरचना 60 वर्ष से अधिक पुरानी है और समय के साथ कमजोर हो गई है। चूंकि आश्रम के बाहर सार्वजनिक सड़कों का स्तर बढ़ गया है, इसलिए ओपीडी के फर्श अब सड़क के स्तर से नीचे हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारी वर्षा के दौरान बार-बार यहाँ जल-प्रवेश होता है।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि सेवाश्रम स्थानीय समुदाय को प्रभावी ढंग से अपनी सेवाएँ प्रदान करता रहे, ओपीडी खंड का पूर्णतः पुनर्निर्माण किया जाना आवश्यक है। नई संरचना में जल-भराव से बचाव हेतु एक ऊँचा आधार होगा, रोगियों को अधिक कुशलतापूर्वक सेवा प्रदान करने के लिए एक बेहतर अभिन्यास होगा, और एक नए दंत विभाग की व्यवस्था भी की जाएगी।
सेवाश्रम द्वारा प्रदान की गई करुणापूर्ण सेवा ने स्थानीय समुदाय और अधिकारीगणों से समान रूप से अत्यधिक सद्भावना और मान्यता अर्जित की है। यह नवीनीकरण गुरुदेव के उस पवित्र आदर्श को संरक्षित रखने में सहायता करेंगे, जिसमें मानव-जाति की सेवा को अपने ही विस्तारित स्वरूप की सेवा माना गया है।
वित्तीय रूपरेखा और अवधि
- कुल लागत : ₹12 करोड़
- पूर्णता की संभावित तिथि : दिसम्बर 2026
ये नियोजित सुधार राँची को एक विश्व-स्तरीय आध्यात्मिक तीर्थयात्रा केन्द्र के रूप में संरक्षित करेंगे और गुरुदेव के स्वप्नों के अनुरूप, ज़रूरतमंदों की करुणापूर्ण सेवा की अपनी दीर्घ परम्परा को बनाए रखेंगे।
आपका सहयोग हृदय से सराहनीय है।
गुरुजी ने वाईएसएस आश्रमों को ऐसे पवित्र धामों के रूप में परिकल्पित किया जहाँ साधक गहनता से ध्यान कर सकें, आत्मिक शांति का अनुभव कर सकें और ईश्वर से एकात्म हो सकें। आपके योगदान — चाहे प्रार्थना, सेवा, या आर्थिक सहयोग के माध्यम से — सत्याकांक्षियों की वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए राँची आश्रम के पवित्र अनुभव को सुरक्षित रखते हैं।

































