“Be Thou a Yogi!”

Spiritual Discourse by YSS Sannyasi (Hindi)

Sunday, December 8, 2024

11:00 a.m.

– 12:00 noon

(भारतीय समयानुसार)

कार्यक्रम के विवरण

भगवद्गीता में, अर्जुन को आदर्श योगी (ध्यान योग की वैज्ञानिक प्रविधियों का अभ्यास करने वाला) बनने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, भगवान कृष्ण कहते हैं : “योगी शरीर नियन्त्रण करने वाले तपस्वियों से अधिक महान् है, ज्ञान या कर्म के पथ का अनुसरण करने वालों से भी अधिक महान् है; तुम योगी बनो!” (श्रीमद्भगवद्गीता VI:46)

“हे अर्जुन, तुम योगी बनो!” इस विषय पर आध्यात्मिक प्रवचन में वाईएसएस संन्यासी  स्वामी चैतन्यानन्द भगवान् श्रीकृष्ण के उस उपदेश पर प्रकाश डालते हैं जिसकी परमहंस योगानन्दजी ने व्याख्या की है, जहाँ स्वयं भगवान् योग के राजमार्ग, राजयोग को सभी आध्यात्मिक पथों में सर्वोच्च और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले योगी को किसी भी अन्य पथ के अनुयायी से श्रेष्ठ बताते हैं। वे यह समझाते हैं कि संन्यास, सैद्धांतिक ज्ञान का मार्ग और कर्म का मार्ग — ये सभी उपमार्ग हैं, जो मनुष्य को बाहरी त्याग और शारीरिक अनुशासन के माध्यम से ईश्वर के विषय में बौद्धिक तर्क द्वारा, और बाहरी सत्कर्मों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से ईश्वर तक पहुँचने की शिक्षा देते हैं।

स्वामी चैतन्यानन्द, योगानन्दजी की दिव्य शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए, यह स्पष्ट करते हैं कि कैसे योग का मार्ग आध्यात्मिक ज्ञानोदय के अन्य सभी मार्गों से श्रेष्ठ है, वे महान् गुरु की व्याख्या ईश्वर-अर्जुन संवाद (श्रीमद्भगवद्गीता पर योगानन्दजी की व्याख्या) से उद्धृत करते हैं : “योगी अपनी चेतना को इन्द्रियों, स्नायुतन्त्र, मेरुदण्ड एवं मस्तिष्क से हटाकर, इसे अपनी ईश्वर को जानने वाली आत्मा से संयुक्त करके ईश्वर से सीधा सम्पर्क स्थापित करता है।”

हिन्दी में यह प्रवचन दिसम्बर 2024 में वाईएसएस राँची आश्रम में होने वाले आगामी साधना संगम के दौरान लाइव-स्ट्रीम किया गया। और इसकी रिकॉर्डिंग बाद में देखने के लिए उपलब्ध रहेगी।

धर्म ग्रंथीय व्याख्या के बारे में

आध्यात्मिक गौरव ग्रन्थ योगी कथामृत के लेखक परमहंस योगानन्दजी ने भगवद् गीता की दिव्य अंतर्दृष्टि के साथ व्याख्या की है। अपनी व्याख्या में, वे इसकी मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक और आत्मविषयक गहराई की खोज करते हुए — दैनिक विचारों और कार्यों के सूक्ष्म कारणों से लेकर ब्रह्मांडीय व्यवस्था की भव्य रचना तक — योगानन्दजी आत्मा के आत्मज्ञान की यात्रा का एक व्यापक वृत्तांत प्रस्तुत करते हैं।

गीता के संतुलित ध्यान मार्ग और सही कर्म के समन्वय को स्पष्ट करते हुए परमहंसजी बताते हैं कि कैसे हम अपने जीवन को आध्यात्मिक अखंडता, शांति, सादगी और आनंद से परिपूर्ण बना सकते हैं। जाग्रत अंतर्ज्ञान के माध्यम से, हम यह जान सकते हैं कि जीवन के प्रत्येक मोड़ पर कौन-सा सही मार्ग अपनाना है, कौन-सी कमजोरियाँ हमें पीछे रोक रही हैं, और कौन-से सकारात्मक गुण हमें आगे बढ़ा रहे हैं, इसके साथ ही, तथा अपने मार्ग में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों को पहचान सकते हैं और उनसे बच सकते हैं।

ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता – हमारे बुकस्टोर से उपलब्ध! 

नए आगंतुक

परमहंस योगानन्दजी और उनकी शिक्षाओं के बारे में और अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर जाएँ :

ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ ए योगी

विश्वभर में एक आध्यात्मिक उत्कृष्ट कृति के रूप में सराही जाने वाली इस पुस्तक के विषय में परमहंसजी प्रायः कहा करते थे, “जब मैं चला जाऊँगा यह पुस्तक मेरी सन्देशवाहक होगी।”

वाईएसएस पाठमाला

एक गृह-अध्ययन पाठमाला जो आपके जीवन को ऐसे असाधारण ढंग से रूपांतरित कर देती है जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की होगी, और आपको एक संतुलित एवं सफल जीवन जीने में सहायता करती है।

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