एक वाईएसएस संन्यासी द्वारा 21 अगस्त को, शाम 6:30 से 7:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार), परमहंस योगानन्दजी के जीने की कला के ज्ञान पर आधारित, हिंदी में एक प्रेरक सत्संग दिया गया। सत्संग का विषय था “ श्री हरि के प्रेम-पाश के बंदी बनें।”
एक वाईएसएस संन्यासी द्वारा 21 अगस्त को, शाम 6:30 से 7:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार), परमहंस योगानन्दजी के जीने की कला के ज्ञान पर आधारित, हिंदी में एक प्रेरक सत्संग दिया गया। सत्संग का विषय था “ श्री हरि के प्रेम-पाश के बंदी बनें।”
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विश्वभर में एक आध्यात्मिक उत्कृष्ट कृति के रूप में सराही जाने वाली इस पुस्तक के विषय में परमहंसजी प्रायः कहा करते थे, “जब मैं चला जाऊँगा यह पुस्तक मेरी सन्देशवाहक होगी।”
एक गृह-अध्ययन पाठमाला जो आपके जीवन को ऐसे असाधारण ढंग से रूपांतरित कर देती है जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की होगी, और आपको एक संतुलित एवं सफल जीवन जीने में सहायता करती है।
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