13 नवंबर को एक वाईएसएस संन्यासी द्वारा परमहंस योगानन्दजी की “आदर्श-जीवन” की शिक्षाओं पर आधारित हिंदी में एक सत्संग दिया गया। सत्संग का विषय था — “आध्यात्मिक योद्धा बनें।”
13 नवंबर को एक वाईएसएस संन्यासी द्वारा परमहंस योगानन्दजी की “आदर्श-जीवन” की शिक्षाओं पर आधारित हिंदी में एक सत्संग दिया गया। सत्संग का विषय था — “आध्यात्मिक योद्धा बनें।”
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विश्वभर में एक आध्यात्मिक उत्कृष्ट कृति के रूप में सराही जाने वाली इस पुस्तक के विषय में परमहंसजी प्रायः कहा करते थे, “जब मैं चला जाऊँगा यह पुस्तक मेरी सन्देशवाहक होगी।”
एक गृह-अध्ययन पाठमाला जो आपके जीवन को ऐसे असाधारण ढंग से रूपांतरित कर देती है जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की होगी, और आपको एक संतुलित एवं सफल जीवन जीने में सहायता करती है।
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