विश्वव्यापी प्रार्थना मण्डल

परमहंस योगानन्दजी ने अपनी प्रार्थनाओं के माध्यम से विश्व की शान्ति और दूसरों के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रोगों के उपचार हेतु मानव-जाति की बहुत सेवा की। प्रतिदिन प्रातः वे गहन ध्यान में, उन सबके लिए ईश्वर के आशीर्वाद का आह्वान करते थे जिन्होंने सहायता के लिए प्रार्थना की होती थी, और उन्हें एक साधारण परन्तु अत्यधिक प्रभावशाली प्रविधि के सम्पादन द्वारा रोग-निवारक ऊर्जा भेजते थे। जैसे-जैसे समय व्यतीत होता गया, परमहंसजी ने योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के आश्रमों के सभी संन्यासियों को प्रार्थना द्वारा विश्व की सेवा करने हेतु इस प्रयास में उनके साथ सम्मिलित होने के लिए कहा। इस प्रकार योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया प्रार्थना परिषद् का जन्म हुआ।

परमहंस योगानन्दजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारियों के नेतृत्व में इस प्रार्थना परिषद् का कार्य वर्षों से अनवरत रूप से चल रहा है। प्रत्येक प्रातः एवं सायंकाल परिषद् गहनता से ध्यान करती है, और दूसरों के लिए प्रार्थना करती है और परमहंस योगानन्दजी द्वारा प्रयोग की गई एवं सिखाई गई रोग-निवारक प्रविधि को करती है। सहायता माँगने और प्राप्त करने वालों द्वारा योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया को सम्बोधित किए गए असंख्य पत्र ईश्वर की उस असीम शक्ति को प्रमाणित करते हैं, जो शरीर, मन, एवं आत्मा के रोग-निवारण हेतु प्रार्थना परिषद् द्वारा दूसरों के लिए प्रभावशाली रूप से निर्देशित की जाती है।

परमहंस योगानन्दजी प्रायः यह इच्छा व्यक्त किया करते थे कि प्रार्थना परिषद के आरोग्यकारी कार्य को योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के सदस्यों एवं मित्रों की प्रार्थनाओं द्वारा प्रत्येक देश में बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे सहानुभूतिशील हृदयों के आध्यात्मिक संघ की उत्पत्ति हो — एक विश्वव्यापी प्रार्थना मण्डल।

विश्वव्यापी प्रार्थना मण्डल की स्थापना से लेकर सारे संसार में भाग लेने वाले व्यक्तियों द्वारा समर्पित की गई प्रार्थनाओं ने प्रगतिशील दिव्य शक्ति के बढ़ते ज्वार को उत्पन्न करने में सहायता प्रदान की है, जिसने भू-मण्डल को, भाईचारे, सद्भावना और शान्ति द्वारा घेर लिया है।

हम आशा करते हैं कि आप अपनी प्रार्थनाओं के आत्म-बल द्वारा इस आरोग्यकारी ज्वार को सशक्त बनाने में सहायता करेंगे। प्रार्थना-सेवाएँ योगदा सत्संग के आश्रमों, केन्द्रों एवं मण्डलियों में सम्पन्न की जाती हैं। यदि आप इन सेवाओं में उपस्थित नहीं हो सकते, अथवा आप किसी अन्य आध्यात्मिक शिक्षा के अनुयायी हैं, तो आप स्वयं अपने निवास स्थान पर प्रत्येक सप्ताह निजी सेवा सम्पन्न करने की इच्छा कर सकते हैं। जैसा कि पहले वर्णन किया जा चुका है, प्रार्थना एवं रोग-निवारण के मौलिक सिद्धान्त, जो यहाँ बताए गए हैं, किसी के द्वारा भी प्रयोग किए जा सकते हैं, चाहे वह किसी भी धर्म से सम्बन्ध रखता हो।

शेयर करें

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email