परमहंस योगानन्दजी के जन्मोत्सव के पवित्र अवसर पर, एक वाईएसएस संन्यासी, भक्त के जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान, दिव्य प्रज्ञा प्रदान कर अज्ञान का निवारण करने वाले माध्यम के रूप में गुरु के महत्व पर, शनिवार, 3 जनवरी को “गुरु : मुक्ति का द्वार” शीर्षक से हिन्दी में एक ऑनलाइन सत्संग के माध्यम से प्रकाश डालेंगे।
यह प्रेरक सत्संग योगानन्दजी की शिक्षाओं पर आधारित होगा, जिसमें स्वामी धैर्यानन्द समझाते हैं कि एक योगी “गुरु को ईश्वर के प्रकट दूत और मोक्ष के माध्यम के रूप में पहचानता है।” वे कहते हैं कि ईश्वर एक सच्चे साधक की सहायता के लिए गुरु को भेजते हैं — एक ऐसा ईश्वर-प्राप्त व्यक्ति जिसे उन्हीं के द्वारा दिव्य रूप से नियुक्त किया गया है कि वह साधक को शिष्य के रूप में स्वीकार करे और उसे अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए।
हम आपको सपरिवार एवं मित्रों सहित इस सत्संग में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित करते हैं।
पूरे देश में स्थित वाईएसएस के आश्रम, केन्द्र और मण्डलियाँ भी गुरुदेव का जन्मोत्सव हार्दिक श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मनाएँगे। अपने निकट एक वाईएसएस ध्यान केन्द्र ढूँढ़ने के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें।
वाईएसएस के भक्त और मित्र गुरुदेव के जन्मोत्सव को एक आदर्श अवसर मानते हैं जिस पर वे हमारे प्रिय परमहंसजी को उनके आध्यात्मिक और धर्मार्थ कार्यों में सहयोग देकर हमारे आध्यात्मिक मार्ग पर उनके नित्य मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए अपनी कृतज्ञता अर्पित करते हैं। यदि आप प्रणामी अर्पित करना चाहें, तो कृपया नीचे दिए गए लिंक पर जाएँ।
अधिक जानकारी के लिए आप निम्नलिखित लिंक देख सकते हैं :
- परमहंस योगानन्दजी के बारे में
- “व्यक्ति के जीवन में एक सद्गुरु की आवश्यकता” — स्वामी स्मरणानन्द गिरि
- “एक सद्गुरु का वचन : ‘जो भक्त मानते हैं कि मैं उनके निकट हूँ, मैं उनके निकट हूँ’” (हिन्दी में) | स्वामी चैतन्यानन्द गिरि
- “हमारी आध्यात्मिक साधना में गुरु की भूमिका” — स्वामी सेवानन्द गिरि
- “परमहंस योगानन्द का अमर संदेश : एक प्रिय जगद्गुरु के जीवन और आशीर्वाद का उत्सव।”
- “गुरु का निःशर्त प्रेम”
- एक सद्गुरु की सहायता पर परमहंस योगानन्द का बोधप्रद मार्गदर्शन
- “ध्यान एवं क्रियायोग” : परमहंस योगानन्द
- परमहंस योगानन्दजी की वाणी सुनिए
- पुस्तकें तथा रिकॉर्डिंग
















