इस विश्व का पालनहार आपके हृदय के द्वार खटखटा रहा है। वह शान्ति-द्वारों के माध्यम से आपके अंतर में प्रवेश पाने का प्रयास कर रहा है, और आपके भीतर प्रसन्नता का बाग़ बसाने की कोशिश कर रहा है।
— श्री श्री परमहंस योगानन्द
परमहंस योगानन्दजी की आत्म-मुक्तिदायक शिक्षाओं की निरंतर बढ़ती माँग को पूरा करने में सहायता करने के लिए, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के संन्यासी हर साल देश भर के शहरों का भ्रमण करते हैं। संन्यासियों के ये दौरे इस मार्ग पर नए आए हुए उन साधकों के लिए एक सौभाग्यशाली अवसर प्रदान करते हैं, जो परमहंस योगानन्दजी की शिक्षाओं से स्वयं को परिचित कराना चाहते हैं और वाईएसएस पाठमाला के अनुयायी छात्रों के रूप में वाईएसएस की ध्यान प्रविधियों में गहन दिशानिर्देश प्राप्त करना चाहते हैं।
जिस प्रकार प्रत्येक आध्यात्मिक घटना व्यक्ति की साधना को एक नया प्रोत्साहन देती है, उसी प्रकार इन कार्यक्रमों में आपकी भागीदारी आपके आध्यात्मिक उत्साह को पुनः प्रज्वलित करेगी और अन्य गंभीर साधकों के साथ ध्यान करने तथा उनकी संगति में रहने से मिलने वाले आनंद एवं आशीर्वाद का अनुभव करने में भी आपकी सहायता करेगी।
हम आपको इन कार्यक्रमों में शामिल होने और दैनिक जीवन की अनवरत गतिविधियों से अपना ध्यान हटाकर इसे भीतरी शांति पर केन्द्रित करने और इस प्रकार ईश्वर की शांति और आनंद के अमृत का पान करने के लिए आमंत्रित करते हैं। आपकी सहभागिता के दौरान, आप अपने दैनिक जीवन में गुरुदेव की शिक्षाओं को उतारने में वाईएसएस संन्यासियों के मार्गदर्शन का भी लाभ उठा सकते हैं।
यद्यपि कार्यक्रम की समय-सारणी एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न हो सकती है, फिर भी एक नमूना रूपरेखा नीचे दी गई है:
नियत करें
08:00 – 09:15 सुबह
शक्ति-संचार व्यायाम और ध्यान
10:00 – 11:00 सुबह
हं-सः प्रविधि का पुनरवलोकन
(केवल वाईएसएस पाठमाला के शिक्षार्थियों के लिए)
11:00 – 12:30 दोपहर
शक्ति-संचार व्यायाम पुनरवलोकन
(केवल वाईएसएस पाठमाला के शिक्षार्थियों के लिए)
12:30 – 02:30 दोपहर
संन्यासियों के साथ व्यक्तिगत भेंट
(अनुरोध पर)
02:30 – 03:30 दोपहर
ओम् प्रविधि का पुनरवलोकन
(केवल वाईएसएस पाठमाला के शिक्षार्थियों के लिए)
04:30 – 06:30 शाम
शक्ति-संचार व्यायाम, ध्यान,
एवं समापन सत्संग
















