गुरु पूर्णिमा अपील — 2026

23 जुलाई, 2026

“दया तथा गहन अंतर्दृष्टि द्वारा एक सद्‌गुरु शारीरिक, मानसिक, तथा आध्यात्मिक रूप से अभावग्रस्त व्यक्तियों में ईश्वर को दुःख भोगते हुए देखता है, और इसीलिए उनकी सहायता करना वह अपना आनंददायक धर्म मानता है।”

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

गुरु पूर्णिमा पर विशेष दान अर्पित करें

हमारे प्रिय गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्द हमें स्मरण दिलाते हैं कि एक सच्चा गुरु सबमें दिव्य तत्त्व को देखता है और उनके उन्नयन के लिए स्वयं को सहर्ष समर्पित कर देता है। गुरु पूर्णिमा वह पवित्र अवसर है जब हम ऐसे सच्चे गुरुओं — परमेश्वर के प्रेम और प्रकाश के दिव्य दूतों — के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं, और गहनतम् कृतज्ञता में उन्हें अन्तःकरण से नमन करते हैं।

हम परमहंस योगानन्दजी के शिष्यों के लिए, यह दिन केवल एक उत्सव से कहीं अधिक है। यह हमारे आध्यात्मिक पथ पर हमारे गुरुदेव से प्राप्त आशीर्वादों पर विचार करने और जिस भी प्रकार से हम उनकी सेवा कर सकते हैं, उस प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने का समय है।

गुरुदेव के कार्य की प्रेमपूर्वक सेवा करने का एक निमंत्रण

इस पावन अवसर पर जब हम अपने हृदय का प्रेम अपने प्रिय गुरुजी के चरण-कमलों में अर्पित करते हैं, तो अनेक भक्त यह प्रश्न करने के लिए भीतर से प्रेरित होते हैं :

“मैं दूसरों की आनन्दपूर्वक सेवा करने में गुरुदेव का साधन कैसे बन सकता हूँ?”

इस गुरु पूर्णिमा पर, हम आपको दो पवित्र कार्यों में भाग लेकर ऐसा साधन बनने के लिए आमंत्रित करते हैं, जहाँ आपका प्रेमपूर्ण सहयोग परमहंसजी के मिशन को आगे बढ़ाने में सहायक होगा :

कुल अनुमानित लागत : ₹14 करोड़

गुरुदेव की क्रियायोग शिक्षाओं और उनके करुणामय प्रेम के प्रकाश को पूरे विश्व में फैलाने में हमें सक्षम बनाने के लिए, हम आपकी प्रार्थनाओं, सेवा, और उदार योगदानों, सभी के लिए हृदय से कृतज्ञ हैं।

नीचे दिया गया विस्तृत निवेदन पढ़ें।

भाग I

महावतार बाबाजी की गुफा के निकट रतखाल में एक आगंतुक केन्द्र

महावतार बाबाजी
महावतार बाबाजी की गुफ़ा
इस गुफा में, महावतार बाबाजी 1861 में लाहिड़ी महाशय से मिले थे।

महावतार बाबाजी की गुफा का पवित्र स्थल सम्पूर्ण विश्व के सत्यान्वेशियों के लिए प्रेरणा और आध्यात्मिक आकर्षण का केन्द्र बन गया है। इसी परम पावन स्थान पर 1861 में अमर महावतार बाबाजी ने अपने अत्यंत उन्नत शिष्य लाहिड़ी महाशय से भेंट की और उनके माध्यम से इस युग के लिए क्रियायोग के लुप्त विज्ञान का पुनरुद्धार किया।

जैसे-जैसे अधिक से अधिक लोग हमारे प्रिय गुरुदेव की योगी कथामृत, इंटरनेट और ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से महावतार बाबाजी को जानने लगे हैं, बड़ी संख्या में आगंतुक — कभी-कभी पूरी बस भर कर आते हैं — जिनमें प्रतिष्ठित व्यक्ति और गणमान्य लोग भी शामिल होते हैं, प्रतिदिन इस पवित्र स्थल की तीर्थयात्रा करते हैं ताकि इस महान् अमर गुरु के आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। कुछ लोग योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) और सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप (एसआरएफ़) से पहले से परिचित हैं, लेकिन कई लोग अभी तक यह नहीं जानते कि इन संगठनों की स्थापना योगानन्दजी ने बाबाजी के आशीर्वाद से क्रियायोग के विज्ञान को विश्व तक पहुँचाने के लिए की थी।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति, श्री रामनाथ कोविंद बाबाजी की गुफ़ा में
भारत के पूर्व राष्ट्रपति, श्री रामनाथ कोविंद, स्मृति भवन में

भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने अपने प्रतिनिधिमंडल सहित बाबाजी की गुफा तथा स्मृति भवन (जो गुफा के ठीक नीचे स्थित है) का दर्शन किया।

न्यायमूर्ति आलोक माहरा का बाबाजी की गुफ़ा एवं स्मृति भवन का दौरा
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक महरा ने स्मृति भवन (ऊपर प्रदर्शित) तथा बाबाजी की गुफा का दर्शन किया।

वाईएसएस बहुत समय से बाबाजी की गुफा के निकट एक पूर्ण सुसज्जित आगंतुक केन्द्र (विजिटर सेंटर) का निर्माण करना चाह रहा है, जहाँ तीर्थयात्री गुफा तक जाने और वापस आने के क्रम में आराम कर सकें। यह सुविधा इच्छुक साधकों को वाईएसएस/एसआरएफ़ और गुरुदेव की क्रियायोग शिक्षाओं के बारे में जानकारी भी प्रदान करेगी।

इसके अतिरिक्त, वाईएसएस एक सेवा सुविधा बनाना चाहता था जहाँ कुछ सेवक आगंतुक केन्द्र, बाबाजी की गुफा और गुफा के ठीक नीचे स्थित स्मृति भवन की देखरेख के लिए रह सकें। इसी दृष्टि के साथ, वाईएसएस ने कुछ वर्ष पहले बाबाजी की गुफा के पास 11 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया।

वर्ष 2024 में, हमारे पूज्य अध्यक्ष, श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि ने इन दो भवनों के निर्माण के लिए अपने स्नेहपूर्ण आशीष प्रदान किए :

I. पर्यटक केन्द्र (अतिथि भवन)

बाबाजी की गुफा की यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों और योगदा भक्तों का स्वागत करने के लिए, 6,200 वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र वाली दो-मंजिला सुविधा, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी :

  • स्वागत कक्ष
  • एक पुस्तक कक्ष जहाँ वाईएसएस का आध्यात्मिक साहित्य उपलब्ध होगा
  • एक ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन कक्ष और एक फ़ोटो गैलरी कक्ष, जो तीर्थयात्रियों को वाईएसएस गुरुओं के इतिहास एवं उनकी गुरु-परम्परा और वाईएसएस की क्रियायोग शिक्षाओं से परिचित कराने के लिए है
  • यात्रियों के लिए जल और जलपान
  • स्वच्छ और सुलभ प्रसाधन कक्ष, तथा
  • सुरक्षा, जल संग्रहण, और प्रभारी सेवक के आवास जैसी अन्य सहायक सुविधाएँ

II. सुविधा भवन

यह चार मंजिला सुविधा (16,000 वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र के साथ) उन सेवकों के लिए आवास प्रदान करेगी जो तीर्थयात्रियों की सेवा करेंगे और आगंतुक भवन (Visitor’s Building), सुविधा भवन (Facilities Building), बाबाजी की गुफ़ा और उसके आस-पास के क्षेत्र, तथा स्मृति भवन के रख-रखाव की देखरेख करेंगे। प्रस्तावित सुविधाओं में शामिल हैं :

  • निवासी सेवकों के लिए आवासीय क्वार्टर
  • कम संख्या में पधारे हुए भक्तों के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था
  • एक धर्मार्थ औषधालय
  • सहायक बुनियादी ढाँचा—वर्षा जल संचयन के साथ पर्याप्त जल भण्डारण, और अबाधित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु जेनरेटर बैकअप के साथ सुदृढ़ विद्युत आपूर्ति, ताकि प्रत्येक मौसम में तीर्थयात्रियों को निर्बाध रूप से सेवा मिलती रहे
  • कार्यस्थल, कर्मचारियों के आवास, पार्किंग और अन्य सहायक सुविधाएँ, जो कार्य को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होती हैं
Aerial Map of the Visitors Centre and Facilities Building
महावतार बाबाजी की गुफा के मार्ग के निकट ही आगंतुक केन्द्र तथा सुविधा भवन का स्थान।
बाबाजी की गुफ़ा के समीप दोनों भवनों का निर्माण स्थल
निर्माण स्थल पर दोनों इमारतें दिखाई दे रही हैं। बाबाजी की गुफा तक जाने वाली सड़क आगंतुक केन्द्र के पीछे से जाती है।

वित्तीय अवलोकन और समय-सीमा

  • निर्माण की कुल अनुमानित लागत : ₹10 करोड़
  • कार्य पूरा होने का अनुमानित समय : 2027 के आरम्भ तक


इस दिव्य स्वप्न को साकार करने में हम आपके सहयोग का स्वागत करते हैं।

भाग II

गुरुदेव के राँची आश्रम का संरक्षण

एक शताब्दी से भी अधिक समय से, वाईएसएस राँची आश्रम एक दिव्य आश्रयस्थल रहा है जहाँ गुरुदेव की उपस्थिति से पवित्र हुए आश्रम के प्रांगण में चलकर और ध्यान करके भक्त तथा आगंतुक अपने हृदयों को शांति और आनन्द से भर लेते हैं।

हमारे जनवरी 2026 के न्यूज़लेटर में, हमने यहान्न प्रारम्भ किये जा रहे उन कार्यों को साझा किया था जो यहाँ आने वाले या सेवा करने वाले लोगों की देखभाल के लिए, और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पवित्र स्थान की शांति एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए किए जा रहे हैं :

  • मार्गों का सुधार और परिसर के वातावरण का उन्नयन — टिकाऊ सड़कें, पत्थर से बनी पगडंडियाँ और पैदल मार्ग; शांत वातावरण को गहरा करने के लिए भूदृश्य निर्माण; सौर ऊर्जा से चलने वाली प्रकाश-व्यवस्था और उन्नत विद्युत नेटवर्क; तथा केन्द्रीयकृत सीवरेज और जल निकासी प्रणाली।
  • बच्चों के लिए सुविधाओं में सुधार, जनसंपर्क गतिविधियाँ और सेवा — युवा सेवाओं के लिए एक समर्पित भवन; वाईएसएस पाठमाला के लिए अतिरिक्त मुद्रण एवं भंडारण स्थान; और वंचितों की बेहतर सेवा के लिए एक नवीन दंत अनुभाग (डेंटल सेक्शन) सहित एक नवीनीकृत धर्मार्थ औषधालय।

गुरुजी की कृपा से, परिसर में इन सभी योजनाओं पर निर्माण कार्य अच्छी तरह से प्रगति कर रहा है; और हम आपके लिए अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक निम्नलिखित फ़ोटो प्रस्तुत कर रहे हैं। इन सभी परियोजनाओं के 2027 के प्रारम्भ तक पूर्ण होने की आशा है।

I. सड़कें और मार्ग

सड़क निर्माण के विभिन्न चरण

II. मल-जल एवं निकासी प्रणालियाँ

III. भंडारण सुविधाएँ

आपकी उदारता और आर्थिक सहयोग से ही हम इन परियोजनाओं को पूर्ण कर पा रहे हैं।

इन नवीनीकरण कार्यों के कारण हमें राँची आश्रम को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। हमने इसे लंबे समय से लंबित अन्य आवश्यक परियोजनाओं को भी साथ-साथ पूरा करने के एक उपयुक्त अवसर के रूप में देखा।

IV. भूमिगत वर्षाजल संचयन टैंक

आश्रम के चारों ओर ऊँची इमारतों के हालिया निर्माण से भूजल स्तर में क्रमिक गिरावट आई है, यहाँ तक कि भीषण गर्मी में आश्रम के कुछ कुएँ अब सूख जाते हैं, और हमारे बोरवेल से निकलने वाला पानी निरंतर कम हो रहा है। नगर पालिका का पानी, हालांकि उपलब्ध है, किन्तु यह अनियमित है और आश्रम की बढ़ती आवश्यकताओं के लिए कभी पर्याप्त नहीं होता। इसलिए, हमने लगभग 5-लाख-लीटर क्षमता का एक भूमिगत वर्षा जल संचयन टैंक बनाना उचित समझा, जो वर्षा जल को संग्रहित और संरक्षित करने का एक स्थायी साधन होगा, अन्यथा यह सतही बहाव के रूप में खो जाता है।

गौशाला और श्रवणालय के बीच, भूमिगत वर्षा जल संचयन टैंक निर्माणाधीन है।

इस टैंक का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान वर्षा जल को संचित और संग्रहित करना है, ताकि इसे गर्मियों के महीनों में उपयोग किया जा सके, विशेष रूप से आश्रम के उद्यानों के रख-रखाव के लिए।

पुनर्निर्मित शिव मंदिर का स्थापत्य प्रतिरूप
पुनर्निर्मित शिव मंदिर का स्थापत्य प्रतिरूप

V. शिव मंदिर और हवन कुंड

दशकों से, शिव मंदिर और इसका हवन कुंड हमारे गुरुओं के सम्मान में किए जाने वाले पूजन और भक्तिपूर्ण समारोहों का एक पवित्र स्थान रहा है। समय और प्रकृति के तत्वों ने इन संरचनाओं को काफी नुकसान पहुँचाया है, और इस पूज्य स्थान को अब तत्काल नवीनीकरण की आवश्यकता है। तदनुसार, एक जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई है।

मुख्य विशेषताएँ और कार्यक्षेत्र :

  • छत का प्रतिस्थापन — पुरानी एस्बेस्टस-शीट की छत और जीर्ण-शीर्ण ट्रस (कड़ी) को एक टिकाऊ, सुरक्षित और वातावरण के साथ मेल करती एक छत प्रणाली से बदला जाएगा, जिससे मंदिर की पवित्रता और सुंदरता बनी रहेगी।
  • नए ग्रेनाइट फ़्लोरिंग को स्थापित करना — टिकाऊपन, रख-रखाव में सुगमता, और क्षेत्र की सुंदरता को बढ़ाने के लिए।
  • हवन कुंड का पुनर्निर्माण — संरचनात्मक अखंडता को बहाल करने और समारोहों तथा भक्तिपूर्ण अनुष्ठानों के लिए सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने हेतु इसका पुनर्निर्माण।

वित्तीय अवलोकन और समय-सीमा

  • कुल अनुमानित लागत : ₹4 करोड़
  • कार्य पूरा होने का अनुमानित समय : 2027 के आरम्भ तक


इस दिव्य स्वप्न को साकार करने में हम आपके सहयोग का स्वागत करते हैं।

आइए, हम इसे मिलकर बनाएँ

इन विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से — महावतार बाबाजी की गुफा के पास पवित्र भूमि पर और गुरुदेव के प्रिय राँची आश्रम में — हम प्रत्येक सत्यान्वेषी का प्रेम और आदर के साथ स्वागत करना चाहते हैं, और आने वाली पीढ़ियों के जिज्ञासुओं के लिए इन पावन स्थलों को संरक्षित रखना चाहते हैं।

यह आपकी उदारता और वर्षों से आपका निरंतर सहयोग ही है जिसने हमें वह सब कुछ पूर्ण करने में समर्थ बनाया है जो हमने किया है।

आप अपना सहयोग कैसे प्रदान कर सकते हैं

सबसे बढ़कर, हम आपकी प्रार्थनाएँ चाहते हैं — कि ये पवित्र कार्य सुचारु रूप से पूर्ण हो सकें। हार्दिक प्रार्थना प्रत्येक भेंट का सबसे सच्चा आधार है।

यदि आप इन पवित्र कार्यों में सहयोग करने के लिए स्वयं को प्रेरित महसूस करते हैं, तो आप नीचे दिए गए दो बटन में से किसी एक के माध्यम से वाईएसएस के डोनेशन पेज पर जाकर एकमुश्त या मासिक आवर्ती (recurring) दान दे सकते हैं।

यदि आप अधिक राशि अर्पित करना चाहते हैं, अथवा किसी विशिष्ट परियोजना में सहयोग देना चाहते हैं, तो हमें आपसे व्यक्तिगत रूप से बात करके प्रसन्नता होगी। कृपया वाईएसएस हेल्पडेस्क से (0651) 6655 555 पर संपर्क करें (सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक)।

हम, गुरुजी के आश्रमों में सेवा करने वाले संन्यासी समुदाय और सेवकगण, आपके कल्याण के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता और दैनिक प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं। आपके प्रेम और सहयोग से, ये पवित्र स्थल गुरुदेव के प्रकाश, प्रेम और ज्ञान को उन सभी तक पहुँचाते रहेंगे जो यहाँ आते हैं।

हमारे महान् गुरुओं के आशीर्वाद आप पर सदा बने रहें।

दिव्य मैत्री में,
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया

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