हेटी में भूकंप पर श्री श्री दया माता का विशेष संदेश

जनवरी 2010

प्रिय आत्मन,

हमें जब से हेटी में विनाशकारी भूकंप के विषय मे ज्ञात हुआ है, हम सभी गुरुदेव परमहंस योगानन्दजी के आश्रमों में तथा जहां पर हमारे विश्वव्यापी प्रार्थना मण्डल के सदस्य हैं, भूकम्प से प्रभावित लोगों के लिए हृदय की गहराई से प्रार्थना कर रहे हैं और हम आप को भी इस निरंतर प्रयास में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हेटी के लोग जिन कष्टों को भोग रहे हैं उस से हृदय विदीर्ण हो जाता है, और इस त्रासदी के बाद के समय का सामना कर रहे लोगों को हमारी निरंतर सहायता की आवश्यकता होगी। उन्हें अपने जीवन के पुनर्निर्माण हेतु न केवल भौतिक संसाधनों की आवश्यकता होगी, बल्कि उन कठिनाइयों का सामना करने के लिए साहस और अपने पुनर्स्थापन हेतु हमारी प्रार्थनाओं का आध्यात्मिक समर्थन भी अपेक्षित होगा। अभावग्रस्त लोगों की सहायता और उत्थान के लिए गुरुदेव ने कभी भी प्रार्थनाओं के महत्व की शक्ति का आंकलन कम करने के लिए नहीं कहा — प्रार्थनाओं की शक्ति से उनके प्रयासों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से बल देने के लिए, तथा ईश्वर की सदा उपलब्ध सहायता के प्रति ग्रहणशीलता को बढ़ावा देने के लिए।

इस प्रकार के विनाश हमें जीवन की अनिश्चितता का स्मरण कराते हैं, और बहुत से लोग यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि “भगवान ऐसा क्यों होने देता है?” हमारा दृष्टिकोण अत्यंत सीमित होने के कारण अपनी मानवीय बुद्धि से इस रहस्य का हम कोई संतोष जनक उत्तर नहीं पा सकते। हम ईश्वर की रचना के परिदृश्य का केवल एक छोटा सा भाग ही देख पाते हैं; केवल ईश्वर ही सम्पूर्ण देख सकते हैं और केवल वे ही हमारे सभी अनुभवों का गहनतम उद्देश्य जानते हैं। जिस समय में घटनाओं को समझना और हृदय को यह स्वीकार करना कठिन हो जाता है कि आखिर क्यों ऐसा हुआ है; तब हमें विशेष रूप से ईश्वर की ओर मुड़ने की आवश्यकता है, जो इस अशांत संसार में हमारा सबसे बड़ा आश्रय और सांत्वना का स्रोत हैं। यदि हम बिना भयभीत हुए और बिना हतोत्साहित हुए उन परिस्थितियों में भी जो हमारे विश्वास की परीक्षा लेती हैं, परमात्मा के असीम प्रेम से जुड़ पाएं तो यह हमें अपनी सभी परीक्षाओं से ऊपर उठा देगा। अंततः ईश्वर हमें यह अनुभव करने में सहायता प्रदान करेंगे कि हम कोई दुर्बल भौतिक शरीर मात्र नहीं हैं बल्कि अविनाशी आत्मा हैं — हमारे समक्ष आई सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने के संसाधन हमारे भीतर हैं, यदि हम अपने जीवन को उस ईश्वर के आश्रय में छोड़ देते हैं जो हमारे जीवन की स्वयं देखभाल करता है।

भगवान के बच्चों के रूप में, हम मानवता के एक विशाल परिवार से संबंधित हैं, और हम में से प्रत्येक का यह उत्तरदायित्व है कि हम संसार के दुखों को दूर करने में सहायता करें, क्योंकि यह हमारे संचित विचार और कर्म हैं जो हमारे अपने अथवा अन्य लोगों के भाग्य पर अच्छा अथवा बुरा प्रभाव डालते हैं। बहुधा हमें इसका बोध नहीं होता कि हम अपनी निःस्वार्थता और देखभाल के प्रत्येक कार्य द्वारा कठिन परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने के लिए कितना कुछ कर सकते हैं। हमारी हेटी के लोगों के प्रति उमड़ती हुई सहानुभूति एवं उनकी प्रेममयी देखभाल की चिंता उस दिव्य शक्ति का प्रमाण है जो दयालु हृदयों के माध्यम से अभावग्रस्तों को स्वास्थ्य तथा सांत्वना प्रदान करती है। ईश्वर ने हमें जहां भी रखा है, आइये हम वहां से ही ईश्वर के प्रकाश और प्रेम, तथा प्रत्येक स्थान पर पीड़ित आत्माओं के लिए निरंतर प्रार्थनाएं और सहायता देने का निश्चय करें। अपने सकारात्मक विचारों और कार्यों के माध्यम से, हम ईश्वर की सर्वशक्तिमान इच्छा के साथ अपनी इच्छा शक्ति का समन्वय कर सकते हैं एवं उस महान प्रेम का रसास्वादन कर सकते हैं जिसमें उसने हमें आश्रय दिया हुआ है।

ईश्वर आपको प्रेम एवं अपना आशीर्वाद प्रदान करे,

श्री दया माता

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