परमहंस योगानन्दजी की शिक्षाओं पर आधारित “ईश्वर के प्रति प्रेम कैसे विकसित करें” विषय पर दिए गए इस सत्संग में स्वामी ईश्वरानन्द हमारे साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन साझा करते हैं। वे यह बताते हैं कि मानव प्रेम कैसे अपनी स्वार्थपूर्ण आवश्यक्ताओं से शुरू होकर, धीरे-धीरे अपने माता-पिता और परिवार; फिर अपने राष्ट्र एवं सम्पूर्ण मानव जाति के लिए विस्तारित होता हुआ अंततः ईश्वर की अभिव्यक्ति के रूप में सभी प्राणियों को समाहित कर लेता है। मानवीय प्रेम के विभिन्न रूप वास्तव में उसी एक दिव्य प्रेम की अलग-अलग अभिव्यक्तियाँ हैं। तथा ईश्वर, जो सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं, केवल एक भक्त के शुद्ध और निस्वार्थ प्रेम के चुंबकीय खिंचाव में ही “बंधना” स्वीकार करते हैं।
यह सत्संग वाईएसएस राँची आश्रम में दिसंबर 2025 में आयोजित साधना संगम के दौरान रिकॉर्ड किया गया था।
















