योगदा सत्संग इंटरमीडिएट महाविद्यालय के लिए भूमि पूजन

5 मार्च, 2026

प्रस्तावित भवन का वास्तु-चित्रण।

31 जनवरी, 2026 को — हमारी पूज्य तृतीय अध्यक्ष और संघमाता, श्री श्री दया माता के पवित्र जन्मदिवस के अवसर पर — योगदा सत्संग इंटरमीडिएट महाविद्यालय (वाईएसआईएम) ने जगन्नाथपुर शैक्षणिक परिसर में अपने प्रस्तावित इंटरमीडिएट महाविद्यालय भवन के लिए भूमि पूजन (आधारशिला स्थापन समारोह) के साथ एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया।

वाईएसएस संन्यासी, शैक्षिक संस्थानों की प्रबन्ध समिति के सदस्य, संकाय, कर्मचारीगण, छात्रगण, तथा भक्तजनों ने इस पवित्र आयोजन में भाग लिया। सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप के स्वामी केशवानन्द और प्रफुल्लानन्द, जो भारत की तीर्थयात्रा पर थे, वे भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

योगदा सत्संग इंटरमीडिएट महाविद्यालय का भूमि पूजन स्वामी गोकुलानन्द एवं ब्रह्मचारी भास्करानन्द द्वारा एक यज्ञ के साथ प्रारम्भ हुआ।
वाईएसएस और एसआरएफ़ के संन्यासीगणों ने आधारशिला रखी और पुष्प अर्पित किए।

दिव्य आशीर्वाद का आह्वान

प्रातःकाल पारंपरिक वैदिक अनुष्ठानों के साथ भूमि पूजन प्रारंभ हुआ, जिसमें स्वामी गोकुलानन्द ने यजमान के रूप में परियोजना की सफलतापूर्वक सम्पन्नता हेतु ईश्वरीय आशीर्वाद का आह्वान किया।

औपचारिक कार्यक्रम बाद में दीप प्रज्जवलित कर आरम्भ हुआ, जिसके पश्चात् ब्रह्मचारी भास्करानन्द द्वारा एक संक्षिप्त ध्यान कराया गया। सभी उपस्थित भक्तजनों ने परियोजना के सुचारु रूप से पूर्ण होने तथा निर्माण कार्य में संलग्न सेवकों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की।

ब्रह्मचारी भास्करानन्द श्रोतागणों को चैंट करवाते हुए…
जिसके पश्चात् एक संक्षिप्त अवधि के लिए सामूहिक ध्यान किया गया।

गुरुजी के संकल्प को आगे बढ़ाना

संस्थान की गौरवशाली परम्परा का उल्लेख करते हुए, श्री ए. के. सक्सेना (सचिव, योगदा सत्संग महाविद्यालय) ने राँची में स्थित योगदा सत्संग शिक्षण संस्थाओं का इतिहास बताया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मचर्य विद्यालय की स्थापना हमारे गुरुदेव, श्री श्री परमहंस योगानन्द द्वारा की गई थी और उनके जीवनकाल में श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर तथा महात्मा गाँधी जैसी प्रतिष्ठित विभूतियों के आगमन ने इसका गौरव बढ़ाया।

इंटरमीडिएट महाविद्यालय का प्रस्तावित चार मंजिला भवन लगभग 46,500 वर्ग फुट में विस्तृत होगा और इसमें 30 कक्षाएँ, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, एक पुस्तकालय, प्रशासनिक कार्यालय तथा बालक-बालिकाओं के लिए पृथक सुविधाएँ शामिल होंगी।

लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण (वाईएसआईएम की प्रबन्ध समिति के उपाध्यक्ष) ने ज़ोर दिया कि यह पहल चरित्र, अनुशासन और समर्पण — जो वाईएसएस की शिक्षा के सर्वांगीण दृष्टिकोण की पहचान हैं — के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को गढ़ने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

अपने सम्बोधन में, स्वामी पवित्रानन्द ने रेखांकित किया कि नया भवन अल्प सुविधा प्राप्त बच्चों की शिक्षा में सहायता हेतु आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा। गुरुदेव के आदर्श जीवन के आदर्शों में निहित, यह संस्था देह, मन और आत्मा के एकीकृत विकास के लिए प्रयासरत है, जिसके मूल में चरित्र-निर्माण है। उन्होंने घोषणा की कि परियोजना की अनुमानित लागत ₹14 करोड़ है और दानदाताओं के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की।

समारोह का समापन श्री अरविंद कटियार (सचिव, वाईएसआईएम) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके बाद प्रसाद एवं भोजन की व्यवस्था की गई।

स्वामी पवित्रानन्द ने गणमान्य व्यक्तियों के साथ मांगलिक दीप प्रज्ज्वलित किया।
स्वामी पवित्रानन्द श्रोताओं को संबोधित करते हुए।

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