तमिल में वाईएसएस पाठमाला का विमोचन

28 जुलाई 2022

अत्यंत हर्ष के साथ हम यह सूचित करते हैं कि नई योगदा सत्संग पाठमाला अब तमिल में उपलब्ध है और इसकी सदस्यता ली जा सकती है!

22 जुलाई 2022 को चेन्नई में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान स्वामी शुद्धानन्द गिरि ने योगदा सत्संग पाठमाला के तमिल अनुवाद का विमोचन किया। पदम विभूषण श्री रजनीकांत ने, जो एक जाने-माने अभिनेता, निर्माता, समाजसेवक और योगदा सत्संग के एक श्रद्धालु हैं, इसके परिचयात्मक पाठ की प्रथम प्रति ग्रहण की । लगभग 1600 लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और अन्य बहुत से लोग लाइव स्ट्रीम के द्वारा इसमें शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप-प्रज्ज्वलित करके हुई। तत्पश्चात स्वामी पवित्रानन्द ने योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस), इसके संस्थापक और गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्द और वाईएसएस पाठमाला का परिचय दिया।

स्वामी शुद्धानन्द ने अपना सत्संग वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि का पत्र पढ़ते हुए आरंभ किया। स्वामी चिदानन्दजी ने पत्र के माध्यम से उन वॉलन्टियर्स को अपना आशीर्वाद और प्रशंसा भेजी जिन्होंने तमिल में वाईएसएस पाठमाला को सम्भव बनाने में सहयोग दिया। पत्र के एक उद्धरण के अनुसार, “गुरुजी कहते थे, ‘जब मैं चला जाऊंगा, शिक्षाएं ही गुरु होंगी।’ और आज वह कितने प्रसन्न होंगे जब पाठमाला के तमिल अनुवाद द्वारा उनकी आत्म-मुक्ति की शिक्षाएं भारत में और अधिक भक्तों को उपलब्ध होंगी। इन पाठों में दिए पवित्र ज्ञान और अपने हृदय की निष्कपटता द्वारा ईश्वर के साथ आपके संबंध और एकात्मता को गहरा करने के सभी द्वार आपके लिए खुले हैं।”

अपने सत्संग में स्वामी शुद्धानन्द ने क्रियायोग के महत्त्व, और जिस प्रकार इसके नियमित अभ्यास द्वारा चेतना के उच्चत्तर स्तर प्राप्त कर अंततः ईश्वर साक्षात्कार किया जा सकता है, पर प्रकाश डाला (जैसा कि वाईएसएस पाठमाला में वर्णित है)।

तत्पश्चात स्वामी शुद्धानन्द ने तमिल में वाईएसएस पाठमाला का विमोचन किया और आरंभिक पाठ ‘आत्मसाक्षात्कार के द्वारा सर्वोच्च उपलब्धियाँ’ की एक प्रति मुख्य अतिथि श्री रजनीकांत को सौंपी। पाठ के कुछ प्रेरक अंश पढ़कर सुनाते हुए स्वामीजी ने पाठ की सामग्री के बारे में बताया। वाईएसएस पाठमाला एप का नवीनतम संस्करण प्रदर्शित करने हेतु एक संक्षिप्त वीडियो दिखाया गया।

कार्यक्रम में बोलते हुए श्री रजनीकांत ने कहा कि वाईएसएस जैसी 100 साल पुरानी अनेकों संस्थाएं हो सकती है, लेकिन जो वाईएसएस को दीर्घकालिक संस्था बनाता है, वह है इसकी शिक्षाओं में विद्यमान सत्य। उन्होंने कहा कि “भगवद्गीता और पतंजलि योग सूत्र में भी ध्यान की प्रविधियों का वर्णन नहीं है, लेकिन परमहंस योगानन्दजी ने अपनी योगदा सत्संग पाठमाला में इन प्रविधियों का विशद वर्णन किया है।“ उन्होंने यह बताकर, कि वह अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद कभी ध्यान करना नहीं भूलते, श्रोताओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, सभी सद्गुरु हमारी सहायता करने के लिए प्रतीक्षारत हैं, लेकिन उसे ग्रहण करने के लिए हमें स्वयं को तैयार करना है और ऐसा करने का मार्ग इन क्रियायोग शिक्षाओं में दिया गया है। वाईएसएस पाठमाला के अध्ययन के सुअवसर का उपयोग करने के लिए उन्होंने श्रोताओं का उत्साह बढ़ाया, क्योंकि यह उनके जीवन में आनंद और खुशियां ला सकता है।

बाद में अनेकों उपस्थित लोगों ने तमिल पाठमाला की सदस्यता ली और कार्यक्रम स्थल से तमिल में वाईएसएस साहित्य खरीदा।

तमिल में वाईएसएस पाठमाला की सदस्यता लेने हेतु कृपया इस पेज़ पर जाएं :

22 जुलाई 2022 को तमिल पाठमाला विमोचन के अवसर पर वाईएसएस/ एसआरएफ़ अध्यक्ष श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश

प्रियजनो,

इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं अपने हृदय में आप सबके साथ आनंदित हूं कि हमारे प्रिय गुरुदेव परमहंस योगानन्दजी की वाईएसएस पाठमाला का नया विस्तृत संस्करण पहली बार तमिल भाषा में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कार्य को संभव बनाने में अत्यंत प्रेमपूर्ण विचार और प्रयास का उपयोग हुआ है और मैं अपने हृदय की गहराई से उन सभी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिनकी समर्पित सेवा से यह अनुवाद और वितरण हुआ है।

गुरुजी कहते थे, “जब मैं चला जाऊंगा, शिक्षाएं ही गुरु होंगी।” और आज वह कितने प्रसन्न होंगे जब पाठमाला के तमिल अनुवाद द्वारा उनकी आत्म-मुक्ति की शिक्षाएं भारत में और अधिक भक्तों को उपलब्ध होंगी। इन पाठों में दिए पवित्र ज्ञान और अपने हृदय की निष्कपटता द्वारा ईश्वर के साथ आपके संबंध और एकात्मता को गहरा करने के सभी द्वार आपके लिए खुले हैं। मेरी प्रार्थनाएं और आशीर्वाद आज यहां उपस्थित हरेक के लिए है और उनके लिए भी जो हमारे महान गुरुओं की पवित्र शिक्षाएं पाने के लिए भविष्य में आएंगे। इस पावन मार्ग पर आपकी आध्यात्मिक उन्नति के साथ, ईश्वर और हमारे गुरुदेव का प्रेम व आशीर्वाद आपको सदैव घेरे रहें।

दिव्य प्रेम और मित्रता में,

स्वामी चिदानन्द गिरि

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