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सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप द्वारा निदेशक बोर्ड में परिवर्तन की घोषणा

16 जनवरी, 2021

हम यह सूचित करना चाहते हैं कि दिसंबर 2020 में सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप के आदरणीय उपाध्यक्ष स्वामी अचलानन्द गिरि ने एसआरएफ़ निदेशक बोर्ड से आग्रह किया था कि उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए (इस वर्ष वे 95 वर्ष के हो जाएंगे!) उन्हें बोर्ड के सदस्य व संस्था के उपाध्यक्ष के पद से निवृत होने की अनुमति दी जाए।

वाइएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष, पूजनीय स्वामी चिदानन्दजी ने स्वामी अचलानन्दजी का आग्रह प्रेम-पूर्वक स्वीकार करते हुए उनसे कहा कि उन्होंने परमहंस योगानन्दजी के विश्वव्यापी कार्य के प्रति अपनी अनेक वर्षों की समर्पित और निष्ठावान सेवा से सभी साथी शिष्यों के हृदयों में अपने लिए अत्यंत सम्मान व कृतज्ञता का भाव अर्जित किया है; और यह भी कि हम सब आशा करते हैं कि निदेशक बोर्ड सदस्य के पद के दायित्वों से मुक्त होने के उपरांत वे अनेक वर्षों तक सुखमय जीवन का आनंद लेते रहेंगे। यह निर्णय लिया गया कि इसकी घोषणा क्रिसमस की छुट्टियों के बाद की जाएगी, और साथ ही यह सूचना भी दी जाएगी कि इस महत्वपूर्ण पद पर स्वामी अचलानंदजी के स्थान पर किसे नियुक्त किया जा रहा है।

जनवरी 12, 2021 को एसआरएफ़ निदेशक बोर्ड ने एकमत से, स्वामी विश्वानन्द गिरि को सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप का उपाध्यक्ष चुना। यह निर्णय तत्काल लागू होगा।

श्री श्री दया माता ने सन् 2001 में एसआरएफ़ के वरिष्ठ संन्यासी, स्वामी अचलानन्दजी को एसआरएफ़ निदेशक बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किया था। उन्होंने कुछ वर्षों तक योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (वाइएसएस) के बोर्ड में भी सेवाएं दीं। एसआरएफ़ निदेशक बोर्ड सदस्य के पद पर अपने दो दशकों के दौरान, स्वामी अचलानन्दजी की सूझ-बूझ तथा अनेक वर्षों से क्रिया योगी व गुरुजी के संन्यासी शिष्य होने के कारण प्राप्त किया गया अनुभव, क्रमशः तीन वाइएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्षों की अतीव व अथक सहायता करने में सहायक हुआ। सन् 2010 में दया माताजी के निधन के बाद जब श्री श्री मृणालिनी माता को वाइएसएस/एसआरएफ़ का चौथा अध्यक्ष बनाया गया, उसी समय रिक्त हुए उपाध्यक्ष पद के लिए स्वामी अचलानन्दजी को चुना गया था।

स्वामी विश्वानन्दजी को भी एसआरएफ़ निदेशक बोर्ड के लिए सन् 1996 की शुरुआत में श्री श्री दया माताजी द्वारा चुना गया। इसके अलावा वे कई वर्षों से वाइएसएस बोर्ड में भी सेवा देते आ रहे हैं। सन् 2016 से वे एसआरएफ़ के कोषाध्यक्ष के रूप में भी सेवारत हैं, और साथ-ही-साथ अमेरिका, भारत तथा विश्व भर में सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फे़लोशिप/योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का भी निर्वहन करते रहे हैं। अपने नए उपाध्यक्षीय पदभार के साथ-साथ, स्वामी विश्वानन्दजी एसआरएफ़ के कोषाध्यक्ष का कार्य भी जारी रखेंगे और परमहंस योगानन्दजी की एसआरएफ़/वाइएसएस संस्थाओं के अनेकों अन्य दायित्वों का निर्वहन भी करते रहेंगे।

स्वामी चिदानन्दजी ने इन दोनों प्रिय संन्यासियों के प्रति अपना प्रेम, आदर व अगाध कृतज्ञता इन शब्दों में व्यक्त की:

“स्वामी अचलानन्दजी न सिर्फ मेरे लिए अपितु अनेकानेक एसआरएफ़ एवं वाइएसएस संन्यासियों के लिए एक प्रेरणा और आदरणीय “अग्रज” की तरह हैं, जिनके आशीर्वादों से हम सब के जीवन कई वर्षों से समृद्ध होते आ रहे हैं। उनकी कई दशकों से चली आ रही गहन क्रिया योग साधना के साथ-साथ उनकी अथक विवेकपूर्ण सेवा मेरे लिए और असंख्य अन्य लोगों के लिए एक उदाहरण और आनंद का स्रोत रही है, जिसमें न केवल गुरुदेव के आश्रमों में रहने वाले सभी संन्यासी शामिल हैं अपितु वे हज़ारों एसआरएफ़/वाइएसएस भक्त भी हैं जो विश्व भर में हमारे मंदिरों, ध्यान केंद्रों और मंडलियों में उनके संपर्क में आए थे। मैं उन्हें गहन सम्मान और कृतज्ञता से प्रेमपूर्ण प्रणाम अर्पित करता हूँ, और यह हृदयपूर्ण कामना करता हूँ कि आने वाले वर्षों में उनके दिन लगातार बढ़ते परमानंद एवं ईश्वर-सानिध्य से भरे हों।

“मैं हर्षित और कृतज्ञ हूँ कि स्वामी विश्वानन्दजी ने इस समय उपाध्यक्ष पद के आध्यात्मिक एवं संस्थागत दायित्व वहन को विनम्रता से स्वीकार किया है। । हमारे गुरु-प्रदत्त क्रियायोग पथ के प्रति जीवन-पर्यन्त निष्ठापूर्ण समर्पण द्वारा तथा हमारी परमप्रिय दया माताजी, आनन्द माताजी, मृणालिनी माताजी तथा अन्य उन्नत शिष्यों के दिव्य सानिध्य में दशकों तक रहने के कारण उन्होंने सेवापूर्ण शिष्यत्व एवं गहन आंतरिक ईश-भक्ति आत्मसात की, और इस तरह वे कई वर्षों से भारत में व पश्चिम में परमहंस योगानन्दजी की संस्थाओं के मुख्य-स्तंभ रहे हैं, और विश्व भर में भक्तों के लिए आदरणीय भी हैं।वे मेरे लिए एक बहुमूल्य दिव्य मित्र एवं सहारा रहे हैं, और मैं अपनी कृतज्ञता शब्दों में अभिव्यक्त नहीं कर सकता कि उपाध्यक्ष के इस अतिरिक्त दायित्व को स्वीकार कर यह मित्रता और सहारा मुझे आगे भी मिलता रहेगा।”

अतः अब एसआरएफ़ के निदेशक मंडल में स्वामी चिदानन्द गिरि, स्वामी विश्वानन्द गिरि, प्रीति माई, शोवना माई, भक्ति माई और स्वामी सरलानन्द गिरि होंगे।

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