YSS

आपके प्रेम, सहयोग, एवं प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद

2 जून, 2020

“जब आप ध्यान करते हैं, तब आपको ईश्वर की ओर खुलने वाले द्वार सर्वत्र मिलेंगे। जब आपको ईश-संपर्क का अनुभव होता है, तब संसार की सभी विपत्तियाँ मिलकर भी उस आनंद एवं शांति को आपसे नहीं छीन सकते।”

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

प्रिय दिव्य आत्मन,

कोविड-19 महामारी ने हम सब के जीवन को अत्यधिक प्रभावित किया है — भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में। बदले हालात ने हमारी जीवनशैली, कार्यशैली, तथा हमारी प्राथमिकताओं को प्रभावित किया है। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (वाईएसएस) में सेवारत हम लोग भी भक्तों तथा पूरे समाज की नए ढंगों से सेवा करना सीख रहे हैं।

Swami Chidananda Giri thanking for love, support and prayers
स्वामी चिदानन्दजी ने इस संकट के समय में अपने संदेशों के माध्यम से प्रोत्साहन एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

परमप्रिय गुरुदेव के प्रिय भक्तों! आप सब से जो प्रेम, प्रार्थनाएँ, तथा सहयोग हमें प्राप्त हुआ है, उससे हम अभिभूत हैं। इस चुनौतीपूर्ण समय में आपके निरंतर सहयोग के लिए हम अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं।

ऐसे समय में मन को ईश्वर पर एकाग्र रखने तथा प्रभु की दैवी सुरक्षा में दृढ़ विश्वास बनाए रखने में गुरुदेव की अमर शिक्षाओं ने निस्संदेह हम सब की सहायता की है। हमारे पूजनीय अध्यक्ष, श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि जी ने हाल ही में कहा था : “हम कितने धन्य हैं कि उनकी शिक्षाओं में हमें वे सब आध्यात्मिक उपकरण दिये गये हैं जो जीवन के युद्धक्षेत्र में एक अस्त्र-शस्त्र सम्पन्न दिव्य योद्धा की तरह तैयार होकर जाने के लिये हमारे लिए आवश्यक हैं।”

गुरुजी की कृपा से, वाईएसएस आश्रमों के सभी निवासी — संन्यासी एवं सेवक —सुरक्षित हैं। भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तथा राजकीय नियमों का पालन करने के लिए, हमने अस्थाई रूप से संन्यासियों के सभी दौरे और रिट्रीट कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं, तथा भक्तों तथा जनसाधारण के लिए अपने आश्रमों, ध्यान मंदिरों, केंद्रों, एवं मंडलियों को बंद कर दिया है। हमें अपने मुद्रण तथा डाक-प्रेषण कार्यों को भी निलंबित करना पड़ा। किंतु, अभिनव उपायों से गुरुजी के विश्वव्यापी आध्यात्मिक परिवार की सेवा करने के लिए नई संभावनाएँ एवं द्वार खुल रहे हैं, जिनमें से कुछ के विवरण नीचे दिया जा रहे हैं।

भक्तों की सेवा के लिए डिजिटल टेक्नॉलॉजी का प्रयोग

ऑनलाइन ध्यान: हमारे पूजनीय अध्यक्ष के द्वारा किया गया ऑनलाइन ध्यान का समयोचित उद्घाटन, अनेकों लोगों के लिए एक महान आशीर्वाद – एक आध्यात्मिक आश्रय – सिद्ध हुआ। इसकी वजह से भक्तों को अपने घरों में सुरक्षित रहते हुए सामूहिक ध्यान की शक्ति एवं उसके लाभों को अनुभव करने का एक वरदान प्राप्त हुआ। वाईएसएस इस समय सप्ताह में तीन बार संन्यासियों के नेतृत्व में ऑनलाइन ध्यान संचालित करता है, जिसमें प्रत्येक रविवार प्रातःकाल होने वाला एक तीन घंटे का दीर्घ-ध्यान भी सम्मिलित है। इन ऑनलाइन ध्यान कार्यक्रमों में 2,500 से अधिक भक्त भाग लेते हैं, तथा यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।

संन्यासी-संचालित एक-दिवसीय मौन रिट्रीट: स्वामी स्मरणानन्दजी ने 30 मई, 2020 को एक एक-दिवसीय ऑनलाइन मौन रिट्रीट का संचालन किया; इस कार्यक्रम में 3,500 भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया जिसमें ध्यान-सत्र, भजन–कीर्तन, तथा प्रेरणास्पद व्याख्यान सम्मिलित थे।

Online Meditation by Swami Ishwarananda 2
स्वामी ईश्वरानन्दजी एक ऑनलाइन ध्यान का संचालन करते हुए।

साप्ताहिक ऑनलाइन प्रेरणाप्रद सत्संग: वर्तमान कठिन समय में — जब वाईएसएस आश्रमों, केंद्रों, मंडलियों तथा रिट्रीट केंद्रों को अस्थाई रूप से अपने कार्यक्रम निरस्त करने पड़े — हम अपनी वेबसाइट पर साप्ताहिक ऑनलाइन प्रेरणाप्रद सत्संग पोस्ट कर रहे हैं। हम आशा करते हैं कि इन ऑनलाइन सत्संगों के माध्यम से संपूर्ण विश्व में फैले वाईएसएस/एसआरएफ़ के भक्तगण स्वयं को परमहंस योगानन्दजी के विश्वव्यापी आध्यात्मिक परिवार के एक अंग के रूप में अनुभव करते हैं, चाहे वे एक-दूसरे से कितने भी दूर क्यों न हों। हमें प्राप्त हो रहे अनेक प्रशंसा-पत्रों में से, एक युवा भक्त द्वारा भेजे गए इस पत्र को हम यहाँ साझा करते हैं :

Principles of Effective Prayer by Swami Smaranananda Giri
स्वामी स्मरणानन्दजी एक ऑनलाइन प्रेरणास्पद सत्संग में प्रार्थना के विषय में प्रवचन देते हुए। इस सत्संग के उपशीर्षक आठ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।

मैं योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ कि उनकी सेवाओं के माध्यम से इस कठिन समय में अपने परिवार के मध्य शांति एवं प्रेम के वातावरण का निर्माण करने में मुझे सहायता प्राप्त हुई है। ऑनलाइन ध्यान-सत्रों और साप्ताहिक सत्संगों ने हमें निश्चिंतता का अनुभव करने तथा आशा एवं उल्लास के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना करने में हमारी सहायता की है।…हम सभी सावधानियाँ बरत रहे हैं ; तो भी, वाईएसएस शिक्षाओं एवं ध्यान प्रविधियों के अभ्यास के बिना भय एवं व्यग्रता से मुक्त जीवन जीने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

वाईएसएस वेबसाइट पर उपयोगी संसाधन: वर्तमान परिस्थिति की अनिश्चितता को देखते हुए, अनेक लोग अपने जीवन में समझ तथा सही दिशा खोज रहे हैं। ऐसे लोगों को जिस आध्यात्मिक ज्ञान तथा परामर्श की नितांत आवश्यकता है, उसे उपलब्ध कराने के लिए हमने अपनी वेबसाइट पर प्रेरणास्पद संसाधनों में काफी वृद्धि की है। इसमें, प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शनसे भरे गुरुजी के अनेकों लेख, वाईएसएस ईबुक, तथानिर्देश-सहित ध्यान की कई सारी वीडियो सम्मिलित हैं।

योगदा सत्संग पत्रिका: चूँकि हम त्रैमासिक योगदा सत्संग पत्रिका का वर्तमान अंक डाक द्वारा नहीं भेज सके थे, इसलिए अब वह सबके लिए डिजिटल प्रारूप में हमारी वैबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध है।

वाईएसएस अंग्रेज़ी पाठ: यद्यपि हम मुद्रित पाठ डाक द्वारा नहीं भेज पाये थे, इन पाठों के डिजिटल प्रारूप को वे सभी भक्त वाईएसएस पाठ ऐप (YSS Lessons App) के माध्यम से सही समय पर प्राप्त कर रहे थे जिन्होंने योगदा सत्संग पाठ (Yogoda Satsanga Lessons) के नए अंग्रेज़ी संस्करण के लिए स्वयं को नामांकित किया था। वाईएसएस पाठ ऐप की निःशुल्क पंजीकरण अवधि भी बढ़ा दी गई है।

वाईएसएस हिंदी पाठ: जो सत्यान्वेषी हिंदी पाठोंकी सदस्यता लेना चाहते हैं, वे जल्दी ही इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा, हिंदी पाठमाला के सभी पाठक मूल प्रविधियों के पाठों को डिजिटल प्रारूप में डेवोटी पोर्टल पर पढ़ सकेंगे। यह सुविधा तैयार हो जाने पर इसकी सूचना सब को दी जाएगी।

वाईएसएस सेंटर डिपार्टमेंट भक्तों की सेवा में तत्पर

सेंटर डिपार्टमेंट के संन्यासियों ने अपने-अपने केंद्रों की प्रबंधक समितियों तथा स्वयंसेवकों के साथ फोन एवं विडियो द्वारा संपर्क बनाए रखा जिसके कारण उन सब में एक ही आध्यात्मिक परिवार के सदस्य होने की भावना और आत्मीयता बनी रही। संन्यासियों ने उन्हें ऑनलाइन ध्यान तथा विश्वव्यापी प्रार्थना मंडल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया एवं उन्हें आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

अनेक स्वयंसेवकों ने बताया कि उनके पास तालाबंदी के दौरान खाली समय है तथा वे गुरुदेव की सेवा बेहतर ढंग से करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करने में अपने समय का सदुपयोग करना चाहते हैं। इसलिए, सेंटर डिपार्टमेंट ने सामूहिक ध्यान का संचालन करने वाले सैंकड़ों भक्तों के लिए उनके ध्यान-सत्र संचालन कौशल को सुधारने के प्रयोजन से ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशालाओं की एक शृंखला आयोजित की।

Swami Suddhananda conducts online Meditation Leaders' Training 2
स्वामी शुद्धानन्दजी, 16 केंद्रों के 350 भक्तों के लिए, ‘ध्यान संचालकों हेतु ऑनलाइन प्रशिक्षण’ का संचालन करते हुए।

दूसरों के लिए प्रार्थना

दूसरों के लिए प्रार्थना करना योगदा सत्संग मार्ग का एक अभिन्न अंग है। विगत दो महीनों से वाईएसएस संन्यासी प्रतिदिन तीन बार सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के लिए, तथा जिन्होंने विशेष रूप से अनुरोध किया है उन सब के लिए, प्रार्थना कर रहे हैं, और आरोग्यकर स्पंदन प्रेषित कर रहे हैं। आप भी घर से ही इन प्रार्थनाओं में शामिल हो सकते हैं तथा स्वयं अपने लिए अथवा अपने प्रियजनों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और दैवी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

Monks conducting
संन्यासीगण प्रार्थना करते हुए एवं आरोग्यकारी स्पंदन प्रेषित करते हुए।

हमारे कोविड-19 संबंधी राहत कार्य

इस कठिन समय में, वाईएसएस आश्रमों, केंद्रों, तथा मंडलियों ने कई सारे राहत कार्योंका दायित्व अपने कंधों पर लिया है, जैसे: अभावग्रस्तलोगों में भोजन तथा अन्य आवश्यक सामग्री वितरित करना; जिन स्थानीय समुदायों का व्यवसाय बंद हो गया है उनकी सहायता करना; तथा चिकित्सक, नर्स, पुलिसकर्मी, तथा स्वच्छता कर्मचारी जैसे अग्रपंक्ति कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत सुरक्षात्मक किट प्रदान करना। कुछ केंद्रों ने लावारिस पशुओं को भी भोजन एवं आश्रय प्रदान किया।

यह अत्यंत मर्मस्पर्शी है कि किस तरह गुरुजी के परिवार ने संपूर्ण मानवजाति को अपना समझकर आलिंगन में ले लिया है, तथा पीड़ित व्यक्तियों की सेवा करने का यथा संभव प्रयास कर रहा है।

वाईएसएस आश्रमों से एक अपडेट

तालाबंदी के दौरान, जब आश्रम के कर्मचारी काम पर नहीं आ पा रहे हैं, संन्यासीगणतथा आवासी सेवकगणआश्रम के मैदानों तथा अन्य सुविधाओं की देख-रेख का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं । चार वाईएसएस आश्रमों में लगभग 150 संन्यासी तथा सेवक रहते हैं, और ये रसोईघरों के संचालन, आश्रमों के मैदानों और उद्यानों की देख-भाल, तथा अन्य इस प्रकार के कार्यों को भी स्वयं कर रहे हैं। यद्यपि तालाबंदी के कारण पिछले दो महीनों से आश्रमों के कई कर्मचारी घर पर ही हैं, तो भी वाईएसएस उन्हें वेतन दे रहा है।

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सेवकगण ध्यान मंदिर, राँची की देखभाल करते हुए।

आश्रम की सहायता करने में आपकी उदारता और तत्परता

हम इस बात को समझते हैं कि कोविड-19 के वैश्विक प्रभाव से कोई भी नहीं बच पाया है, और हो सकता है कि आप में से भी कुछ की आर्थिक परिस्थितियाँ काफी बदल गई हैं। इस कठिन समय में हम आप सब के लिए अपनी हार्दिक सहानुभूति व्यक्त करते हैं। आप वाईएसएस तथा इसके विश्वव्यापी परिवार के लिए कई तरीकों से योगदान दे सकते हैं: अपनी प्रार्थनाओं, शुभेच्छा, और सेवाकार्य के द्वारा, तथा गुरुजी के आध्यात्मिक मार्ग के निष्ठापूर्ण अनुसरण के द्वारा । हम वाईएसएस आश्रमवासी आपके द्वारा भेजे जा रहे प्रार्थनाओं के अनवरत स्पंदनों को अनुभव करते हैं, तथा इनसे हमें गुरुदेव के विशाल परिवार के प्रति अपनी सेवा जारी रखने के लिए प्रेरणा तथा शक्ति प्राप्त होती है।

जो भक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्षम एवं इच्छुक हैं, हम कृतज्ञतापूर्वक उनकी उदारता स्वीकार करते हैं एवं उनके सहयोग का स्वागत करते हैं। प्रेम एवं भक्ति के साथ समर्पित किया गया कोई भी उपहार,

ईश्वर के हाथों में दिव्य प्रेम एवं आशीष का एक साधन बन जाता है। ये अनुदान वाईएसएस के आवश्यक नित्यप्रति कार्यों के लिए, कर्मचारियों के वेतन के भुगतान के लिए, तथा इस विपत्तिकाल में हमारे द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों के लिए प्रयोग किए जाएँगे। श्री श्री परमहंस योगानन्दजी की मुक्तिदायिनी शिक्षाओं के प्रसार को जारी रखना तथा हमारे आध्यात्मिक परिवार के प्रत्येक सदस्य के आध्यात्मिक जीवन को विकसित करना, सदैव की भाँति, हमारी उच्चतम प्राथमिकता रहेगी। हम आप सब के प्रति हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस समय में उदारतापूर्वक एवं प्रेमपूर्वक दान दिया है तथा आपके निरंतर सहयोग की कामना करते हैं। आप सब को ईश्वर का आशीष प्राप्त हो।

चूँकि स्थानीय प्राधिकरण द्वारा लागू प्रतिबंधों के कारण आप हमारे आश्रमों, ध्यान केंद्रों अथवा मंडलियों में जाकर अपना दान देने में असमर्थ हैं, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप ऑनलाइन दान करें ।

भक्तगण किसी भी आध्यात्मिक सहायता अथवा मार्गदर्शन हेतु हमारे आश्रमों से संपर्क कर सकते हैं।

गुरुजी ने कहा, “बिना किसी संशय के सदैव यह विश्वास रखें कि आपको अनंत शक्ति प्रदान करने हेतु ईश्वरीय शक्ति आपके भीतर कार्य कर रही है — आपके विचारों, प्रार्थनाओं, तथा दृढ़ संकल्पों के ठीक पीछे।… अपने सभी कार्यों के पीछे ईश्वर की शक्ति की विद्यमानता स्वीकार कीजिये, तब आप देखेंगे कि ईश्वर सदैव आपके साथ हैं।”

हमारी प्रार्थना है कि आप और आपके प्रियजन ईश्वर के आलोक में सदा सुरक्षित बने रहें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करते रहें।

दिव्य मैत्री में,
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया

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