ध्यान के द्वारा व्यक्ति एक स्थिर, नीरव आन्तरिक शांति प्राप्त कर सकता है जो जीवन के उत्तरदायित्वों द्वारा प्रस्तुत की गई समस्त सामन्जस्यपूर्ण अथवा चुनौतीपूर्ण क्रियाकलापों के लिए एक स्थायी शांतिदायक पृष्ठभूमि हो सकती है। मन की इस शांतिपूर्ण समभाव की अवस्था को बनाए रखने में ही स्थायी सुख निहित है।
— परमहंस योगानन्द
द्वितीय विश्व ध्यान दिवस
11 वर्ष पूर्व, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने योग की प्राचीन परम्परा तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए इसके अनेक लाभों के प्रति विश्वव्यापी जागरूकता बढ़ाने के लिए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया था। अब, आन्तरिक शांति, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, और लोगों के बीच अधिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाले एक सार्वभौमिक अभ्यास के रूप में ध्यान के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसम्बर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया है।
ध्यान, जो भारत की आध्यात्मिक विरासत में गहराई से निहित है, आन्तरिक रूपान्तरण और आध्यात्मिक जागृति के लिए एक पवित्र अभ्यास है। यह भारत का विश्व को एक उपहार है, जो सद्भाव, कल्याण और अपने वास्तविक स्वरूप — आत्मा — के साक्षात्कार का एक शाश्वत मार्ग प्रदान करता है। जब हम एक साथ मिलकर विश्व ध्यान दिवस मनाते हैं, तो परमहंस योगानन्दजी का भी स्मरण करना उचित है, जिन्होंने ध्यान की वैज्ञानिक प्रविधियों — विशेष रूप से क्रियायोग के प्राचीन विज्ञान — से सम्पूर्ण विश्व को परचित करवाने में एक अग्रणी भूमिका निभाई।
विशेष ऑनलाइन कार्यक्रम
दूसरे विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर, आधुनिक जीवन में सफलता की कुंजी के रूप में व्यक्तिगत और वैश्विक कल्याण के लिए ध्यान के व्यावहारिक लाभों के बारे में अधिक जानने के लिए, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) के नोएडा आश्रम से एक विशेष कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में एक निर्देशित ध्यान सत्र भी शामिल था।
परमहंस योगानन्दजी की ध्यान-योग की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए, वाईएसएस संन्यासी स्वामी ललितानन्द गिरि ने इस बात पर गहन प्रकाश डाला कि ध्यान का अभ्यास, इस व्यस्तता-भरे आधुनिक संसार में हमें सन्तुलन और परिपूर्णता प्राप्त करने में सहायता करते हुए किस प्रकार रूपांतरित करता है। ध्यान आंतरिक शांति प्रदान करता है, संबंधों और पारिवारिक जीवन में अधिक सद्भाव और आनंद लाता है, व्यक्ति की एकाग्रता और कार्यकुशलता में सुधार लाता है, तथा कार्य के प्रति उसके दृष्टिकोण को भी सकारात्मक बनाता है। ध्यान दैनिक जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान करने हेतु वस्तुनिष्ठता और अंतर्ज्ञान भी प्रदान करता है।
स्वामी ललितानन्द गिरि ने इस सत्संग में परमहंस योगानन्दजी द्वारा प्रवर्तित योगदा सत्संग पाठमाला पर भी प्रकाश डाला जो महान् गुरु की योगदा सत्संग शिक्षाओं के एक विस्तृत निर्देश हैं। इन शिक्षाओं के मूल में ध्यान प्रविधियों की एक शक्तिशाली प्रणाली है : ध्यान का क्रियायोग विज्ञान। आत्मा का यह प्राचीन विज्ञान — जिससे लाखों लोगों को योगी कथामृत तथा योगानन्दजी की अन्य पुस्तकों के माध्यम से परिचित करवाया गया है — उच्चतर आध्यात्मिक चेतना और ईश्वरीय साक्षात्कार के आंतरिक आनन्द को जागृत करने के लिए शक्तिशाली विधियाँ प्रदान करता है।
विश्व ध्यान दिवस एवं परमहंस योगानन्दजी के आविर्भाव दिवस के अवसर पर (क्रमशः 21 दिसम्बर एवं 5 जनवरी को) वाईएसएस सभी सत्यान्वेषियों के लिए आध्यात्मिक गौरवग्रंथ योगी कथामृत के सभी मुद्रित प्रारूपों पर 25% की छूट एवं फ़्री ई-बुक प्रदान कर रहा है। इस विशेष छूट से लाभ प्राप्त करने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें :
परमहंस योगानन्द के बारे में
परमहंस योगानन्द ने अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं से सम्पूर्ण विश्व में लाखों लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। “पश्चिम में योग के जनक” के रूप में व्यापक रूप से प्रतिष्ठित, योगानन्दजी ध्यान के प्राचीन विज्ञान — विशेष रूप से क्रियायोग — को विश्व स्तर पर सुलभ बनाने वाले सर्वप्रथम व्यक्ति थे।
परमहंसजी द्वारा सिखाया गया क्रियायोग विज्ञान ऐसी ध्यान प्रविधियों से युक्त है जो लोगों को अपने शरीर और मन की चंचलता को शांत करके उनके दिव्य स्वरूप का साक्षात्कार करने में सक्षम बनाती हैं।
यह विज्ञान योगदा सत्संग पाठमाला का मूल तत्त्व है, जिसमें परमहंसजी की ध्यान और सन्तुलित आध्यात्मिक जीवन पर व्यापक शिक्षाएँ समाहित हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ध्यान केवल अपनी मानसिक क्षमताओं के विकास और आंतरिक शांति प्राप्त करने का एक साधन मात्र नहीं है, बल्कि इसका प्राथमिक उद्देश्य धर्म और स्वयं जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करना है : ब्रह्म से एकात्मता, उस आनंदमय स्रोत से जहाँ से हम आए हैं।
आज के हमारे इस तीव्र गति वाले, अथक तनाव और व्यवधान से भरे युग में, परमहंसजी के संदेश ने असंख्य व्यक्तियों को अपने अन्तर् में विद्यमान ईश्वर से जुड़ने के एक मार्ग के रूप में ध्यान को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। इस प्रकार उनके लिए यह भी संभव बनाया है कि वे हमारे आस-पास के संसार में सकारात्मक परिवर्तन के अधिक प्रभावी माध्यम बन सकें।
उनकी शिक्षाएँ और उनके द्वारा सिखाई गईं ध्यान की प्रविधियाँ वर्त्तमान में इस माध्यम से उपलब्ध हैं :
- योगदा सत्संग पाठमाला, एक व्यापक स्व-अध्ययन श्रृंखला है, जिसे स्वयं योगानन्दजी ने प्रारम्भ किया था। यह डिजिटल ऐप के रूप में भी उपलब्ध है
- उनकी शिक्षाओं को विश्वभर में प्रसारित करने हेतु उनके द्वारा स्थापित संगठन वाईएसएस की पुस्तकें, रिकॉर्डिंग और अन्य प्रकाशन
- योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के संन्यासी पूरे देश में दौरे करते हैं, जहाँ वे शक्ति-संचार, एकाग्रता और ध्यान की वैज्ञानिक योग प्रविधियों को समझाते हैं
- वाईएसएस संन्यासियों द्वारा संचालित रिट्रीट
- साधना संगम
- बच्चों के लिए ध्यान और आध्यात्मिक जीवन पर कार्यक्रम
वाईएसएस में नवागत?
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के विषय में
पिछले 100 वर्षों से, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) अपने संस्थापक, श्री श्री परमहंस योगानन्द के, जो पश्चिम में योग के जनक के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित हैं, आध्यात्मिक एवं मानवीय कार्य को जारी रखने के लिए समर्पित रहा है।
परमहंस योगानन्द ने 1917 में योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की ताकि भारत में सहस्राब्दियों पहले उद्भूत एक पवित्र आध्यात्मिक विज्ञान, क्रियायोग की सार्वभौमिक शिक्षाओं को सुलभ कराया जा सके। ये धर्मनिरपेक्ष शिक्षाएँ सर्वांगीण सफलता और कल्याण प्राप्त करने के लिए एक सम्पूर्ण दर्शन और जीवन शैली को समाहित करती हैं, साथ ही जीवन के परम लक्ष्य — आत्मा की ब्रह्म (ईश्वर) के साथ एकात्मता — को प्राप्त करने हेतु ध्यान की विधियाँ भी प्रस्तुत करती हैं।
अपनी अत्यंत प्रशंसित भगवद्गीता के अनुवाद एवं व्याख्या (ईश्वर-अर्जुन संवाद) में परमहंस योगानन्दजी समझाते हैं : “योग शब्द का अर्थ है वह पूर्ण समत्व अथवा मानसिक समता जो मन की ब्रह्म के साथ एकात्मता का परिणाम है। योग उस आध्यात्मिक ध्यान प्रविधि को भी इंगित करता है जिसके द्वारा व्यक्ति ब्रह्म के साथ एकात्मता प्राप्त करता है। योग, आगे, किसी भी ऐसे कर्म को भी दर्शाता है जो इस दिव्य एकात्मता की ओर ले जाता है।”
ध्यान करना सीखें
हम आपका स्वागत करते हैं कि आप परमंहस योगानन्दजी के ध्यान के विभिन्न पहलुओं पर दिए गए दिशानिर्देशों को जानें। आप विभिन्न विषयों पर निर्देशित ध्यान का भी अनुभव कर सकते हैं।
















