2013, थैंक्सगिविंग दिवस पर श्री मृणालिनी माता का सन्देश

“आपको प्रत्येक क्षण प्रत्येक वस्तु के लिए कृतज्ञ होना चाहिए। यह जान लें कि सोचने, बोलने और कार्य करने की सारी शक्ति ईश्वर से आती है, और वे इस समय भी आपके साथ हैं, आपको मार्गदर्शित और प्रेरित कर रहे हैं।”

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

श्री श्री परमहंस योगानन्दजी के आश्रमों में हम सभी की ओर से कृतज्ञता दिवस के इस धन्य अवसर पर शुभकामनायें। हमारे जीवन में जो कुछ भी अच्छा और सुन्दर है, उसमें आनंदित होने के लिए हमारी आँखों और हमारे ह्रदयों को खोलने के लिए यह एक अनुस्मारक हो — उस अद्भुत आध्यात्मिक साधना का नवीकरण जो हमारे और ईश्वर के मध्य एक निरंतर पवित्र सम्बन्ध को बनाए रखता है : कृतज्ञता। कृतज्ञता द्वारा, वह जो हमे अनंत प्रेम करता है एवं हर क्षण हमारा पोषण कर रहा है, प्रकृति की सबसे सूक्ष्म एवं सबसे भव्य अभिव्यक्तियों के पीछे, महान आत्माओं की प्रज्ञा में, हमें प्राप्त होने वाले प्रत्येक दया भाव में, और हमारी स्वयं की चेतना की आत्मीय-फुसफुसाहट में, प्रकट होता है।

कृतज्ञता का सामान्य अभिप्राय किसी सुन्दर अप्रत्याशित घटना या उपहार के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त करना है, जिसकी हमने आशा न की हो। परन्तु आध्यात्मिक साधना के रूप में कृतज्ञता का भाव कहीं अधिक गहरा है। यह ह्रदय का इस सक्रिय जागरूकता से बार-बार होने वाला समस्वरण है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं और प्रत्येक वस्तु में कार्यरत हैं। जो निरर्थक भी प्रतीत हो रहा है, उसे सचेतन रूप से सराहना की दृष्टी से देखते हुए, हम इस योग्यता को बेहतर बना सकते हैं — प्रत्येक अच्छाई और सुन्दरता, जिसका हम “अधिकार” के रूप में महत्त्व नहीं समझते। यह स्मरण रखना कि हमारे जीवन वास्तव में कितने आशीषों से भरे हुए हैं, अपने आप में ईश्वर-साक्षात्कार का एक रूप है। हमें यह बोध हो जाता है, कि वे ही हैं, जो मित्रों और परिवार के माध्यम से हमें प्रेम कर रहे हैं, और उन सभी छोटी-छोटी चीज़ों के माध्यम से हमारी देखभाल कर रहे हैं जो हमारे मार्ग को सरल बनाती हैं और हमारी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में हमारी सहायता करती हैं। आध्यात्मिक विस्मरणशीलता को “धन्यवाद, प्रभु”, कहने की आदत से प्रतिस्थापित कर हम ईश्वर के साथ एक अन्तरंग व्यक्तिगत सम्बन्ध विकसित करते हैं, जो उनकी कृपा को हमारे जीवन में निरंतर प्रवाहित करना नियत करता है।

जब हम दृढ़ता से अच्छाई की खोज में लगे रहते हैं और दाता का धन्यवाद करते हैं, तब उनकी सहायक उपस्थिति का आश्वासन हमें आशा और विश्वास के साथ ऊर्जा प्रदान करता है, और हमें उस समय सशक्त बनाता है, जब जीवन हमारे मार्ग में कठिनाइयों के पत्थर बिछा रहा होता है। भयभीत होकर प्रतिक्रिया करने अथवा दूर भागने के स्थान पर, यदि हम उन्हें उठायें, और उन अनुभवों में छिपी शिक्षा और कृपा को खोजें तथा उनका मूल्यांकन करें, तो हम पायेंगे कि वे आशीर्वादों में बदल गए हैं। ईश्वर में हमारे विश्वास की वृद्धि के साथ, हमारी कृतज्ञता को अब बाहरी प्रेरणा की और आवश्यकता नहीं है। ह्रदय की कृतज्ञता के एक नित्य अंतःप्रवाह से यह हमारे जीवन में प्रत्येक वस्तु के लिए प्रकट होती है, क्योंकि हमें ज्ञात है कि सारी परिस्थितियों के माध्यम से वे ही कार्य कर रहे हैं, हमारी आत्माओं को उनके मूल देवत्व, अजेयता और आनंद की ओर जागृत करने के लिए।

दिव्य दाता के प्रति कृतज्ञता स्वाभाविक रूप से दूसरों के प्रति सहानुभूति एवं उनके साथ उनकी उदारता और प्रेमपूर्ण दया की प्रचुरता को साझा करने के आनंद में प्रवाहित होती है। उन गुणों को क्रिया में व्यक्त करके, आप एक ऐसे व्यक्ति बन जाते हैं जिसके प्रति अन्य सभी लोग कृतज्ञ होते हैं — और वे बदले में देने, देने और देने के उस पवित्र कालचक्र में प्रवेश करने के लिए प्रेरित होते हैं जो इस सीमित संसार में अनंत की यथार्थ कृपा है।

 

 

आपको और आपके प्रियजनों को कृतज्ञता दिवस के वास्तविक आनंद की शुभकामनाएँ,

श्री मृणालिनी माता

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