श्री श्री मृणालिनी माता द्वारा 2015 का क्रिसमस संदेश

“मैं आप सभी को, आप सभी में विद्यमान अनन्त क्राइस्ट को प्रणाम करता हूँ। हे क्राइस्ट, हमें आपकी चेतना से एकात्मता का आनंद प्रदान करें, जो हर दिन की हर घड़ी, हर पल हमारे साथ बना रहे।”

क्रिसमस 2015

गुरुदेव परमहंस योगानन्दजी के आश्रम में रहने वाले हम सभी की ओर से आपको क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ। क्राइस्ट के प्रेम एवं आनंद में निमग्न इस पवित्र समय में हम यह प्रार्थना करते हैं कि आप अपने भक्तिपूर्ण हृदय की अभिग्राह्यता द्वारा क्राइस्ट चैतन्य की अन्तःरूपान्तरणकारी उपस्थिति का अनुभव करें जो कि प्रभु जीसस में अभिलक्षित होती थी। माया के विघटनकारी प्रभावों से युक्त इस संसार में रहते हुए भी हमारी आत्माएँ कितनी गहराई से शांति के लेप, प्रेम एवं विनम्रता की उस समत्वकारी शक्ति के प्रति सचेत होती हैं, जो ईश्वर की दिव्य चेतना से पूर्णतः प्रतिबिम्बित सभी लोगों में व्यक्त होती है। ईश्वर करे कि उस ब्रह्मांडीय चेतना का सत्य आपको आप्लावित करे, आपको विश्वास दिलाते हुए कि आप भी अपने भीतर की उस दिव्य छवि को प्रकट कर सकते हैं।

जीसस के जन्म-उत्सव को मनाते समय आइए, हम क्राइस्ट के शाश्वत चैतन्य का सम्मान हमारी अंतश्चेतना में उनकी दिव्य उपस्थिति को जाग्रत करने वाले उन गुणों को आत्मसात करने के नवीन संकल्प द्वारा करें, जो उनके दिव्य जीवन-ग्रंथ में अभिव्यक्त हैं। सभी मानवीय सीमाओं पर उनके द्वारा विजय से प्रेरणा लें तथा आप यह जान लें कि एंद्रिय-दासता, अहंजन्यता एवं बाहरी परिस्थितियों के प्रभावों से आत्मा-स्वातंत्र्य हेतु किया गया आपका हर प्रयास, आपको जीवन में प्रेम और सत्य के सदाचरण पर चलने की शक्ति प्रदान करता है और आपमें क्राइस्ट-चैतन्य के मुक्तिदायिनी शक्ति को जागृत करता है। यही शक्ति आपको निरंतर अपने मन व हृदय की परिसीमाओं को विस्तारित करने की प्रेरणा देती है। जब हम स्वयं से भिन्न व्यक्तियों के संपर्क में आते हैं, तब हम आपसी असहमतियों पर केन्द्रित होने तथा उन व्यक्तियों का आकलन करने को उद्यत होते हैं। परंतु जीसस, भगवान् कृष्ण व अन्य महान् दिव्यात्माओं का प्रेम सभी के लिए समान होता है, और हमें सभी प्राणियों को ईश्वर की संतान के रूप में देख, उनके एकात्म का दर्शन करने की प्रेरणा देता है। इस प्रकार उत्पन्न समझ और संवेदना से हम सभी को हमारे ही वृहत् रूप में पहचानना आरंभ करते हैं, और जीसस की भांति क्षमाशीलता की आरोग्यकारी शक्ति और सेवा से प्राप्त आनंद का आस्वादन करने के योग्य बनते हैं। उनके जन्म का यह समय उन उदात्त दैवीय गुणों के प्रति हमारी चेतना के उत्कर्ष का कारक है, जो उनके जीवन में पूर्णतः अभिव्यक्त हुए तथा हमारे भीतर और अधिक करुणा, उदारता एवं दूसरों की सहायता के लिए प्रेरित होने की भावना का विकास करते हैं। इस चेतना में करुणा की एक छोटी सी झलक भी उन भिन्न आत्माओं को जोड़ने में सक्षम होती है, एवं उनमें भगवत-प्रेम की छाप छोड़ने में समर्थ होती है।

क्राइस्ट-सदृश कार्य हमारे जीवन का उत्थान, और उसे परिवर्तित कर सकते हैं, परंतु उनके अनंत चैतन्य (अथवा कूटस्थ चैतन्य या कृष्ण चैतन्य, जैसा कि भारत की पवित्र परंपरा में जाना जाता है) की अप्रतिम सुंदरता का प्रत्यक्ष अनुभव शांति के आंतरिक परिवेश में ही हो सकता है। हमारे जीवन-अस्तित्त्व की लघु तरंग के पीछे स्थित ईश्वर की सर्वव्यापकता के असीम महासागर का क्षणिक संपर्क भी उस अवर्ण्य मृदु-स्नेह का उन्नयनकारी बोध कराता है जिसमें प्रभु सभी आत्माओं को आश्रय देते हैं। गुरुजी ने कहा है, “भगवान के पास अपने भक्त को देने के लिए इतना प्रेम है कि वह हृदय में न समाए। जब हमारा अस्तित्त्व उस प्रेम में समा जाता है, तो हम प्रेम, सेवा एवं करूणा की सर्वव्यापी चेतना में सभी के साथ एक होने का अनुभव करते हैं।” ईश्वर करे कि जीसस की भांति उस दिव्य प्रेम का उद्भव आप सभी में भी हो, और आपकी ध्यान-समायोजित चेतना में वह सदा विद्यमान रहे।

आपको और आपके प्रियजनों को प्रकाश व आनंदमय क्रिसमस की शुभकामनाओं के साथ,

श्री श्री मृणालिनी माता

शेयर करें