श्री मृणालिनी माता द्वारा नववर्ष का संदेश

“हमारे प्रत्येक विचार एवं इच्छा-शक्ति के पीछे, ईश्वर की अनन्त उपस्थिति है। उन्हें खोजिए, और आप सम्पूर्ण विजय प्राप्त करेंगे।”

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

इन छुट्टियों के मौसम का उत्साह जैसे ही हमें गर्मजोशी से नए साल में ले जाता है, गुरुदेव परमहंस योगानन्द के आश्रमों में रहने वाले हम सब उस कान्ति को देखते हैं, जो हमारे विश्वव्यापी आध्यात्मिक परिवार के प्रत्येक सदस्य को दीप्तिमान करती है। हम आपके द्वारा क्रिसमस पर भेजी गई अनेक शुभेच्छाओं, भक्तिमय भातृत्व, एवं वर्षभर दिए जाने वाले सहयोग के लिए आपका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। वर्ष की नई शुरूआत के इस समय में यह हमारी विशेष प्रार्थना है कि ईश्वर आपके मन एवं हृदयों को आध्यात्मिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के नव-ऊर्जित संकल्प से भर दें, और आप अपनी श्रेष्ठ आकांक्षाओं और प्रयासों को अभिसिंचित करने वाली प्रपूरक शक्ति, ईश्वर के साथ सचेतन रूप से समस्वर रहें।

नया वर्ष हमारे आत्मोत्कर्ष की दैवीय संभावनाओं की ओर इंगित करता है, क्योंकि हमारी सहायता हेतु ईश्वर से अधिक आनंदातुर और कोई नहीं हो सकता। यदि आप अपनी पश्चातापों, चिंताओं, पूर्व की गलतियों, और विरोधाभासी आदतों की गठरी को पीछे त्यागकर सहज भाव से नव-वर्ष में प्रवेश करेंगे, तो उनके उद्धारक उपहारों को गृहण करने की आपकी योग्यता में वृद्धि होगी। जब आप नव वर्ष में अपनी अंतर्निहित अजेयता को प्रकट करने वाले ऊर्जावान व प्रेरणाप्रद विचारों का पोषण करने का निश्चय करेंगे, तब आपको अपने आत्म-स्वातंत्र्य का आभास होगा। गुरुदेव हमसे कहते थे : “भौतिक एवं आध्यात्मिक रूप से उन्नत मानव-मनों से ओजस्विता का पान कर अपनी बौद्धिक सम्पदा का विकास करो। स्वयं और अन्य लोगों की रचनात्मक सोच का उदारतापूर्वक उपयोग करो। आत्म-विश्वास के साथ अपने मन की सीमाओं की वृद्धि करो। अपनी निर्णयकारी शक्तियों, आत्म-निरीक्षण, और नेतृत्व-क्षमताओं के उपकरणों का उपयोग करो।” इस सलाह को मानकर आप मानसिक और आध्यात्मिक रूप से और अधिक सक्षम बनेंगे, और अपने अनिश्चित भविष्य का सामना अपनी चिर-युवा आत्मा के नैसर्गिक उत्साह और आत्म-विश्वास के साथ करेंगे। संकल्प-शक्ति का विकास इच्छित आत्म-सुधारों को मूर्त-रूप देने हेतु अत्यावश्यक है, चूंकि तीव्र इच्छा-शक्ति आपको अपने शरीर और मन का नियंत्रण करने एवं स्‍वार्थ-साधक कार्य करने के बजाय वह कार्य करने में सक्षम बनाती है, जो सर्वोचित हो। यह आपको अदम्य धैर्य के साथ भगवत्-प्राप्ति करने का साहस प्रदान करती है। विजयी बनने के ईश्वर-प्रदत्त सामर्थ्य की बारम्बार दृढ़ोक्ति विशेषतः आत्म-विभ्रम व अल्‍पकालिक विफलता की स्थिति में करें। भगवत्-प्रेम व श्रद्धा से उत्पन्न दृढ़त्व आपके सफलताकारी समुत्साह को भगवान् की जगत्सृष्ट इच्छा-शक्ति से सम्मिलित करता है।

मन की शक्ति का सदुपयोग ईश्वर, जोकि सभी सफलताओं के स्रोत हैं, से आपकी समस्वरता में वृद्धि करता है, परंतु जब हम ध्यान में चंचलता की दुरूहकारी अस्थिरताओं को शांत करना आरंभ करते हैं, और हमारी चेतना को भगवत्-प्रेम की क्षान्त दीप्ति में आश्रय देते हैं, तब हम स्वयं में अगाध परिवर्तन होता देखते हैं। भगवान् से गहराई से प्रार्थना करने के तदुपरान्त मस्तिष्क की प्रत्येक कोशिका में व्याप्त मुक्तिदायी प्रकाश का मानस-दर्शन हमारी अवांछित आदतों के दीर्घशुषिरों (ग्रूव्ज़) को निर्मूल कर देता है तथा हमारी चेतना को उन नवीन संकल्प-जनित विचारों व दिव्य आचरणों के प्रति अंतर्ग्राही बनाता है, जो हमारे सर्वोच्च हितों के अनुरूप हों। ईश्वर करें कि नववर्ष में आप इस प्रकार अदम्य विश्वास से प्रवेश करें कि आपकी भक्ति और आत्मोत्सर्ग की सरल अभिलाषा से आकृष्ट होने वाले उनके आशीर्वाद आपके जीवन को रूपांतरित कर दें जिससे आप और अन्य सभी लोग आनंद की एक नई भोर का दर्शन करें।

आपको और आपके प्रियजनों को मंगल नव-वर्ष की बधाइयों से साथ,

श्री श्री मृणालिनी माता

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