श्री श्री मृणालिनी माता द्वारा नववर्ष का संदेश : 2014

श्री श्री मृणालिनी माता द्वारा नववर्ष का संदेश : 2014

नववर्ष 2014

“भीतर में स्वयं को बदलने का दृढ़ निश्चय करें, और आप अपने प्रारब्ध को अपनी इच्छानुसार बदल सकते हैं।”

— परमहंस योगानन्द

नववर्ष के स्वागत के साथ ही गुरुदेव परमहंस योगानन्द के आश्रम में रहने वाले हम सब अपने विश्वव्यापी आध्यात्मिक परिवार के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर आपको आंतरिक शांति व प्रसन्नता, एवं वह सफलता प्रदान करे, जिससे आप अपने उपयुक्त लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। हम आपके स्नेहपूर्ण विचारों, क्रिसमस पर भेजी गई शुभेच्छाओं व संस्मृतियों, तथा गत-वर्ष के अनेक अनुग्रहों के लिए आपका आभार व्यक्त करते हैं। ईश्वर एवं गुरु के आदर्शों व उनके प्रेम से ऐक्य कराने वाली इस दिव्य मैत्री को हम सदैव हमारे हृदय में सँजोकर रखते हैं।

इस वर्ष 31 जनवरी को श्री दया माता के जन्म की सौवीं वर्षगांठ का अवसर है। उनके दिव्य जीवन ने हम सभी को प्रभावित किया है। यद्यपि उनकी आत्मा इस ऐहिक संसार के परे प्रकाश के आनंद-क्षेत्रों में निर्मुक्त है, तथापि पूर्व एवं पश्चिम में गुरुजी का आध्यात्मिक परिवार उनके प्रेम व संरक्षण की कृपा-वर्षा से आज भी आपूरित है। गुरुजी के शब्द — “केवल प्रेम ही मेरा स्थान ले सकता है” — उनके जीवन में पूर्ण रूप से अभिव्यक्त हैं, तथा उनके सुंदर जीवन-दृष्टांत से प्रेरित हो, हमारी चेतना में भी प्रतिध्वनित होते रहेंगे। हमारी कामना है कि उनके जीवन में प्रकटित प्रेम, सद्भाव, एवं ईश्वर में विश्वास न केवल इस नव-वर्ष में वरन् निरंतर आपको प्रेरित करते रहें।

प्रत्येक वर्ष का आरंभ आपको जीवन में एक नयी शुरूआत करने का आशीर्वाद देता है एवं आपकी श्रेष्ठ अभिलाषाओं को और अधिक सुदृढ़ करने व उनको मूर्तरूप देने कि इच्छा को बलवती बनाता है। यह हमारे दृष्टिकोण को भविष्य की संभावनाओं को खोजने के नव-ऊर्जित उत्साह के पोषण द्वारा अतीत के अनुभवों व बानगियों से परे धकेलकर उसे वृहत् बनाने के लिए हमें प्रेरित करता है। जब हम अपने जीवन को उन परमात्मा से जोड़ देते हैं, जिन्होंने अपने प्रतिरूप में हमें बनाया है, तब हमें वह आंतरिक सुरक्षा प्राप्त होती है, जिससे हम उस भविष्य का सामना आनंद, निर्भीकता तथा सुप्रत्याशाओं के साथ कर सकते हैं। गुरुजी ने हमें बताया है, “हममें से प्रत्येक ईश्वर की संतान है। हम उनके ही पवित्र, भव्य व आनंद के मूर्त रूप में जन्मे हैं। वह विरासत अपराजेय है”। यदि हम नव-वर्ष का अभिनंदन इस प्रतीति के साथ करते हैं कि हम एक निर्बल मानव नहीं वरन् एक अजेय आत्मा हैं जो मन और इच्छाओं पर शासन करने के स्वातंत्र्य से सम्पन्न हैं, और साथ ही बुद्धिमत्तापूर्वक चुनाव की क्षमता पर दृढ़ रहें, तब कोई आदत अथवा परिस्थिति हमारे आगे रुकावट नहीं बन सकती। हम पाएंगे कि वे परिस्थितियां भी जो हमारी क्षमताओं का परीक्षण करती हैं अथवा हमारे ज्ञान को चुनौती देती हैं, उन अवसरों का निर्माण करती हैं जो हमें हमारी चेतना को अधिक गहरा कर आत्मा के पूर्ण सामर्थ्य को प्रकट करे।

जब ध्यान में हम भगवान् की उपस्थिति का अनुभव करते हैं, तब हमारी चेतना और अधिक ग्रहणशील बन जाती है, और उनकी कृपा-दीप्ति का प्रवाह अवांछित विकृतियों का लोप कर देता है। ईश्वर के विचार के साथ और अधिक रहने के साथ ही असीम ऊर्जा-स्रोत से संपन्नकारी शक्ति व् आनंद का प्रवाह हमारी ओर होता है, तथा हम गुरुदेव के उन शब्दों के भाव का और अधिक गहराई से बोध करते हैं — “भगवान् सर्व-शक्तिमान हैं, और उनकी अक्षय प्रकृति से एकात्म् हो, आप भी किसी भी कार्य को सिद्ध कर सकते हैं”। अपने विश्वास और दृढ़-निश्चय द्वारा आप उस सत्य को जान सकते हैं, और दूसरों को अपने विजयी जीवन के उदाहरण द्वारा प्रोत्साहित कर सकते हैं।

आपको और आपके प्रियजनों को ईश्वर के आशीर्वादों से भरपूर नव-वर्ष की बधाइयों से साथ,

 

श्री श्री मृणालिनी माता
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