परमहंस योगानन्दजी की 125वीं जयंती पर स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश

जन्मोत्सव 2018
स्वामी चिदानन्द गिरी, अध्यक्ष का संदेश

प्रिय आत्मन्,

हमारे प्रियतम गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्द की पावन 125वीं जन्म जयंती पर आप सभी को प्रेम भरी शुभ कामनाएँ। मेरा हृदय अभी तक उस आनंद, प्रेरणा और आशीर्वाद से भरा हुआ है जो मैंने दो माह पूर्व गुरुजी की मातृभूमि की यात्रा के समय आप सब के साथ अनुभव किया। मेरी स्मृति में विशुद्ध श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह से दीप्त आपके चेहरे सदा के लिए छप गए हैं। आपकी तड़प के चुम्बक से खिंच कर, हमारे आदरणीय गुरु के प्रेम ने हम सभी को आवृत कर, हमारे हृदयों को एक बार, हमें उस ईश्वर विभूति जिससे हम सब आये हैं, के और निकट ला दिया — एक वही अकेले ऐसे हैं जो उस निर्दोष प्रेम की लालसा को सन्तुष्ट कर सकते हैं जिसे हम जन्मों से इस माया जगत में खोज रहे हैं।

ईश्वर ने उनको जानने की (आपकी) निष्कपट निश्चल इच्छा का उत्तर, हमारे प्रियतम गुरुदेव को, आपके मार्गदर्शक और शाश्वत मित्र के रूप में, भेज कर दिया है। यदि हम उनके द्वारा प्रदत्त साधना का अभ्यास, पूर्ण आस्था के साथ कर उनकी सहायता करें, तो वह बिना चूके हमें उस ईश्वर से एक कर देंगे। क्रियायोग के पावन विज्ञान के माध्यम से, जिसका पूरे विश्व में प्रसार करने का दायित्व हमारे गुरु को सौंपा गया, उन्होंने हमें सर्वाधिक बहुमूल्य निधि प्रदान की है — जो मानव कल्पना से परे, आत्मा की मौन शरणस्थल में, ईश्वरीय चेतना के स्पर्श से अनुभूत परमानन्द को, स्वयं अपने आप अनुभव करने का साधन है। आओ इस दिव्य उपहार के महत्त्व को, और गुरु के निःशर्त प्रेम को — जो सदैव तुम्हारे साथ रहेगा और तुम पर सदैव दृष्टि रखेगा, नए सिरे से समझने का समय बनाएं। उस प्रेम के बोध को हृदय में बनाए रखो, और जान लो कि उस प्रेम से प्रभु और गुरु तुम्हारे मानवीय स्वभाव की हर कमज़ोरी से परे तुम्हारी आत्मा के सौन्दर्य व क्षमता को निहार रहे हैं। तुम भी, जब, अंतर में उस दिव्य छवि को देखना सीख लोगे, तुम किसी चीज़ पर भी विजय पा सकने का विश्वास प्राप्त कर लोगे। अपने ध्यान में उनके प्रेम को याद रखो और अनुभव करो कि उसकी शक्ति प्रविधियों से प्रवाहित हो रही है, तुम्हारी चेतना को बदल रही है — माया की परतों को उखाड़ रही है जिसने तुम्हारे सच्चे स्वरूप की शुद्धता और दीप्ति को छिपा रखा है। जब तुम ऐसा करोगे, और अपनी इच्छा को गुरु की इच्छा से समस्वर करने का प्रयत्न करोगे तो तुम्हारी परम मुक्ति निश्चित है।

पिछले वर्ष, भारत में गुरुजी के कार्य की शताब्दी के समारोह, उनकी शिक्षाओं की शक्ति और उनके विश्वव्यापी व भारत में प्रसार की शक्ति की बढ़ती गति के सबूत, के स्मरणपत्र थे। इस सालगिरह ने उनके व्यक्तिगत प्रयत्नों को भी ऊर्जा प्रदान की है जिन्होंने व्यक्तिगत अथवा चैतन्य रूप से इसमें भाग लिया। आप इस जन्मोत्सव समारोह और पिछले वर्ष के सभी सुंदर आयोजनों से, आत्मिक आनंद जो आपने अनुभव किया है, गुरु के निःशर्त प्रेम में बढ़ा हुआ विश्वास और अपनी साधना की लगन में दृढ़ संकल्प को, साथ लेकर जाएँ। उनके बताए मार्ग का अनुसरण ही, आपका उनके प्रति आभार व्यक्त करने का, उपहार हो, और आप खुले मन और हृदय से उस असीम आध्यात्मिक धन को ग्रहण करो, जिसे आपको देने के लिए वह तड़पते हैं। जय गुरु!

ईश्वर एवं गुरुदेव के आशीर्वाद आप पर सदैव बने रहें,

स्वामी चिदानन्द गिरि

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