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31 दिसंबर, 2021

प्रिय आत्मन्,

गुरुदेव परमहंस योगानन्द के आश्रमों में हम सभी की ओर से आप सभी को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ! क्रिसमस के अवसर पर हमें सम्पूर्ण विश्व से प्राप्त हुईं शुभकामनाओं और स्मृति चिह्नों तथा उन सभी तरीकों के लिये प्रेमपूर्ण धन्यवाद जिनसे आप इस पिछले एक वर्ष में हमारे साथ संपर्क में रहे हैं।

सन् 2022 में प्रवेश करते हुए, मेरी हार्दिक प्रार्थना है कि ईश्वर आपको अपनी दिशा की सकारात्मक समझ का आशीर्वाद प्रदान करें ताकि आप उन चुनौतियों और परिवर्तनों के बीच से अपना मार्ग निकाल सकें जो दो युगों के बीच के संधिकाल में जीवन का एक तथ्य हैं। आप हमारे गुरु द्वारा इन सुंदर शब्दों में वर्णित आंतरिक रूप से अनुभूत ज्ञान और आश्वासन का बोध करें : “समझ प्रत्येक आत्मा की सबसे मूल्यवान धरोहर है। यह आपकी आंतरिक दृष्टि, सहज ज्ञान की क्षमता है जिसके द्वारा आप सत्य को स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं – अपने और दूसरों के बारे में, तथा आपके रास्ते में आने वाली सभी स्थितियों के बारे में – और तदनुसार अपने दृष्टिकोण और कार्यों को सही ढंग से समायोजित करें।”

हम उस स्पष्टता और विश्वास को कैसे प्राप्त कर सकते हैं कि जो सही है उसे समझ सकें और उसे थाम सकें? ईश्वर पर नित्य, गहन एकाग्रतापूर्ण ध्यान के लिये एक नवीकृत प्रतिबद्धता ही वह सबसे बड़ा उपहार है जो आप व्यापक सामाजिक, आर्थिक, और यहां तक कि पर्यावरणीय उथल-पुथल के इस युग में स्वयं को और अपने परिवार को दे सकते हैं। सुरक्षा और लचीलेपन के शाश्वत स्रोत के साथ दैनिक भक्तिपूर्ण संपर्क हमारी आत्माओं की “टूटते हुए संसार के विध्वंस के बीच अडिग खड़े रहने” की शक्ति के निरंतर, जीवंत प्रतिज्ञापन के लिये स्वयं को प्रशिक्षित करने का तरीका है।”

जब हम एकाकी, दूरस्थ भक्तों के रूप में जीवन की चुनौतियों का सामना करते हैं, तो ईश्वर में अपनी चेतना को स्थित करने की क्षमता का अपनी इच्छा से प्रयोग करना कठिन लग सकता है। परन्तु जब हम ईश्वर और गुरु के साथ हाथ और ह्रदय जोड़ते हैं — और उन हजारों दिव्य मित्रों के साथ, जिनके साथ हम इस दिव्य मार्ग पर चल रहे हैं — तो हम अपनी आध्यात्मिक प्रगति में लगातार आगे बढ़ने के लिए स्थिरता और धैर्य पा सकते हैं, फिर परिस्थितियों की चाहे जितनी भी विनाशकारी विपरीत-धाराएं हमें रास्ते से हटाने का प्रयास क्यों न करें। व्यक्तियों के रूप में हम इस विधान के अधीन हो सकते हैं कि वातावरण इच्छा-शक्ति से अधिक शक्तिशाली होता है, लेकिन अनेक इच्छाएं एकजुट होकर वातावरण को बदल सकती हैं – या एक नया वातावरण निर्माण कर सकती हैं। सामूहिक ध्यान और दिव्य संगति के माध्यम से, हम विश्व भर में क्रियायोग साधकों द्वारा सामूहिक रूप से उत्पन्न आध्यात्मिक स्पंदनों के साथ अपने व्यक्तिगत प्रयासों को सुदृढ़ करते हैं।

आप में से अनेक भक्तों ने ऑनलाइन ध्यान, भक्तिपूर्ण कार्यक्रमों, और विविध भाषाओं में कक्षाओं के नव-निर्मित आभासी वातावरण के लिए आभार व्यक्त किया है, जिसने पिछले दो वर्षों में आपकी व्यक्तिगत साधना को गहरा किया है, और विशेष रूप से हमारे पूज्य गुरु के साथ उत्थानकारक समस्वरता को जिसका अनुभव आप इनमें भाग लेते हुए करते हैं। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी — अपने ऑनलाइन कॉन्वोकेशन सहित — अपने अंतरराष्ट्रीय “दीवार रहित मंदिर” में इन सभी कार्यक्रमों को जारी रखने की योजना है और जितना हम कर सकते हैं उनका विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।

सत्संग (सत्य के साथ संगति) का बंधन जो हमें वास्तव में एक विश्वव्यापी परिवार के रूप में एकजुट करता है, हमारे व्यक्तिगत जीवन को साहस और शक्ति तथा इस दृढ़ विश्वास के साथ निरंतर भरता रहे कि बाह्य जगत् में किसी भी क्षणभंगुर अनुभव की तुलना में ईश्वर का प्रकाश और आनंद अधिक स्पष्ट रूप से वास्तविक है। और वह प्रकाश एवं सत्य तथा आनंद आपका अपने उच्चतम और महान् लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सदा मार्गदर्शन करे – नवीन वर्ष में और हमेशा।

दिव्य प्रेम एवं मैत्री में,

स्वामी चिदानन्द गिरि

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