नव वर्ष 2018 पर स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश

“इस नव वर्ष में मैं एक नया व्यक्ति हूं। और मैं अपनी चेतना को बार-बार परिवर्तित करूँगा जब तक कि मैंने अज्ञानता के समस्त अंधकार को मिटा नहीं दिया है और जिसकी छवि में बना हूँ उस ब्रह्म के जगमगाते प्रकाश को प्रकट नहीं किया है।"

—परमहंस योगानन्द

जैसे ही हम नव वर्ष में प्रवेश करते हैं, उत्सव पर्व के आनंद और उत्थान से भर हुए, मैं अपने आध्यात्मिक परिवार और मित्रों को गुरूदेव परमहंस योगानन्दजी के आश्रमों में अनुभव किए गए क्रिसमस के आनंद को विश्व भर से आई हुई आपकी प्रेमपूर्ण शुभकामनाओं द्वारा बढ़ाने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। हम इस उत्सव पर्व में और पूरे वर्ष में आपकी सदाशयता के कई भावों को गहराई से अनुभव करते हैं, और हम ईश्वर और गुरु के प्रेम में डूबे आध्यात्मिक संबंधों की इन हार्दिक यादों को संजोते हैं। यह जान लें कि मेरी प्रार्थनाएँ आप सभी तक पहुँचती हैं, कि ईश्वर आपके प्रयासों को आपके हृदयों के सबसे निकट लक्ष्यों को प्राप्त करने और आपके भीतर की दिव्य छवि को उत्तरोतर प्रकट करने का आशीर्वाद दें।

प्रत्येक नव वर्ष हमारे लिये अपनी नियति के स्वामी बनने की ईश्वर-प्रदत्त स्वतंत्रता को अपने भीतर उन्मुक्त छोड़ने का एक अद्भुत अवसर लेकर आता है। हमें न तो गहरे पैठी व्यर्थ आदतों और विचारधाराओं के घिसे-पिटे मार्गों का स्वचालित रूप से अनुसरण करने की आवश्यकता है, और न ही इन्द्रियों, अहं, तथा सांसारिक वातावरण के आवेगों द्वारा अपने आध्यात्मिक आदर्शों से विचलित होने की। विवेक की शक्ति एवं नव वर्ष में एक नवीन शुरुआत करने के स्फूर्तिदायक विचार से आपूरित इच्छा-शक्ति के द्वारा, हम अपनी एकाग्रता को पुनर्निर्धारित कर ऐसे नवीन मार्गों को प्रदीप्त कर सकते हैं जो हमारी आत्मा की अन्तर्निहित सम्भावनाओं को प्रकट करेंगे। यह जान लें कि अतीत आपका मार्ग अवरुद्ध नहीं कर सकता और भविष्य आपको भयभीत नहीं कर सकता। आप सचेत रूप से वर्तमान में रहना और इस विश्वास के साथ आगे बढ़ना चुन सकते हैं कि असीम संसाधन आपके नियंत्रण में हैं।

गुरुजी हमें प्रोत्साहित करते हैं कि आत्म-निरीक्षण के द्वारा तथा अपनी चेतना को ईश्वर की विशाल सहायक चेतना से समस्वर करने हेतु ध्यान करके हम आगामी वर्ष के लिये अपने जीवन की दिशा तय करें, और फिर अपने जीवन पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिये विचार एवं इच्छा-शक्ति के उनके दिव्य उपहारों का प्रयोग करें। आत्मसंदेह, पिछली भूलों पर दु:ख, और अन्य किसी भी प्रकार की नकारात्मक सोच से मन को मुक्त करना पहला महत्वपूर्ण कदम है। उन अवरोधों को दूर कर, अपनी परिशुद्ध चेतना में उस सकारात्मक गुण या लक्ष्य का प्रतिज्ञापन कीजिये जिसे आप अभिव्यक्त करना या प्राप्त करना चाहते हैं एवं उसे इस पर अंकित कर लीजिये। गुरुदेव ने हमें बताया है, “आप इसी क्षण अपनी चेतना में किसी भी प्रवृत्ति को स्थापित कर सकते हैं, यदि आप एक शक्तिशाली विचार को अपने मन में डाल दें; तब आपके कर्म एवं आपका सम्पूर्ण अस्तित्व उस विचार का पालन करेंगे।” शान्त, धैर्यपूर्ण अध्यवसाय के साथ इच्छा की उत्प्रेरक शक्ति का प्रयोग कर, अर्थात् आप जिसके लिये प्रयासरत हैं स्वयं को उस विशिष्ट लक्ष्य का स्मरण कराने के लिये नित्य नये तरीकों की खोज कर, आप देखेंगे कि आपने जो प्रतिज्ञापन किया था वह एक वास्तविकता बन गया है।

यह भी याद रखें, कि अपने प्रयासों में आप एकाकी नहीं हैं। जब अपने दैनिक ध्यान की निश्चलता में आप ईश्वर से सम्पर्क करते हैं जो कि कार्यसिद्धि की समस्त शक्ति के परम स्रोत हैं, तब आप अधिकाधिक यह अनुभव करेंगे कि उनकी शक्ति आपके विचारों के नीचे स्पंदित हो रही है, उनकी प्रबल इच्छा-शक्ति आपकी इच्छा-शक्ति को सुदृढ़ कर रही है, और उनका ज्ञान एवं प्रेम आपका मार्गदर्शन कर रहा है। गुरुजी ने हमें बताया है, “प्रत्येक क्षण आपके और ईश्वर के बीच एक कड़ी है।” उस अभिज्ञता में रहकर, आप पायेंगे कि आपकी चेतना की सतह के नीचे शान्ति की एक मौन सरिता प्रवाहित हो रही है, और आपके सम्पूर्ण अस्तित्व तथा आपकी उदात्त आकाँक्षाओं का पोषण कर रही है। अपने स्वयं के आन्तरिक रूपान्तरण एवं अपने आत्मीय गुणों के विकास से, आप दूसरों की अच्छाई को उजागर करेंगे और उन्हें भी अपने वास्तविक दिव्य स्वरूप की खोज एवं इसकी अभिव्यक्ति के लिये प्रोत्साहित करेंगे।

आपको और आपके प्रियजनों को ईश्वर के प्रेम एवं अनवरत आशीर्वादों से पूर्ण नूतन वर्ष की शुभकामनाएं,
श्री स्वामी चिदानन्द गिरि

शेयर करें

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email