शांति स्थापित करने का तरीका क्या है? प्रत्येक वर्ष सितम्बर माह में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस समुदायों और राष्ट्रों के बीच आपसी समझ, सम्मान और खुले संवाद के माध्यम से शांति के आदर्श का सम्मान करता है।
परमहंस योगानन्दजी और सभी महान् आत्माओं ने सिखाया है कि उस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हमें स्वयं से शुरुआत करनी होगी — अपने अन्तर् में शांति और सद्भाव के दिव्य स्रोत का अनुभव करके।
“मुझे विश्वास है कि यदि संसार में प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर के साथ सम्पर्क करना सिखा दिया जाये (केवल उन्हें बौद्धिक रुप से जानना नहीं), तब शान्ति शासन कर सकती है; उससे पहले नहीं।” परमहंसजी ने समझाया। “जब ध्यान में दृढ़ता द्वारा आप ईश्वर को उनके साथ सम्पर्क के माध्यम से अनुभव कर लेते हैं, तो आपका हृदय समस्त मानव-जाति को गले लगाने के लिये तैयार हो जाता है।”
और जैसा कि वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानन्द गिरि ने 2024 के कन्वोकेशन में अपने भाषण में हमें आश्वस्त किया: जब हम दैनिक ध्यान के पवित्र विज्ञान को सामूहिक रूप से लागू करना सीखेंगे और अपनी जागृत होती वैश्विक सभ्यता की खोजों एवं विकास का रचनात्मक उपयोग करेंगे, तो “पृथ्वी पर समृद्धि, सद्भाव, आध्यात्मिक समझ और शांति का एक नया युग आएगा।”
हम आशा करते हैं कि यह न्यूज़लेटर आपको ध्यान का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करेगा — आत्मा की उस शांति की खोज करने के लिए जो वहाँ आपकी प्रतीक्षा कर रही है, और समस्त मानव जाति के साथ अपने अटूट संबंध को गहराई से महसूस करने के लिए।
परमहंस योगानन्दजी के व्याख्यानों और लेखों से:
जब आप अपने अन्तर् में शान्त और सन्तुष्ट होते हैं तब आप सभी तसे प्रेम करते हैं और सभी के लिए मित्रता अनुभव करते हैं। यही वह सामञ्जस्य है जिसे ईश्वर अपनी सृष्टि में चाहते थे।
ध्यान-जनित शान्ति ही ईश्वर की भाषा है तथा उनका वह सुख है जो आपको अपने आलिंगन में बाँधे रखता है। ईश्वर आपके अन्तर् की शान्ति के सिंहासन पर विराजमान हैं। उन्हें पहले वहाँ खोजिए, और आप उन्हें हर उस वस्तु में पाएँगे जो जीवन में सार्थक है: सच्चे मित्रों में, प्रकृति के सौंदर्य में, अच्छी पुस्तकों में, गहन विचारों में, तथा आदर्श महत्वाकांक्षाओं में।
प्रत्येक रात्रि निद्रा में आप शान्ति और आनन्द का स्वाद चखते हैं। जब आप गहरी निद्रा में होते हैं, तो ईश्वर आपको शान्त अधिचेतनावस्था में रखते हैं, जिसमें आप इस जीवन के समस्त भय और चिन्ताएँ भूल जाते हैं। ध्यान के द्वारा आप जागृतावस्था में मन की उस पवित्र अवस्था को अनुभव कर सकते हैं, और आरोग्यकर शान्ति में निरन्तर लीन रह सकते हैं।
एक योगी हर समय ध्यान-जनित शान्ति को मन में विराजमान रखने का प्रयास करता है, प्रत्येक कार्य में तथा दूसरों के साथ व्यवहार करते समय भी।
वे वास्तविक शांतिदूत हैं जो अपने दैनिक ध्यान के भक्तिपूर्ण अभ्यास से शांति उत्पन्न करते हैं।…आंतरिक शांति के रूप में ईश्वर की प्रकृति का अनुभव करने के बाद, भक्त चाहते हैं कि शांति रूपी ईश्वर सदा उनके घर में, पड़ोस में, राष्ट्र में, सभी राष्ट्रीयताओं और जातियों के बीच प्रकट हो।
जब हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को एक क्राइस्ट, एक कृष्ण, एक बुद्ध की बुद्धिमत्ता और उदाहरण के अनुसार आकार देगा तो हम यहाँ शान्ति प्राप्त कर सकते हैं, उससे पहले नहीं। हमें इसे आरम्भ करना चाहिए अभी, स्वयं अपने से। हमें उन दिव्य आत्माओं की तरह बनने का प्रयास करना चाहिए, जो हमें रास्ता दिखाने के लिये इस धरा पर बार-बार पर आईं हैं। हमारे परस्पर प्रेम करने एवं अपनी समझ को स्पष्ट रखने, जैसा कि उन्होंने सिखाया एवं उदाहरण द्वारा दिखाया है, से ही शान्ति आ सकती है।
इस ज्ञान को तत्क्षण व्यवहार में लाने के लिए, हम आपको एसआरएफ़ संन्यासी स्वामी सेवानन्द गिरि के नेतृत्व में “परमहंस योगानन्दजी के आंतरिक शांति पर निर्देशित ध्यान” में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह वीडियो ध्यान की मुद्रा के साथ-साथ परमहंसजी द्वारा सिखाए गए ध्यान से पहले के कुछ प्रारंभिक श्वास अभ्यासों का एक उत्कृष्ट अवलोकन भी देता है।


















