परिचय :
विश्व के प्रिय शिक्षक और योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया/सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप के गुरु-संस्थापक परमहंस योगानन्द, ने अपनी पुस्तक योगी कथामृत में दिव्य उपलब्धि के आधुनिक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। लाखों पाठक उनके द्वारा उसमें वर्णित सन्तों के चित्रण से रोमांचित हुए हैं — विशेष रूप से उनके अपने प्रबुद्ध गुरुओं की परम्परा से, जिन्होंने पूर्ण रूप से आत्म-साक्षात्कार को चरितार्थ किया।
परमहंसजी का जीवन साधकों को शांति, प्रेम और आनंद के उन अनंत भंडारों की अनुभूति कराने के लिए समर्पित था, जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान हैं और जो महानुभावों के जीवन में प्रचुरता से अभिव्यक्त होते हैं। उनकी यह इच्छा थी कि वे हमें आनंदपूर्ण “ईश्वर दर्शन” (ईश्वर की एक झलक) कराएँ, और हमें स्वयं यह समझने के लिए प्रोत्साहित करें कि उन्होंने स्वयं जिस सत्य का अनुभव किया और जिसे साकार किया, वह क्या है।
श्री दया माता, वाईएसएस/एसआरएफ़ की तीसरी अध्यक्षा एवं संघमाता ने परमहंसजी के विषय में कहा : “वे उन दिव्य आत्माओं के समूह में सम्मिलित होते हैं जिन्होंने पृथ्वी पर सत्य के प्रकाश के अवतार के रूप में मानवजाति के पथ को प्रकाशित करने हेतु जीवन धारण किया।”
इस पोस्ट में हम परमहंस योगानन्दजी के अपने शब्दों और वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष (नीचे लिंक) की अंतर्दृष्टि के माध्यम से, ईश्वर के बौद्धिक ज्ञान को एक व्यक्तिगत और पूर्ण संतुष्टिदायक अनुभव में रूपांतरित करने के महत्त्व को साझा कर रहे हैं।
परमहंस योगानन्दजी की वार्ताओं एवं लेखनों से :
इस आन्दोलन के पीछे लोगों को उनकी अपनी आत्मानुभूति प्रदान करना ही एकमात्र महान् उद्देश्य है। जब लोग यह समझ जाएँगे कि ईश्वर को जानना उनका कर्तव्य और सौभाग्य है, तब पृथ्वी पर एक नया युग आ जाएगा।
मैं यहाँ आपको धर्मोपदेश देने नहीं आता, अपितु आपको वे सत्य देने आता हूँ जो मैं अपने अनुभव के उद्यान से एकत्र करता हूँ।…जो कुछ मैं आपको देता हूँ मैं चाहता हूँ कि आप स्वयं उसे ईश्वर के साथ अपने व्यक्तिगत सम्पर्क के माध्यम से अनुभव करें। उस समझ की कोई समता नहीं कर सकता।
आप नहीं जानते कि आपने ईश्वर को न पाकर कितना खो दिया है, क्योंकि आपने उन्हें कभी जाना ही नहीं है। बस एक बार आपका उनसे सम्पर्क हो जाए, तो संसार की कोई भी शक्ति आपको उनसे दूर नहीं कर सकेगी। मेरी एकमात्र इच्छा यह है कि मैं आपको ईश्वर की एक झलक दिखला दूँ, क्योंकि उनकी प्राप्ति से बढ़ कर कोई और दूसरी उपलब्धि नहीं है।
यदि मैं एक अद्भुत फल के विषय में जो मुझे मिला है, आपको बताऊँ, और एक वर्ष तक आपको चखाए बिना प्रतिदिन विस्तार से उसकी व्याख्या करूँ, तो भी आप उससे सन्तुष्ट नहीं होंगे। सत्य के विषय में सुनने से आत्मा की भूख तृप्त नहीं होती।…ईश्वर के लिए आपकी भूख इतनी गहन होनी चाहिए कि आप उन्हें पूरी लगन से खोजने लगें।
योग ध्यान के विज्ञान में भारत ने उन्हें पाने की विधि का उत्तर दिया है। मैंने उस देश का भ्रमण किया। मैं एक सद्गुरु के चरणों में बैठा। मैं केवल विश्वस्त ही नहीं हूँ, कि ईश्वर हैं, अपितु मैं आपको उनकी उपस्थिति का अपना साक्ष्य देता हूँ। यदि आप मेरे शब्दों पर ध्यान देंगे, तो आप भी अपने अनुभव द्वारा किसी दिन कहेंगे, कि ईश्वर हैं। आप जान लेंगे कि मैं आपको सच बताता हूँ।
हम आपको परमहंस योगानन्द के ध्यान और परमात्मा के साथ आपके संबंध के माध्यम से जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य और अर्थ को खोजने के विषय में और अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए आमंत्रित करते हैं — एक ऐसी तृप्ति जो आपके सभी प्रयासों को परम आनंद से परिपूर्ण कर देगी।
ब्लॉग पोस्ट “परमहंस योगानन्द द्वारा विश्व को दिए गए 6 आध्यात्मिक रूप से क्रांतिकारी विचार” पर, स्वामी चिदानन्दजी ने उन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया है जो परमहंस योगानन्द विश्व में लाए — एक आध्यात्मिक निधि जो आधुनिक सभ्यता की दिशा को बदल देगी और उन लोगों के जीवन को परिवर्तित कर दिया जिन्होंने अपने दैनिक जीवन में योग विज्ञान को अपनाया।


















