वाईएसएस ने हिमालय में स्थित एक सुंदर परिसर में ग्रीष्मकालीन शिविरों का आयोजन किया
(बच्चों और किशोरों के लिए, 31 मई – 6 जून, 2026)

10 जुलाई, 2026
स्वामी ललितानन्द ने दीप प्रज्वलित कर पारंपरिक रूप से शूलिनी विश्वविद्यालय में वाईएसएस ग्रीष्मकालीन शिविर का औपचारिक शुभारंभ किया।
उनके साथ स्वामी निर्मलानन्द तथा शूलिनी विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रो. प्रेम कुमार खोसला और श्रीमती सरोज खोसला, और साथ ही कुलपति डॉ. अतुल खोसला भी उपस्थित थे।

अखिल भारतीय युवा संपर्क गतिविधियों में एक नया अध्याय

वाईएसएस यूथ सर्विसेज ने 31 मई से 6 जून, 2026 तक शूलिनी विश्वविद्यालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश में बच्चों और किशोरों के लिए अब तक के सबसे बड़े सप्ताह भर चलने वाले ग्रीष्मकालीन शिविरों का आयोजन किया। देश भर से 11 से 17 वर्ष की आयु के 100 से अधिक लड़कों और 100 लड़कियों ने उनके लिए आयोजित दो अलग-अलग शिविरों में भाग लिया।

इन शिविरों की रूपरेखा तीन अलग-अलग आयु समूहों — कनिष्ठ (11-13), किशोर (14-15), और वरिष्ठ (16-17) की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार की गई थी। इसके अतिरिक्त, 18-23 आयु वर्ग के युवा साधकों को असिस्टेंट ग्रुप लीडर के रूप में शामिल किया गया था, ताकि वे भविष्य में अधिक उत्तरदायित्व वाले सेवा के पदों के लिए तैयार हो सकें।

गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्दजी की आदर्श जीवन शिक्षाओं पर आधारित, इस शिविर में शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास को प्रोत्साहित किया गया। आध्यात्मिक दिनचर्या और अनुशासन शिविर की मुख्य विशेषताएँ थीं, जिसमें प्रातःकालीन और सायंकालीन सामूहिक शक्ति-संचार व्यायामों और ध्यान के अभ्यास पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया।

वाईएसएस संन्यासियों और अनुभवी शिक्षकों के नेतृत्व में आदर्श जीवन कक्षाओं, जिनमें निर्भयता, एकाग्रता, इच्छा-शक्ति, मित्रता और अंतर्ज्ञान जैसे व्यावहारिक विषयों पर चर्चा की गई तथा आयु-समूह के अनुसार समूह चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनसे किशोरों ने जीवन के महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों को समझने में सहायता प्राप्त की। इन कक्षाओं का समापन वाईएसएस ध्यान प्रविधियों पर संन्यासियों के मार्गदर्शन के साथ हुआ, जिसमें योग्य शिविरार्थियों ने ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से शरीर को ऊर्जित करने, हं-सः प्रविधि के माध्यम से मन को एकाग्र करने, और ध्यान की ओम् प्रविधि के माध्यम से ईश्वर के साथ संपर्क स्थापित करने की कला सीखी।

माता-पिता के संस्मरण

शूलिनी यूनिवर्सिटी में आयोजित ग्रीष्मकालीन शिविर द्वारा उनके बच्चों में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन आया, इस विषय में कृतज्ञ माता-पिता ने वाईएसएस को अनेक संदेश भेजे। उनमें से कुछ नीचे दिए जा रहे हैं :

शिविरों की वीडियो झलकियाँ

एक भव्य प्राकृतिक पृष्ठभूमि

हिमालय की तलहटी में शिवालिक पहाड़ियों से घिरा शूलिनी विश्वविद्यालय का 25-एकड़ परिसर सुरम्य पैदल यात्रा मार्गोंऔर चीड़ के जंगलों से सुसज्जित है। यह परिसर मनोरम दृश्य, सुहावना मौसम और शांत वातावरण प्रदान करता है। यह प्रेरणादायक प्राकृतिक परिवेश शिविरार्थियों के अनुभव का एक अभिन्न अंग बन गया, जिसने आनंद के साथ सीखने और प्रकृति में ईश्वर की उपस्थिति के प्रति गहरी समझ को बढ़ावा दिया।

लड़कों और लड़कियों के लिए दो अलग-अलग शिविर

लड़कों का शिविर

वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष का संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि के एक प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ, जिसे वरिष्ठ वाईएसएस संन्यासी स्वामी ललितानन्द गिरि ने पढ़कर सुनाया और उसकी व्याख्या की (नीचे देखें)

किशोरावस्था का आध्यात्मिक प्रशिक्षण

सामूहिक ध्यान और प्रविधि पुनरवलोकन कक्षाएँ

लड़कों के शिविर के प्रत्येक दिन का प्रारम्भ और समापन शक्ति-संचार व्यायामों तथा ध्यान के प्रतिदिन दो बार सामूहिक अभ्यास के साथ होता था।

स्वामी निर्मलानन्द शक्ति-संचार पर एक पुनरवलोकन कक्षा लेते हुए।
स्वामी शंकरानन्द खुले आसमान के नीचे ध्यान कराते हुए।

आदर्श जीवन कक्षाएँ

स्वामी ललितानन्द और स्वामी निर्मलानन्द ने विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में “अन्तर्ज्ञान” और “निडरता” पर संवादमूलक कक्षाएँ संचालित कीं। इसके अतिरिक्त, अनुभवी ग्रुप लीडर्स ने “इच्छा शक्ति” जैसे अन्य उपयोगी विषयों पर चर्चा की।

दैनिक अन्तर्निरीक्षण

बच्चों ने अपने डॉर्मिटरी कमरों में गुरु कथा (वाईएसएस के छह गुरुओं के जीवन की कहानियाँ), गीता पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम के अभ्यास और अन्तर्निरीक्षण (एक अन्तर्निरीक्षण चार्ट की सहायता से) जैसी सामूहिक गतिविधियों के साथ अपने प्रत्येक दिन का समापन किया। यह प्रयास युवा मनों में उनके दैनिक जीवन के प्रत्येक पहलू को आध्यात्मिक बनाने के तरीकों को स्थापित करने के लिये था।

बाबाजी की गुफ़ा

बच्चों की पसंदीदा गतिविधियों में से एक थी “बाबाजी की गुफ़ा” का भ्रमण करना, यह जंगल में एक खोह में बनाई गई एक प्रतिकृति है, जिसमें बाबाजी की आदमकद प्रतिमा स्थापित है।

किशोर चैंटिंग और ध्यान करते हुए तथा एक-दूसरे को
महावतार बाबाजी की अपनी मनपसंद कहानियाँ सुनाते हुए।
किशोरों का एक समूह “बाबाजी की गुफ़ा” क्षेत्र में साहचर्य का आनंद लेते हुए।

शैक्षणिक और मनोरंजक गतिविधियाँ

बालकों के इस शिविर में कई प्रकार की गतिविधियाँ भी शामिल थीं, जो बच्चों और किशोरों को मनोरंजक ढंग से व्यस्त रखते हुए उनमें अनुशासन और अन्तर्निरीक्षण की भावना का संचार करती थीं।

परिसर भ्रमण

वरिष्ठ युवाओं के लिए परिसर का भ्रमण आधुनिक विज्ञान की दुनिया की एक रोचक झलक प्रस्तुत करता है।

खेलकूद

खेलों में लड़कों के लिए टेबल टेनिस, क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेल शामिल हैं।

वनों की सैर

वन-पथों पर पैदल-यात्रा, वरिष्ठ किशोरों की एक प्रिय गतिविधि थी।

वृक्षारोपण अभियान

शिविरार्थी ने उनके द्वारा रोप गए प्रत्येक पौधे पर अपना नाम अंकित करते हुए जंगल में वृक्षारोपण का आनंद लिया। अगले वर्ष शिविर में वे अपने द्वारा लगाए पौधों की वृद्धि देख सकते हैं।

बेकिंग

किशोर आहार प्रयोगशाला में बेकिंग की कला सीखते हुए।

कला और शिल्प

बालक सजावटी फोटो फ्रेम बनाते हुए…
…और उनमें अपने समूह की फोटो लगाते हुए।

समूहों में परिवार-शैली का भोजन

प्रत्येक समूह में 9 शिविरार्थी और 3 वयस्क ग्रुप लीडर्स होते थे, जो परिवार जैसा अपनापन विकसित करने के उद्देश्य से दिन में तीन बार साथ भोजन करते थे। योग के सिद्धांतों का पालन करते हुए, वे मौन रहकर भोजन करते थे और एक-दूसरे को भोजन परोसने के साथ-साथ भोजन के बाद सफ़ाई में भी सहयोग करते थे।

स्वामी निर्मलानन्द भोजन से पूर्व बालकों से प्रार्थना करवाते हुए।
शिविर में बच्चों की रुचि के अनुरूप सात्त्विक खाद्य पदार्थों से युक्त
विशेष भोजन प्रेमपूर्वक उपलब्ध कराया जाता है।

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक उत्सव

सांस्कृतिक कार्यक्रम

शिविरार्थियों ने गुरुजी की शिक्षाओं से कहानियों पर आधारित प्रस्तुतियों के साथ एक संध्याकालीन कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार के वाद्यों के साथ कॉस्मिक चैन्ट्स की एक सामूहिक प्रस्तुति भी शामिल थी (नीचे देखें)। 

आध्यात्मिक मेला

शिविर के अंतिम दिन, ग्रुप लीडर्स ने उच्च द्वापर युग में जीवन की कल्पना करने के लिए एक रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया। बच्चों ने अंतर्ज्ञान, मन-पठन, स्मृति और टीम-वर्क पर आधारित खेल खेले। आध्यात्मिक मेला अत्यंत सफल रहा!

एक खेल में तल्लीन बच्चे।
एसआरएफ़ से आए स्वामी निष्ठानन्द ने किशोरों के साथ
आध्यात्मिक मेले में भाग लिया।

प्रशस्ति-वचन (Testimonials)

बालिका शिविर

शुभारम्भ कार्यक्रम

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान स्वामी ललितानन्द वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश पढ़ते हुए।

किशोरावस्था का आध्यात्मिक प्रशिक्षण

सामूहिक ध्यान और प्रविधि पुनरवलोकन कक्षाएँ

बालिका शिविर के प्रत्येक दिन का प्रारम्भ और समापन दिन में दो बार शक्ति-संचार व्यायाम और ध्यान के सामूहिक अभ्यास से होता था।

स्वामी ललितानन्द शक्ति-संचार व्यायामों में सिखाई गई ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से
शरीर को ऊर्जित करने की कला समझाते हुए।
स्वामी शंकरानन्द हं‐सः प्रविधि की पुनरवलोकन कक्षा से पहले प्रार्थना करते हुए।

आदर्श जीवन कक्षाएँ

किशोरों के साथ चर्चा का नेतृत्व करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित अनुभवी शिक्षकों ने मित्रता, इच्छा-शक्ति और करुणा जैसे विषयों पर इनडोर और आउटडोर, दोनों ही परिवेशों में कक्षाएँ लीं (जैसा कि नीचे दिखाया गया है)

बाबाजी की गुफ़ा

बालिका छात्रावास क्षेत्र में उनके लिए विशेष रूप से एक अलग “बाबाजी की गुफ़ा” की व्यवस्था की गई थी, जहाँ ग्रुप लीडर्स ने उन्हें सामूहिक चैंटिंग, ध्यान और कहानी-कथन में मार्गदर्शन दिया।

शैक्षिक एवं मनोरंजक गतिविधियाँ

बालिकाओं के शिविर में विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ भी शामिल थीं, जो बच्चों और किशोरों को आनंददायक तरीके से व्यस्त रखने के साथ-साथ उनमें अनुशासन और अंतर्निरीक्षण की भावना भी जगाती थीं।

परिसर भ्रमण

परिसर के भ्रमण के दौरान, वरिष्ठ किशोरों को विज्ञान एवं कला के क्षेत्र में
शोध के विभिन्न अवसरों से परिचित कराया गया।

खेल-कूद

बालिकाओं के लिए खेलों में बैडमिंटन, बास्केटबॉल, थ्रोबॉल और फ्रिस्बी के
साथ-साथ कई अन्य इनडोर खेल भी शामिल हैं।

वनों की सैर

किशोरों ने मनोरम पदयात्राओं में भाग लिया, जिनमें ध्यान और पिकनिक के दौरान भोजन भी शामिल है।

बेकिंग

बालिकाओं ने आहार प्रयोगशाला में विभिन्न बिस्कुट बनाने की कला सीखी।

कला और शिल्प

विश्वविद्यालय के निवासी-कलाकार द्वारा पत्थरों पर चित्रकारी के सत्र आयोजित किए जाते हैं। शिविरार्थी अपने द्वारा चित्रित पत्थर प्रदर्शित करते हुए…

…और अन्य कला एवं शिल्प डिज़ाइन।

समूहों में परिवार-शैली का भोजन

लड़कों के शिविर की भांति, परिवार की भावना विकसित करने के लिए 3 वयस्क ग्रुप लीडर्स के साथ 9 शिविरार्थियों का प्रत्येक समूह प्रतिदिन तीन बार एक साथ भोजन करता था। योग सिद्धांतों का पालन करते हुए, वे एक-दूसरे की सेवा करने और बाद में साफ-सफाई में मदद करने के साथ-साथ मौन रहकर भोजन करते थे।

बालिकाएँ परिवार-शैली के सामूहिक भोजन में मौन रहकर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हुए।
भोजन के समय एक-दूसरे की सेवा करना और मित्रता के सम्बन्ध बनाना सीखना।

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक उत्सव

सांस्कृतिक कार्यक्रम

शिविर के अंतिम दिन बालिकाओं द्वारा एक सुंदर ढंग से निर्देशित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

आध्यात्मिक मेला

जबकि लड़कों के शिविर के ग्रुप लीडर्स ने भावी द्वापर युग का एक कार्यक्रम तैयार किया, वहीं लड़कियों के शिविर के ग्रुप लीडर्स ने शिविरार्थियों को अंतिम अवरोही द्वापर युग के परिवेश में, भगवान कृष्ण के समय में पहुँचा दिया। गोपियों और गोपिकाओं के रूप में सजे-धजे शिविरार्थियों ने साधारण खेल खेले और रास लीला के एक आनंदमय भक्तिपूर्ण पुनर्अभिनय के साथ इस कार्यक्रम का समापन किया।

प्रशस्ति-वचन( Testimonials)

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समापन कार्यक्रम के लिए एक विशिष्ट अतिथि

वाईएसएस के वरिष्ठ संन्यासी, स्वामी स्मरणानन्द, बालक एवं बालिका दोनों शिविरों के समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया की ओर से उन्होंने खोसला परिवार को उनके उदार सहयोग के लिए सम्मानित किया और हार्दिक धन्यवाद दिया। उनके सहयोग से विश्वविद्यालय, उसकी सुविधाएँ तथा स्टाफ़ की सहायता बच्चों एवं किशोरों के दो वाईएसएस शिविरों के एक साथ सफल आयोजन के लिए उपलब्ध हो सकी।

समापन कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने शिविरार्थियों को अपने साथ ले जाने और दैनिक जीवन में उतारने के लिये एक विदाई संदेश दते हुए प्रेरणा प्रदान की, जिसने उन्हें ईश्वर-प्रदत्त अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग करने और एक सुखी तथा सफल जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया। एक सेब के बीज को ऊपर उठाते हुए, स्वामी स्मरणानन्द ने शिविरार्थियों को बताया कि जिस प्रकार एक छोटा सा बीज अनेक फलों को उत्पन्न करने वाले एक विशाल वृक्ष के रूप में बढ़ता है, ठीक उसी तरह उनका जीवन भी उनके अपने लिए और समाज के लिए फलदायी होना चाहिए।

स्वामी स्मरणानन्द ने खोसला परिवार का अभिनंदन किया…
...और अपने समापन संबोधन से शिविरार्थियों को प्रेरित किया।

गुरु का सुरक्षा-छत्र

शिविरों के प्रारंभ होने से कुछ दिन पहले, सोलन शहर में गर्म मौसम रहा और दूर-दूर तक जंगल में आग लगी हुई थी। शिविरों के उद्घाटन के दिन, गुरुदेव का सुरक्षात्मक छत्र बादलों, वर्षा और ठंडी हवाओं के रूप में ऊपर फैल गया। पूरे सप्ताह रुक-रुक कर हुई वर्षा और बादलों के छाए रहने से सभी कार्यक्रम सुहावने मौसम में संपन्न हुए। आश्चर्यजनक रूप से, शिविर समाप्त होने के अगले दिन ही सूर्य फिर से तेज चमकने लगा!

हिमालय में स्थित, आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक सुंदर परिसर में आयोजित इस ऐतिहासिक वाईएसएस शिविर की अत्यधिक सफलता, वॉलंटीयर्स और ग्रुप लीडर्स के सहयोग के साथ-साथ महान गुरुओं के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आशीर्वाद से ही संभव हो सकी।

शिविरार्थियों की कृतज्ञता नीचे दिए गए चित्र में प्रतिबिम्बित हो रही है, जहाँ बालिकाएँ एक संकेत-पट्ट की ओर इशारा कर रही हैं, जिस पर लिखा है : “ईश्वर के साथ सब कुछ संभव है!”

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