यह कार्यक्रम अब समाप्त हो चुका है।
यदि आप किसी आगामी कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, तो कृपया हमारे कार्यक्रम पेज पर जाएँ।

गुरु पूर्णिमा

(विशेष ध्यान एवं सत्संग)

वाईएसएस ओडीके गुरु पूर्णिमा विशेष ध्यान एवं सत्संग — जुलाई 2026

कार्यक्रम के विवरण

गुरु के प्रति गहरी श्रद्धा रखो। गुरु की संगति में रहने का अर्थ केवल शारीरिक रूप से उसके साथ रहना नहीं है (क्योंकि यह कभी-कभी असंभव भी होता है), बल्कि मुख्यतः उसे सदैव अपने हृदय में रखना और तात्त्विक रूप से उसके साथ एकात्म होना तथा मन को सदैव उसके साथ जोड़े रखना होता है।

— स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, वाईएसएस के भक्तगण वाईएसएस गुरुजनों की पूजनीय गुरु-परम्परा — विशेष रूप से हमारे प्रिय गुरुदेव, श्री श्री परमहंस योगानन्द — को हृदय से श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं, जिनकी दिव्य प्रेरणा और दिशानिर्देश हमें आत्म-साक्षात्कार के पथ पर निरन्तर अग्रसर करते रहते हैं।

इस पावन अवसर को मनाने तथा पवित्र गुरु-शिष्य संबंध की महिमा में, हम आपको जुलाई में निम्नलिखित विशेष कार्यक्रमों में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित करते हैं :

वाईएसएस संन्यासी द्वारा हिन्दी में विशेष सत्संग

बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय

मंगलवार, 28 जुलाई, 2026
शाम 6:30 से 7:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार)

इस सत्संग में, वाईएसएस संन्यासी स्वामी वासुदेवानन्द गिरि, परमहंस योगानन्दजी की ज्ञान-शिक्षाओं का सार प्रस्तुत करते हुए हमें बताते हैं कि गुरु वह मूर्त, जीवंत सेतु हैं जो मानव आत्मा को दिव्य चेतना से जोड़ते हैं; हमें याद दिलाते हैं कि अपनी जागृति के स्रोत को स्वीकार किए बिना आध्यात्मिक प्रगति संभव नहीं है; और गुरु पूर्णिमा का सार केवल कर्मकांडी पूजा के बारे में नहीं है, बल्कि ज्ञान के प्रकाश का उत्सव मनाने के बारे में है जो हमारे आंतरिक अंधकार को दूर करता है।

इस हिन्दी सत्संग का शीर्षक है, “बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय”

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाँय
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय”

कबीर, जो 15वीं सदी के प्रसिद्ध रहस्यवादी और कवि थे, उनके उपरोक्त सुन्दर दोहे से प्रेरणा लेते हुए, स्वामी वासुदेवानन्द समझाते हैं कि गुरु की कृपा के बिना और उनके विवेक तथा मार्गदर्शन के बिना, साधक सर्वव्यापी परमपिता की दिव्य उपस्थिति के प्रति “अंधा” रहेगा। यह गुरु ही हैं जो मन के दर्पण को चमकाते हैं, अज्ञानता (अविद्या) के अंधकार को दूर करते हैं, और ईश्वर की ओर जाने का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए हम गुरु को, साक्षात्कार के माध्यम के रूप में, अपने परम गन्तव्य (ईश्वर) से भी पहले सम्मानित करते हैं।

हम आपको परिवार और मित्रों के साथ इस सत्संग को देखने के लिए आमंत्रित करते हैं।

कृपया ध्यान दें : यह सत्संग गुरुवार, 30 जुलाई को रात्रि 10 बजे (भारतीय समयानुसार) तक देखने के लिए उपलब्ध रहेगा।

विशेष ध्यान

बुधवार, 29 जुलाई, 2026
सुबह 6:30 से 8:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार)

29 जुलाई को वाईएसएस संन्यासी के नेतृत्व में एक विशेष ऑनलाइन ध्यान होगा, जिसमें चैंटिंग और ध्यान के बाद एक सत्संग होगा।

कृपया ध्यान दें : यह कार्यक्रम शनिवार, 1 अगस्त, रात्रि 10 बजे (भारतीय समयानुसार) तक देखने के लिए उपलब्ध रहेगा।

प्रत्यक्ष कार्यक्रम

गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य पर विशेष प्रत्यक्ष कार्यक्रम वाईएसएस आश्रमों, केन्द्रों और मंडलियों में भी आयोजित किए जाएँगे। इन कार्यक्रमों के बारे में अधिक जानने और उनमें भाग लेने के लिए, कृपया अपने निकटतम ध्यान केन्द्र से संपर्क करें

वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश

इस अवसर पर हमारे पूज्य अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख, श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि का विशेष संदेश पढ़ने के लिए, कृपया नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें :

यदि आप इस पावन दिवस पर दान देने के लिए अन्त:प्रेरणा का अनुभव करते हैं, तो आप नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके दान अर्पित कर सकते हैं। हम आपकी उदारता के लिए ह्रदय से आभारी हैं, जिसे हम वाईएसएस की गुरु परम्परा के माध्यम से प्राप्त होने वाले अनेक आशीषों के लिए कृतज्ञता की हार्दिक अभिव्यक्ति के रूप में देखते हैं।

यदि आप हमारे गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्द और वाईएसएस गुरु परम्परा के द्वारा आपके जीवन में बरसाए गए उनके अनेक आशीर्वादों के लिए एवं उनके दिव्य मिशन में अपनी सेवा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करना चाहते हैं, तो हम आपको इस पावन अवसर पर वाईएसएस द्वारा जारी किए गए अपील को पढ़ने के लिए आमंत्रित करते हैं :

To make an offering on this special occasion, please click the button below:

नए आगंतुक

परमहंस योगानन्दजी और उनकी शिक्षाओं के बारे में और अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर जाएँ :

ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ ए योगी

विश्वभर में एक आध्यात्मिक उत्कृष्ट कृति के रूप में सराही जाने वाली इस पुस्तक के विषय में परमहंसजी प्रायः कहा करते थे, “जब मैं चला जाऊँगा यह पुस्तक मेरी सन्देशवाहक होगी।”

वाईएसएस पाठमाला

एक गृह-अध्ययन पाठमाला जो आपके जीवन को ऐसे असाधारण ढंग से रूपांतरित कर देती है जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की होगी, और आपको एक संतुलित एवं सफल जीवन जीने में सहायता करती है।

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