श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण द्वारा प्रस्तुत पथ सन्तुलित, मध्यवर्ती, स्वर्णिम पथ है, जो संसार के व्यस्त व्यक्ति और उच्चतम आध्यात्मिक आकांक्षी, दोनों के लिए है।
— परमहंस योगानन्द
भगवान् कृष्ण का जन्मोत्सव — जिनकी शिक्षाएँ श्रीमद्भगवद्गीता में निहित हैं — जन्माष्टमी के रूप में प्रति वर्ष योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया द्वारा विशेष स्मरणोत्सव कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह 4 सितम्बर को है।
हम निम्नलिखित कार्यक्रमों के साथ इस पवित्र अवसर को मनाने के लिए आपको हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं :
- शुक्रवार, 4 सितम्बर : वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानन्द गिरि के साथ विशेष ध्यान
- शनिवार, 29 अगस्त : वाईएसएस संन्यासी द्वारा हिन्दी में सत्संग
वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द गिरि के साथ
जन्माष्टमी पर विशेष ध्यान
(समकालिक हिन्दी अनुवाद के साथ)
शुक्रवार, 4 सितम्बर, 2026
सुबह 7:00 से – 8:00 बजे (भारतीय समयानुसार)
इस विशेष अवसर पर, वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि एक विशेष ध्यान का संचालन करेंगे, जिसका अमेरिका के लॉस एंजिलिस स्थित एसआरएफ़ अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय से सुबह 7 से 8 बजे (भारतीय समयानुसार) तक सीधा प्रसारण किया जाएगा।
यह वीडियो बाद में देखने के लिए उपलब्ध रहेगा।
यह कार्यक्रम अंग्रेज़ी में आयोजित किया जाएगा। हिन्दी में समकालिक अनुवाद (मूल अंग्रेज़ी सत्संग के साथ-साथ चलने वाला) केवल ज़ूम पर लाइव कार्यक्रम के दौरान ही उपलब्ध रहेगा।
हिन्दी में समकालिक अनुवाद हेतु :
- लाइव कार्यक्रम के दौरान Zoom पर शामिल हों। हमारा सुझाव है कि आप कार्यक्रम आरम्भ होने से कुछ मिनट पूर्व ही शामिल हो जाएँ।
- अपनी Zoom window के निचले भाग में स्थित टूलबार में “Interpretation” बटन पर क्लिक करें। (यदि आपको यह विकल्प दिखाई न दे, तो “More” बटन पर क्लिक करें और फिर दिखाई देने वाले मेन्यू से “Interpretation” का चयन करें।)
- सूची में से “Hindi” का चयन करें।
- कार्यक्रम प्रारम्भ होने पर, आपको हिन्दी में समकालिक अनुवाद सुनाई देगा।
कृपया ध्यान दें :
- यदि आपको तकनीकी सहायता की आवश्यकता है, तो कृपया वाईएसएस हेल्पडेस्क से संपर्क करें। आप (0651) 6655 555 पर कॉल करके अथवा [email protected] पर ईमेल भेजकर संपर्क कर सकते हैं।
- इस सीधा प्रसारण कार्यक्रम के लिए, वाईएसएस सहायता डेस्क तकनीकी सहायता के लिए सुबह 6:30 बजे (भारतीय समयानुसार) से उपलब्ध रहेगी।
भगवान कृष्ण : मानव रूप, दिव्य स्वरूप
शनिवार, 29 अगस्त, 2026
शाम 6:30 से – 7:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार)
जन्माष्टमी के पवित्र अवसर पर योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के संन्यासी, स्वामी अच्युतानन्द गिरि, हिन्दी में एक प्रवचन देंगे, जिसका शीर्षक है “भगवान कृष्ण : मानव रूप, दिव्य स्वरूप।”
इस प्रवचन में, स्वामी अच्युतानन्द श्रीकृष्ण के उदात्त स्वरूप का अन्वेषण करेंगे — जो पूर्ण अवतार हैं, जिनका नाम उस (आकर्षयति इति कृष्णः) अत्यंत सम्मोहक ब्रह्माण्डीय आकर्षण को दर्शाता है जो भटके हुए जीवों को उनके दिव्य घर की ओर वापस खींचता है। वे समझाएंगे कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण सामान्य इन्द्रिय बोध और नश्वर बुद्धि की पहुँच से परे, ईश्वर के नित्य-नवीन-आनन्द और निशर्त प्रेम के अविभाज्य सार को मूर्त रूप देते हैं।
यह प्रवचन उनकी दिव्य लीला के गूढ़ महत्त्व, राधा द्वारा प्रदर्शित आत्मा-से-परम ब्रह्म की शुद्ध भक्ति और सृष्टि का पोषण करने वाले ब्रह्माण्डीय सामंजस्य की और गहराई से विवेचना करेगा। भगवद्गीता पर परमहंस योगानन्दजी की प्रेरक व्याख्या, ईश्वर-अर्जुन संवाद से प्रेरणा लेते हुए, स्वामी अच्युतानन्द इस बात पर अपने विचार साझा करेंगे कि किस प्रकार क्रियायोग का विज्ञान और गहन अंतर्भूत ध्यान साधकों को इंद्रिय-सीमाओं के आवरण को भेदने, सीमित मानवीय आसक्तियों को सार्वभौमिक प्रेम (वसुधैव कुटुम्बकम्) में रूपांतरित करने और अपने भीतर सर्वज्ञ कृष्ण चैतन्य को जागृत करने में सहायक हैं।
शनिवार, 29 अगस्त को योगदा सत्संग मठ, दक्षिणेश्वर से सीधे प्रसारित किए जाने वाले इस सत्संग में सम्मिलित होने के लिए सभी का स्वागत है।
कृपया ध्यान दें : यह सत्संग शुक्रवार, 4 सितम्बर, रात्रि 10 बजे (भारतीय समयानुसार) तक देखने के लिए उपलब्ध रहेगा।
प्रत्यक्ष कार्यक्रम
इस पवित्र अवसर पर, वाईएसएस आश्रमों, केन्द्रों और मंडलियों में प्रत्यक्ष (in-person) कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। इन कार्यक्रमों के बारे में अधिक जानने और इनमें भाग लेने के लिए, कृपया अपने निकटतम ध्यान केन्द्र से संपर्क करें।
स्वामी चिदानन्द गिरि का जन्माष्टमी संदेश
“भगवान् श्रीकृष्ण के जन्मदिवस, जन्माष्टमी के इस आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी अवसर पर आप सभी को प्रेमपूर्ण शुभकामनाएँ। यद्यपि उनका जन्म सहस्रों वर्ष पूर्व हुआ था, फिर भी दिव्य प्रेम के इस महान् और प्रिय अवतार का उन लोगों के लिए आज भी उतना ही सजीव अस्तित्व है, जिनके हृदय उनके प्रति अनुरंजित हैं, जितना उस समय था जब वे अपने सुंदर मानवीय रूप में पृथ्वी पर विचरण करते थे—और वे आज भी योग के राजमार्ग पर आत्म-साक्षात्कार के लक्ष्य की ओर अग्रसर सच्चे साधकों का मार्गदर्शन करने और उनका उत्थान करने के लिए सदैव तत्पर हैं।”
दान करें
जन्माष्टमी हमें भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का अवसर देती है, जिन्होंने हमें भगवद्गीता का शाश्वत ज्ञान प्रदान किया है। यदि आप इस अवसर पर दान करना चाहते हैं, तो कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
अधिक जानने के लिए, आप निम्नलिखित लिंक देख सकते हैं :
- भगवान् श्रीकृष्ण एवं योग के स्वर्णिम मध्यवर्ती मार्ग पर परमहंस योगानन्द के विचार
- भगवद्गीता में अन्तर्निहित सत्य
- “जहाँ कृष्ण हैं, वहीं विजय है” — स्वामी चैतन्यानन्द गिरि
- “सच्ची भक्ति क्या है?” इस प्रश्न पर भगवान् कृष्ण का उत्तर
- पढ़ें : ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता
- देखिए : श्रीमद्भगवद्गीता पर प्रवचन
















