गुरु पूर्णिमा — 10 जुलाई, 2025
गुरु-शिष्य के बीच का संबंध मित्रता में प्रेम की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति है; यह निःशर्त दिव्य मित्रता है, जिसमें दोनों का एक ही साझा लक्ष्य
गुरु-शिष्य के बीच का संबंध मित्रता में प्रेम की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति है; यह निःशर्त दिव्य मित्रता है, जिसमें दोनों का एक ही साझा लक्ष्य
योगानन्दजी ने कहा, “आप उन लोगों के वास्तविक स्वभाव की थाह नहीं ले सकते जो ईश्वर को जानते हैं, क्योंकि उनकी गहराई अथाह है। मेरे
मनुष्य के आचरण का तब तक कोई भरोसा नहीं होता जब तक वह ईश्वर में अधिष्ठित न हो जाय। भविष्य में सब कुछ सुधर जाएगा
तुम्हारी स्थिर दैनिक आध्यात्मिक प्रगति के अलावा और किसी बात का कोई महत्त्व नहीं है; और उसके लिए क्रियायोग का उपयोग करो। — स्वामी श्रीयुक्तेश्वर
मेरा शरीर नहीं रहेगा, परन्तु मेरा कार्य चलता रहेगा। और मेरी चेतना विद्यमान रहेगी। — परमहंस योगानन्द महासमाधि एक ईश्वर-साक्षात्कार प्राप्त योगी की भौतिक शरीर
30 जुलाई को एक वाईएसएस संन्यासी द्वारा परमहंस योगानन्दजी की “आदर्श जीवन” की शिक्षाओं पर आधारित एक प्रेरणाप्रद प्रवचन हिंदी में दिया गया। इस प्रवचन
वाईएसएस ऑनलाइन ध्यान केंद्र पर वाईएसएस संन्यासियों द्वारा शनिवार, 2 जुलाई को एक विशेष छह घंटे लंबा ध्यान-सत्र आयोजित किया गया। ध्यान-सत्र का आरंभ शक्ति-संचार
28 मई को एक वाईएसएस संन्यासी द्वारा परमहंस योगानन्दजी की “आदर्श जीवन” की शिक्षाओं पर आधारित एक प्रेरणाप्रद प्रवचन हिंदी में दिया गया। प्रवचन का
वाईएसएस संन्यासियों द्वारा हिंदी में संचालित ऑनलाइन साधना संगम फ़रवरी 25 से 27 तक आयोजित किया गया। इस ऑनलाइन साधना संगम द्वारा भक्तों को न
Please share your location to continue.
Check our help guide for more info.