गुरु पूर्णिमा 2026 — श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश

14 जुलाई, 2026

जो शिष्य मानसिक रूप से अपने गुरु के साथ समस्वर होते हैं, गुरु उनमें ईश्वर के प्रकाश का संचार करते हैं जो उनके माध्यम से प्रवाहित होता है। यदि कोई भक्त गहन मानसिक एकाग्रता के साथ अपने गुरु को संदेश प्रसारित करता है, तो गुरु उसे ग्रहण कर लेते हैं और वे उसी प्रकार मौनपूर्वक आवश्यक सहायता प्रेषित करते हैं।

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

प्रिय आत्मन्,

आप सबको गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ। इस पवित्र अवसर पर, युगों-युगों से ईश्वर-साक्षात्कार की ज्योति को प्रज्वलित रखने वाले ईश्वरीय-ज्ञान से आलोकित सभी गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, आइए हम सब मिलकर अपने प्रिय गुरुदेव, श्री श्री परमहंस योगानन्दजी, के प्रति भी अपनी गहन कृतज्ञता प्रकट करें। एक जगद्गुरु के रूप में संसार के प्रति उनके अद्वितीय योगदान के लिए, और अधिक व्यक्तिगत रूप से स्वयं हमारे आध्यात्मिक विकास पर प्रेमपूर्ण और सतत्‌ सतर्क दृष्टि रखने के लिए — ईश्वर का एक माध्यम बनने के लिए जिसके द्वारा ईश्वर हमारा उद्धार कर रहे हैं, हमें मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं और हमें जाग्रत कर रहे हैं — हम उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।

हमारे लिए यह महान् सौभाग्य का विषय है कि हमारे समक्ष गुरुजी के विजयी जीवन और उनकी रूपांतरकारी शिक्षाओं की प्रेरणा और उदाहरण उपलब्ध है, जिसके माध्यम से उन्होंने हमें अपने अंतर् के प्रकाश को प्रकट करने की कुंजियाँ प्रदान की हैं। जैसे-जैसे हम उनकी कृपा के अनवरत प्रवाह के प्रति अधिकाधिक ग्रहणशील बनते हैं और स्वयं को पवित्र क्रियायोग साधना के प्रति समर्पित करते हैं, उनके साथ हमारी समस्वरता गहन होती जाती है और उनकी विद्यमानता हमारे दैनिक जीवन में एक जीवंत और प्रत्यक्ष वास्तविकता बन जाती है। उस विद्यमानता के प्रति हमारी ग्रहणशीलता के माध्यम से और उनकी शिक्षाओं के प्रत्येक अनमोल विचार से प्रवाहित होने वाली पवित्र शक्ति के माध्यम से वे सदा-उपस्थित और सदा-निकट बने हुए हैं, ठीक वैसे ही जब वे सशरीर इस धरती पर थे, हमें अलगाव के स्वप्न से जाग्रत करते हुए और हमारे अंतर् में दैदीप्यमान ईश्वरीय प्रकाश का अनुभव करने में हमारी सहायता करते हुए।

गुरुदेव के चरणों में जो महानतम भेंट हम अर्पित कर सकते हैं, वह है हमारी विनम्र ग्रहणशीलता, समर्पित आध्यात्मिक प्रयास और “मौन ईश्वर की मुखर वाणी” के रूप में उनके प्रति अटल एवं सच्ची निष्ठा। मेरी प्रार्थनाएँ आप सबके साथ हैं, कि आप अनुभव कर सकें कि उनके सतत् आशीर्वाद की पवित्र धारा से आपकी चेतना शुद्ध हो रही है — आपके हृदय में साहस, शाश्वत आनंद और हम सबको ईश्वर में एक करने वाले महान् दिव्य प्रकाश का संचार हो रहा है। जय गुरु!

ईश्वर और गुरुदेव के अविरत प्रेम एवं आशीर्वाद के साथ,

स्वामी चिदानन्द गिरि

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