योगदा सत्संग मठ — दक्षिणेश्वर

पश्चिम बंगाल

इतिहास एवं विकास

योगदा सत्संग मठ, दक्षिणेश्वर, उत्तर कोलकाता में गंगा के तट पर स्थित है, जो परमहंस योगानन्दजी द्वारा 1917 में स्थापित आध्यात्मिक संस्था योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) का पंजीकृत मुख्यालय है। इस सुंदर आश्रम का इतिहास 1939 से अंकित है, जब इस मठ की स्थापना हुई थी। इसके भव्य भवन और शांत परिवेश वाली यह संपत्ति परमहंसजी को अत्यधिक प्रिय थी। 1951 में, अमेरिका में सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप कॉन्वोकेशन के दौरान एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए, उन्होंने यह परिकल्पना की थी कि भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भक्त दक्षिणेश्वर आश्रम आएंगे।

गत वर्षों में, यह आश्रम हमारे दिवंगत प्रिय वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्षों — श्री दया माता और श्री मृणालिनी माता की पवित्र उपस्थिति से धन्य हुआ है। अपनी अनेक यात्राओं के दौरान, उन्होंने यहाँ भक्तों के साथ कई सत्संग, सामूहिक ध्यान, क्रियायोग दीक्षा समारोह और परामर्श सत्र आयोजित किए। वाईएसएस/एसआरएफ़ के वर्तमान अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख, श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि भी आश्रम आये हैं और सत्यान्वेशियों के आध्यात्मिक लाभ के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये हैं।

श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि
(वर्तमान अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख)

आश्रम का विवरण

दो एकड़ भूमि में फैला हुआ, फलों के उद्यान, फूल-पौधों और एक बड़े तालाब से युक्त दक्षिणेश्वर आश्रम मूल रूप से एक ‘गार्डन हाउस’ (बगीचे वाला घर) था। आश्रम के संबंध में परमहंसजी के स्वप्न को ध्यान में रखते हुए, भक्तों की सुविधा के लिए इसके परिसर के भीतर एक ध्यान कक्ष, एक अतिथि गृह, रसोईघर, कार्य और भोजन क्षेत्र का निर्माण किया गया।

1939 में अपनी स्थापना के बाद से, यह आश्रम सत्यान्वेशियों के लिए एक आश्रय स्थल के रूप में विकसित हुआ है। हम वाईएसएस संन्यासियों द्वारा सुबह और शाम आयोजित किए जाने वाले दैनिक सामूहिक ध्यान, रविवार के साप्ताहिक सत्संग, और विभिन्न स्मरणोत्सव कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आपका स्वागत करते हैं। वाईएसएस और एसआरएफ़ के भक्तों का आश्रम में व्यक्तिगत और निर्देशित रिट्रीट में भाग लेने के साथ-साथ अन्य विशेष कार्यक्रमों में स्वागत है, जिनमें साधना संगम भी शामिल हैं, जिसके अंतर्गत दिन में दो बार सामूहिक ध्यान का अभ्यास, वाईएसएस ध्यान प्रविधियों का पुनरवलोकन, अंग्रेजी, बंगाली और हिन्दी में सत्संग, तथा अन्य विभिन्न कार्यक्रम शामिल हैं।

विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन करने के अतिरिक्त, वाईएसएस दक्षिणेश्वर आश्रम सीमित वित्तीय साधनों वाले लोगों की सहायता के लिए अनेक शैक्षणिक, चिकित्सीय और अन्य परोपकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से संलग्न है। इनमें कोलकाता और उसके आसपास कई होम्योपैथिक और एलोपैथिक क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, और विद्यालयों तथा महाविद्यालयों का संचालन शामिल है।

वाईएसएस के लिए नए हैं?

विस्तार से जानिए कि कैसे वाईएसएस पाठमाला, जो एक गृह-अध्ययन पाठ्यक्रम है, आपके जीवन को अकल्पनीय तरीकों से रूपांतरित करती है और आपको एक संतुलित एवं सफल जीवन जीने में सहायता करती है।

para-ornament

कोलकाता में परमहंस योगानन्दजी के जीवन से जुड़े दर्शनीय स्थल

संतों के निवास स्थानों पर जाने का भी अत्यधिक महत्त्व है। ऐसे स्थान उन दिव्य आत्माओं द्वारा छोड़े गए स्पन्दनों से सदा के लिए ओत-प्रोत रहते हैं, जिन्होंने उस भूमि पर विचरण किया था। उनके स्पंदन इस पृथ्वी के विलीन होने तक बने रहेंगे। जहाँ आत्माओं ने ईश्वर के साथ सम्पर्क किया है, वहाँ आपको ईश्वर की अधिक अनुभूति और प्रतिक्रिया मिलेगी। प्रायः ऐसी तीर्थयात्राएँ किसी के जीवन को पूरी तरह से परिवर्तित कर उन्नत बना देती हैं।

— परमहंस योगानन्द

परमहंस योगानन्दजी के इन वचनों से प्रेरित होकर, हम आपको महान् गुरु की उपस्थिति से पावन हुए विभिन्न स्थानों की एक पवित्र तीर्थयात्रा करने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह कोलकाता शहर में ही परमहंसजी ने अपने शुरुआती वर्ष बिताए, अपने गुरु श्री श्री स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि से आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, और अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी की, इसके बाद वे दुनिया भर में क्रियायोग की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए अमेरिका गए, यह एक पवित्र ज़िम्मेदारी थी जो उन्हें उनके गुरुओं की परंपरा — महावतार बाबाजी, लाहिड़ी महाशय और श्री श्री स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि द्वारा सौंपी गई थी।

श्रीरामपुर में यहीं कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपने गुरु के आश्रम में आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्राप्त करने में अपना अधिकांश समय बिताया था। श्रीयुक्तेश्वरजी के सम्मान में, आश्रम परिसर

कोलकाता में 4 गड़पार रोड, परमहंस योगानन्दजी का पारिवारिक निवास-स्थान है, जो देश-विदेश के भक्तों के लिए एक अत्यंत पूजनीय तीर्थ-स्थल है। दूसरी मंजिल का अटारी कक्ष उनका पवित्र अभयारण्य था जहाँ वे ईश्वर के साथ संपर्क स्थापित करते थे और उन्हें अनेक दिव्य अनुभूतियाँ तथा दिव्य दर्शन प्राप्त हुए थे।

निकट ही 50, एमहर्स्ट स्ट्रीट स्थित है, जो श्री मास्टर महाशय (श्री रामकृष्ण परमहंस के एक उच्च कोटि के शिष्य) का निवास-स्थान है, जिनके दर्शनों के लिए परमहंसजी अपने प्रारंभिक वर्षों में अक्सर जाया करते थे। संयोगवश यह वही स्थान है जहाँ योगानन्दजी की माता का उस समय देहांत हो गया था जब उनका परिवार इस घर में रह रहा था।

राममोहन रॉय रोड पर, जो गड़पार रोड पर स्थित परमहंस योगानन्दजी के पैतृक आवास से लगभग आधा किलोमीटर दूर है, नागेन्द्र मठ स्थित है। यह वही स्थान है जहाँ भादुड़ी महाशय (योगानन्दजी द्वारा अपने आध्यात्मिक गौरव ग्रन्थ योगी कथामृत में वर्णित “प्लवनशील संत”) निवास करते थे। स्कूल से वापस लौटते समय, महान् गुरु अक्सर उस संत से मिलने और उनके साथ आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करने के लिए वहाँ रुका करते थे।

एक अन्य निकटवर्ती दर्शनीय स्थल योगदा सत्संग ध्यान केन्द्र, गड़पार है। योगानन्दजी के बालमित्र तुलसी नारायण बोस के घर के समीप स्थित यह स्थान वह है, जहाँ महान् गुरु अपनी युवावस्था में अपने मित्रों के साथ ध्यान किया करते थे।

श्रीरामपुर में श्रीयुक्तेश्वरजी का आश्रम और अन्य संबंधित स्थान

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में स्थित श्रीरामपुर, परमहंस योगानन्दजी और उनके गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी के जीवन से जुड़े अनेक पवित्र स्थानों से धन्य हुआ है।

श्रीरामपुर में यहीं कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपने गुरु के आश्रम में आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्राप्त करने में अपना अधिकांश समय बिताया था। श्रीयुक्तेश्वरजी के सम्मान में, आश्रम परिसर के भीतर एक स्मृति मंदिर का निर्माण किया गया है। आश्रम के निकट ही योगानन्दजी के चाचा श्री शारदा प्रसाद घोष का घर है, जहाँ योगानन्दजी कुछ समय के लिए ठहरे थे। बाद में उनके चचेरे भाई, श्री प्रभास चंद्र घोष ने उस कमरे को, जहाँ योगानन्दजी ठहरे थे, आनंदलोक (आनंद का निवास) मंदिर में परिवर्तित कर दिया।

श्रीरामपुर में राय घाट लेन पर गंगा के तट पर विशाल बरगद का पेड़ खड़ा है, जो अमर महावतार बाबाजी और स्वामी श्रीयुक्तेश्वर की भेंट का मूक साक्षी है, जब स्वामीजी ने बाबाजी के निर्देशानुसार कैवल्य दर्शनम् पुस्तक लिखने का कार्य पूरा किया था।

राय घाट लेन से केवल कुछ सौ मीटर की दूरी पर वह भूखंड है, जो कभी पंथी बोर्डिंग हाउस था, जिसमें योगानन्दजी अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान रहे थे। यह पुराना भवन, जर्जर अवस्था में होने के कारण, अब स्थानीय परिषद द्वारा गिरा दिया गया है।

इससे थोड़ी ही दूर श्रीरामपुर कॉलेज है, जिसमें योगानन्दजी बैचलर ऑफ़ आर्ट्स पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले और अपनी ए.बी. डिग्री प्राप्त करने वाले प्रथम विद्यार्थियों में से थे।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर

वाईएसएस दक्षिणेश्वर आश्रम से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर विश्व प्रसिद्ध काली मंदिर स्थित है। दक्षिणेश्वर, भवतारिणी (जो अपने भक्तों को भवसागर से पार लगाती हैं) के रूप में माँ काली के नौ-गुंबद वाले मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो लेटे हुए शिवजी की छाती पर खड़ी हैं। इस मंदिर में एक अत्यंत परिश्रम से तराशे गए सहस्रदल (हज़ार पंखुड़ियों वाले) रजत कमल पर देवी माँ और भगवान शिव की सुंदर मूर्तियाँ विराजमान हैं।

अपनी योगी कथामृत में, योगानन्दजी ने इस मंदिर की अपनी अनेक तीर्थयात्राओं का वर्णन किया है। इसी मंदिर प्रांगण में उन्होंने अपनी बहन, रोमा और उनके पति, सतीश के साथ आने पर एक परमानन्दमय दिव्य दर्शन प्राप्त किया था। सतीश, जो एक नास्तिक थे, जगन्माता से योगानन्दजी की तीव्र प्रार्थना के फलस्वरूप एक मूक संत में बदल गए थे। करुणामयी माता के रूप में परमपिता के प्रति परमहंस योगानन्दजी का प्रेम उन्हें अक्सर इस मंदिर की ओर आकर्षित करता था, जहाँ वे बरामदे में, श्री रामकृष्ण परमहंसजी के कमरे में, और पंचवटी में उस वटवृक्ष के नीचे भी कई घंटों तक ध्यान किया करते थे, जहाँ श्री रामकृष्ण परमहंस को आत्म-साक्षात्कार प्राप्त हुआ था। मंदिर परिसर में वह पवित्र कमरा जहाँ श्री रामकृष्ण ने अपने जीवन के अंतिम 14 वर्ष बिताए थे, एक तीर्थ-स्थान के रूप में संरक्षित है, जहाँ भक्त ध्यान कर सकते हैं और उनके द्वारा उपयोग की गई कई वस्तुओं को भी देख सकते हैं।

गंगा नदी के तट पर स्थित, यह सड़क, रेल, मेट्रो और फेरी जैसे परिवहन के विभिन्न माध्यमों से शहर से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मन्दिर का वातावरण आगंतुकों के लिए गहराई से ध्यान करने और जगन्माता के साथ समस्वर होने हेतु एक प्राकृतिक वातावरण प्रदान करता है।

निकटवर्ती वाईएसएस ध्यान केन्द्र

वाईएसएस दक्षिणेश्वर आश्रम के समीप 3 ध्यान केंद्र नीचे दिए जा रहे हैं :

 
किसी विशिष्ट स्थान के लिए कार्यक्रम विवरण, वहाँ तक पहुँचने के मार्ग और अन्य संबंधित जानकारी के विवरण हेतु, कृपया ऊपर दिए गए संबंधित लिंक पर जाएँ।

साप्ताहिक कार्यक्रम

सामूहिक ध्यान

हम नियमित ध्यान और सत्संग का आयोजन करते हैं, जो सभी के लिए खुले हैं। इन सत्रों में मौन ध्यान, भक्ति संकीर्तन और प्रेरणादायक पठन शामिल होता है।

रविवार
सुबह 10:30 बजे – दोपहर 12:00 बजे
रविवार सत्संग (संक्षिप्त ध्यान शामिल)
शाम 4:30 बजे – रात 8:00 बजे
शाम का ध्यान
गुरुवार
सुबह 7:00 बजे – सुबह 8:00 बजे
सुबह का ध्यान
शाम 5:30 बजे – रात 9:00 बजे
शाम का ध्यान
अन्य दिन
सुबह 7:00 बजे – सुबह 8:00 बजे
सुबह का ध्यान
सुबह 10:00 बजे – शाम 4:00 बजे
लम्बा ध्यान
शाम 5:30 बजे – रात 7:00 बजे
शाम का ध्यान
बच्चों के लिए सत्संग

इन सत्रों में 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चे, रोचक कार्यक्रमों के माध्यम से, वाईएसएस की शिक्षाओं तथा जीवन-पद्धति को जानने का अवसर पाते हैं। इन कार्यक्रमों में कहानी सुनाना, संक्षिप्त निर्देशित ध्यान, तथा अन्य संवादात्मक शिक्षण विधियाँ शामिल होती हैं। अधिक जानें।

रविवार
सुबह 10:30 बजे – सुबह 11:30 बजे

वाईएसएस साधना संगम

वाइएसएस-साधना-संगम-चेन्नई-आश्रम-2024-समूह-फ़ोटो-संन्यासी-और-भक्त

पाँच दिवसीय कार्यक्रम जो योगदा सत्संग शिक्षाओं के अनुयायियों को वाईएसएस ध्यान प्रविधियों, सामूहिक ध्यान, कीर्तन सत्रों और संन्यासियों के प्रेरणादायक सत्संगों के माध्यम से परमहंस योगानन्दजी की शिक्षाओं में स्वयं को पूरी तरह से मग्न कर देने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। इनमें से कुछ कार्यक्रमों में क्रियायोग दीक्षा समारोह भी शामिल होते हैं।

वाईएसएस ई-न्यूज़ के लिए साइन अप करें और अद्यतन जानकारी तथा कार्यक्रम संबंधी घोषणाएँ प्राप्त करें

आगामी विशेष कार्यक्रम और दीर्घ ध्यान

मासिक लम्बा ध्यान
24 अक्टूबर, 2026, शनिवार
सुबह 10:00 बजे – शाम 4:00 बजे
सामूहिक ध्यान
मासिक लम्बा ध्यान
14 नवंबर, 2026, शनिवार
सुबह 10:00 बजे – शाम 4:00 बजे
सामूहिक ध्यान
साधना संगम (हिन्दी)

अधिक जानें

18 नवंबर, 2026, बुधवार – 22 नवंबर, 2026, रविवार

समाचार एवं फ़ोटो गैलरी

अपनी यात्रा की योजना बनाएँ

क्या आप दिन के समय आश्रम आना चाहेंगे?

हम सामूहिक ध्यान में भाग लेने, आश्रम के उद्यानों की शांति का आनंद लेने, या दक्षिणेश्वर के आसपास परमहंस योगानन्दजी के जीवन से जुड़े पवित्र स्थानों की तीर्थयात्रा करने के लिए आपका स्वागत करते हैं। यदि आप आश्रम के निर्देशित दौरे (गाइडेड टूर), या महान् गुरु के जीवन से जुड़े दर्शनीय स्थलों की यात्रा करने में रुचि रखते हैं, तो कृपया अपॉइंटमेंट लेने के लिए रिसेप्शन डेस्क से संपर्क करें।

समय:

  • आश्रम परिसर – सभी आगंतुकों के लिए प्रतिदिन सुबह 6:00 से रात 9:00 बजे तक खुला है।
  • स्वागत कक्ष और पुस्तक कक्ष:
    • सोमवार से शनिवार – सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे तक
    • रविवार – सुबह 11:30 से शाम 4:00 बजे तक

 
एक व्यक्तिगत रिट्रीट के लिये आएँ या आश्रम में किसी निर्देशित रिट्रीट में सम्मिलित हों

वाईएसएस और एसआरएफ पाठमाला के अनुयायियों का आश्रम में अधिकतम पाँच दिनों तक ठहरने के लिए स्वागत है। हम श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित करते हैं कि वे स्वयं को तरोताज़ा और नवीन ऊर्जा से पूर्ण करने के लिए व्यक्तिगत रिट्रीट के लिये आएँ या हमारे द्वारा संचालित रिट्रीट में भाग लें। इन रिट्रीटों के दौरान, वाईएसएस संन्यासियों द्वारा दिन में दो बार आयोजित सामूहिक ध्यान में भाग लिया जा सकता है, वाईएसएस ध्यान प्रविधियों की पुनरवलोकन कक्षाओं में उपस्थित हुआ जा सकता है, योगदा सत्संग शिक्षाओं के अध्ययन और अभ्यास में आध्यात्मिक परामर्श और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है, और शांत आश्रम परिसर के प्राकृतिक वातावरण का आनंद लिया जा सकता है। ये रिट्रीट सभी चिंताओं और सांसारिक प्रपंचों को त्यागने तथा शरीर, मन और आत्मा को विश्राम देने का एक अद्भुत अवसर भी प्रदान करते हैं।

संपर्क करें

Yogoda Satsanga Math — Dakshineswar
21, U. N. Mukherjee Road
Dakshineswar
Kolkata - 700076
North 24 Parganas
West Bengal
India

शेयर करें